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देश के लिए ओलंपिक मेडल जीतना है माधवन के बेटे का सपना, त्याग दी आराम की जिंदगी

आर माधवन के बेटे वेदांत माधवन बॉलीवुड से दूर स्विमिंग में करियर बना रहे हैं. वे रोज सुबह 4:30 बजे उठकर कड़ी ट्रेनिंग करते हैं और उनका सपना ओलंपिक गोल्ड जीतना है. जानिए उनका मुश्किल रूटीन और संघर्ष की कहानी.

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आर माधवन को नहीं चाहिए शोबिज की जिंदगी (Photo: ITG)
आर माधवन को नहीं चाहिए शोबिज की जिंदगी (Photo: ITG)

अक्सर स्टार किड्स अपने पेरेंट्स के नक्शे-कदम पर चलते हैं, और शोबिज में करियर बनाते हैं. लेकिन बलीवुड एक्टर आर.माधवन का बेटे वेदांत माधवन इनसे अलग हैं. वो एक शानदार स्विमर हैं और देश के लिए मेडल्स जीतना चाहते हैं. वेदांत फिलहाल दुबई में पढ़ाई के साथ कड़ी ट्रेनिंग कर रहे हैं. उनका सपना एक दिन ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है.

“सुबह 4:30 बजे शुरू होता है दिन”

वेदांत का रूटीन बेहद मुश्किल है. वो इसके बारे में बात कर चुके हैं. उन्होंने इसके बारे में बताया जो किसी ग्लैमरस स्टार किड लाइफ से बिल्कुल अलग है.

वेदांत ने कहा- कठिन दिनों में मैं सुबह करीब 4:30 बजे उठता हूं और 4:45 तक पूल पहुंच जाता हूं. सुबह 5 से 7 बजे तक स्विमिंग करता हूं. फिर स्ट्रेचिंग करके घर लौटता हूं. अगर स्कूल होता है तो वहां जाता हूं. वापस आने के बाद थोड़ा स्नैक खाता हूं, आराम करता हूं और फिर शाम को दोबारा पूल चला जाता हूं. शाम 7:30 से रात 9:30 तक फिर स्विमिंग करता हूं. अगर जिम जाना होता है तो उसे स्कूल और शाम की स्विमिंग के बीच फिट करता हूं. फिर खाना खाकर सो जाता हूं और अगला दिन फिर ऐसे ही शुरू हो जाता है.

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उन्होंने आगे कहा- ये बहुत कठिन है, लेकिन सब कुछ त्याग पर टिका है. आपको कई चीजें छोड़नी पड़ती हैं और प्रोसेस पर भरोसा रखना पड़ता है. मानसिक लड़ाई बहुत जरूरी होती है. मेरे कोच हमेशा कहते हैं कि वर्तमान में रहो, फाइनल के बारे में मत सोचो, सिर्फ इस पल पर ध्यान दो.

दुबई में रहकर दिन-रात मेहनत कर रहा माधवन का बेटा

वेदांत ने दुबई शिफ्ट होने के अनुभव पर भी बात की. उन्होंने कहा- दुबई आना काफी आसान रहा. यहां हम अच्छे से बस गए. स्विमिंग में दिक्कत नहीं हुई क्योंकि जहां मैं ट्रेनिंग करता हूं वहां कई भारतीय हैं. लेकिन यहां पढ़ाई, स्विमिंग और सोशल लाइफ को बैलेंस करना थोड़ा अलग था. कोविड के दौरान यहां आने से मेरी ट्रेनिंग जारी रह सकी. मैंने भारत की आरामदायक जिंदगी, दोस्तों और अपने कम्फर्ट जोन को छोड़ा ताकि खुद को बेहतर बना सकूं. मेरा मुख्य लक्ष्य ओलंपिक मेडल जीतना है. दुर्भाग्य से मैं इस साल क्वालिफाई नहीं कर पाया, लेकिन मुझे और बेहतर बनना है.

अपने पेरेंट्स के सपोर्ट पर वेदांत ने कहा- मेरे माता-पिता बहुत सपोर्टिव हैं. हर बच्चे को ऐसे माता-पिता नहीं मिलते जो उसके सपनों को पूरा सपोर्ट करें. अगर मेरे माता-पिता नहीं होते तो मैं आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाता. मैं उनका बहुत आभारी हूं.

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वहीं, माधवन ने भी एक इंटरव्यू में अपने बेटे की अनुशासित जिंदगी के बारे में बात की थी. उन्होंने कहा- एक प्रोफेशनल स्विमर होने के नाते वेदांत का दिन रात 8 बजे खत्म होता है और फिर सुबह 4 बजे शुरू हो जाता है. ये सिर्फ उसके लिए नहीं बल्कि माता-पिता के लिए भी बहुत मुश्किल होता है. सुबह का वो समय ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है, जिसे आध्यात्मिक रूप से सबसे अच्छा समय माना जाता है.

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