
RRR के म्यूजिक कम्पोजर एमएम कीरावानी ऑस्कर अवार्ड्स 2023 के मंच पर, हाथ में ट्रॉफी लिए कहते हैं- मैं कारपेंटर्स की आवाज सुनकर बड़ा हुआ. और यहां मैं (गाना कम्पोज करने के लिए) ऑस्कर पकडे खड़ा हूं.' बेस्ट ऑरिजिनल सॉन्ग का ऑस्कर अवार्ड जीतने वाले 'नाटू नाटू' को धुन में पिरोने वाले कीरावानी अपनी स्पीच पूरी कर रहे हैं और उनके पीछे, गाने के बोल लिखने वाले गीतकार चंद्रबोस कभी अपनी ट्रॉफी निहार रहे हैं, कभी उसे दुनिया के सामने लहरा रहा हैं.
ऑस्कर अवार्ड्स 2023 से आए इस वीडियो में, सिनेमा में शानदार काम को सराहने के सबसे बड़े मंच पर, भारत का सीना चौड़ा होने का पल हमेशा के लिए दर्ज हो चुका है. भारतीय सिनेमा के जीनियस डायरेक्टर एसएस राजामौली की RRR ने पिछले कुछ महीनों में दुनिया भर की जनता, फिल्म क्रिटिक्स और सिनेमा प्रेमियों का दिल जीता है.
फिल्म के गाने 'नाटू नाटू' को मिला ऑस्कर सिर्फ एक अवार्ड नहीं है. ये भारतीयता की फीलिंग का सेलिब्रेशन है. 'नाटू नाटू' को एक बार देखने पर आपको ये बस एक फिल्म का एक और गाना लग सकता है. मगर इसकी कड़ियों को खोलकर देखें तो आपको हर उस चीज का सेलिब्रेशन मिलेगा जिसे अपने आर्ट, अपनी संस्कृति और अपने इतिहास में हिन्दुस्तानियों ने सहेज रखा है. आइए बताते हैं कैसे...
(यहां देखें एमएम कीरावानी की स्पीच का वीडियो)
जेनी उसे डांस सिखा रही है, लेकिन उसका ब्रिटिश साथी जेक, टांग अड़ा कर भीम को गिरा देता है. वो भीम को पिछड़ी सभ्यता का बताकर और 'देसी गंवार अनपढ़' कहकर भरी महफिल में जलील कर रहा है. ये सीन देखकर अंग्रेजों की इस पार्टी में वेटर बने दो हिंदुस्तानी लगने वाले आदमी भी सर झुकाए खड़े हैं. और पार्टी के म्यूजिक ऑर्केस्ट्रा में ड्रम्स बजा रहा एक अश्वेत आदमी बहुत शर्मिन्दा हो रहा है. इतिहास में दर्ज है कि ब्रिटिश शासन के कोलोनियल एजेंडा ने सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं, अफ्रीका के देशों को भी चपेट में लिया था.

'नाटू नाटू' के पूरे सीक्वेंस में ड्रम्स बजाने वाला अश्वेत व्यक्ति इसी का एक रेफरेंस है. वो ताल दे रहा है और दोनों भारतीय हीरो ताबड़तोड़ डांस कर रहे हैं. यहां से 'नाटू नाटू' सिर्फ एक गाना नहीं बचता, एक युद्ध बन जाता है. बस यहां तलवार-गोलियां नहीं, डांस कॉम्पिटिशन है. अब 'नाटू नाटू' का असर कुछ वैसा हो जाता है जैसा मनोज कुमार के गाने 'है प्रीत जहां की रीत सदा' में था. 'नाटू नाटू' सिर्फ एक गाना नहीं एक पूरा सीक्वेंस है जिसे डायरेक्टर एसएस राजामौली ने अपने ट्रेडमार्क परफेक्शन से तैयार किया है.
संगीत में मौजूद इंडियन फीलिंग
एक बात हर किसी को मान लेनी चाहिए कि हम हिंदुस्तानी म्यूजिक को लेकर क्रेजी होते हैं. सबका टेस्ट अलग-अलग हो सकता है, मगर दीवानापन सबमें होता है. मोहल्ले में किसी अनजाने आदमी की बारात गुजरती है, और ढोल की आवाज पर लोग घर में बैठे थिरकने लगते हैं. इंडिया में लोग ढोल, ढोलक, तबला किसी भी थाप वाले इंस्ट्रूमेंट यानी ड्रम्स की साउंड के दीवाने होते हैं. RRR में म्यूजिक देने वाले एम एम कीरावानी ने 'नाटू नाटू' में ड्रम्स जिस तरह इस्तेमाल किए हैं, वो अद्भुत है. हिन्दुस्तानी जनता का ड्रम्स के लिए प्यार 'नाटू नाटू' में खुलकर सुनाई देता है.

