
भारतीय सिनेमा के लिए ऑस्कर हमेशा से एक बड़ा सपना रहा है. हर साल कुछ चुनिंदा फिल्में इस रेस में जगह बनाती हैं और जब कोई फिल्म बाहर होती है, तो उससे जुड़ी टीम और दर्शकों- दोनों को ही निराशा होती है. ऐसी ही खबर सामने आई है फिल्म ‘होमबाउंड’ को लेकर, जो अब ऑस्कर की रेस से बाहर हो चुकी है.
करण ने जताया गर्व
इस खबर के सामने आने के बाद फिल्म के फिल्म मेकर करण जौहर ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी शेयर कर अपनी भावनाएं जाहिर कीं. उन्होंने फिल्म से जुड़े कुछ खूबसूरत सीन की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा- गर्व महसूस कर रहा हूं! नीरज घेवान आपसे बहुत प्यार. हमें आपकी रोशनी में चमकने का मौका देने के लिए धन्यवाद. #होमबाउंड.
यह पोस्ट साफ तौर पर फिल्म और इसके निर्देशक के प्रति उनके गर्व और सम्मान को दिखाती है. वो आज भी अपनी फिल्म होमबाउंड पर गर्व करते हैं.

क्या है ‘होमबाउंड’?
‘होमबाउंड’ एक संवेदनशील और भावनात्मक फिल्म है, जिसका निर्देशन किया है नीरज घेवान ने. नीरज इससे पहले ‘मसान’ जैसी सराही गई फिल्म बना चुके हैं. ‘होमबाउंड’ भी उसी तरह इंसानी रिश्तों, यादों, जड़ों और घर की भावना को बहुत सादगी और गहराई से पेश करती है.
फिल्म की कहानी दो दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने-अपने संघर्षों, टूटे सपनों और बीते हुए कल के साथ जी रहे हैं. गांव, शहर, बचपन और वर्तमान के बीच झूलती यह कहानी दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती है. फिल्म में बड़े-बड़े डायलॉग्स नहीं, बल्कि खामोशी, नजरों और छोटे-छोटे पलों के जरिए बात कही गई है. फिल्म में जाह्नवी कपूर भी हैं.
क्यों थी ऑस्कर से उम्मीद?
‘होमबाउंड’ को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में सराहना मिली थी. इसकी सिनेमैटोग्राफी, कहानी कहने का अंदाज और मानवीय संवेदनाएं ऐसी थीं, जो ऑस्कर जैसी वैश्विक मंच पर भी असर छोड़ सकती थीं. यही वजह थी कि फिल्म को लेकर ऑस्कर रेस में अच्छी उम्मीदें लगाई जा रही थीं. हालांकि, कड़े कॉम्पीटीशन के चलते फिल्म इस रेस में आगे नहीं बढ़ पाई.
सीमित रिलीज, सीमित कमाई
‘होमबाउंड’ को देशभर में बड़े पैमाने पर रिलीज नहीं किया गया. यह फिल्म चुनिंदा सिनेमाघरों और फिल्म फेस्टिवल सर्किट तक सीमित रही. ऐसे में इसके बॉक्स ऑफिस आंकड़े भी सीमित ही रहे. शुरुआती दिनों में फिल्म को औसत ओपनिंग मिली और धीरे-धीरे दर्शकों की संख्या में गिरावट देखी गई.
फिल्म ने पहले हफ्ते में बहुत बड़ी कमाई नहीं की, लेकिन जो दर्शक सिनेमाघर तक पहुंचे, उन्होंने फिल्म की तारीफ की. वर्ड ऑफ माउथ अच्छा रहा, मगर वह टिकट खिड़की पर बड़े नंबरों में नहीं बदल सका.