डांस स्टेप में उतरता गुस्सा
'नाटू नाटू' में एक हुक स्टेप नहीं है, कई स्टेप्स का कॉम्बिनेशन है. लेकिन इन सभी में एक बात कॉमन है- सारे डांस स्टेप बहुत देसी हैं. ये हाथ-पैर समेट के, कोहनी को धड़ के करीब रखकर स्मूथ फ्लो के साथ मूवमेंट वाले तथाकथित शालीनता भरे स्टेप नहीं हैं. 'नाटू नाटू' के डांस स्टेप को देसी भाषा में 'हाथ-पैर फेंक के नाचना' कहा जा सकता है. गाने में राम चरण और जूनियर एनटीआर का बॉडी मूवमेंट, डांस की कला दिखाने के लिए नहीं है. यहां डांस एक एक्सप्रेशन है. दबे हुए गुस्से और एग्रेशन का एक्सप्रेशन. जनता को बांध के रखने वाली सत्ता के सामने, डांस मूवमेंट के बंधन तोड़कर नाचने का एक्सप्रेशन.

लिरिक्स का देसीपन
'नाटू नाटू' का म्यूजिक जितना कदम थिरकाने वाला है, इसके लिरिक्स उतने ही देसी हैं. चंद्रबोस की कलम से निकले ऑरिजिनल 'नाटू नाटू' के लिरिक्स भारतीय मिट्टी से जुड़े हुए हैं. 'बरगद के पेड़ के नीचे जुटे लड़कों' और 'मिर्च के साथ ज्वार की रोटी' खाकर होने वाली फीलिंग के साथ नाचना एक बेहद देसी कॉन्टेक्स्ट है. लिरिक्स में 'हरी मिर्च' और 'खंजर' की बात करता 'नाटू नाटू', पूरे एग्रेशन के साथ नाचने को तो कहता ही है. साथ ही, जो छवियां दिमाग में बनती हैं वो जमीन से जुड़े, देहात से आने वाले भारतीय को भी उसकी जड़ों की याद दिलाती हैं.
देसी नाच से दिया पहचान के सवाल का जवाब
भारतीय फिल्मों को बिना डांस के सोच पाना भी मुश्किल है. मगर बहुत सालों से विदेशों में, भारतीय फिल्मों में होने वाले नाच-गाने का मजाक बनता रहा है. विदेशी जनता में ये परसेप्शन रहा है कि इंडियन फिल्मों में सिर्फ नाच-गाना होता है और कुछ नहीं. दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म अवार्ड्स में 'नाटू नाटू' का जीतना, उस सवाल का जवाब है जो इंडियन फिल्मों के नाच-गाने पर उठाया जाता रहा है.

'नाटू नाटू' का ऑस्कर जीतना सभी भारतीयों के लिए तो गर्व की बात है ही. मगर तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी ये एक शानदार मोमेंट है. पिछले कई सालों तक दुनिया भर में इंडियन सिनेमा के नाम पर बॉलीवुड या हिंदी फिल्मों को ही पहचान मिलती रही है. RRR की ग्लोबल पॉपुलैरिटी दुनिया में ये फैक्ट पहुंचाती है कि भारत में सिर्फ एक ही फिल्म इंडस्ट्री नहीं है. हमारे देश में कई भाषाओं में सिनेमा फिल्में बनती हैं और सभी जगह से एक से बढ़कर एक दमदार फिल्में निकलती हैं. आज का दिन इंडियन सिनेमा के इतिहास में एक सुनहरा पन्ना बनकर जुड़ गया है. इस ऐतिहासिक मोमेंट को सेलिब्रेट करने का सबसे बेहतरीन तरीका यही हो सकता है कि भारतीयता के परफेक्ट सेलिब्रेशन 'नाटू नाटू' पर एक बार फिर से कदमों थिरकने के लिए झिझक-शर्म के बंधनों से आजाद कर दिया जाए!