बॉलीवुड एक्ट्रेस दिव्या दत्ता इन दिनों अपनी वेब सीरीज 'चिरैया' को लेकर चर्चा में हैं. जियो हॉटस्टार पर रिलीज हुए इस शो ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. ये शो मैरिटल रेप जैसे गंभीर विषय पर बात करती है. इसे ऑडियंस पसंद कर रही है तो वहीं इंटरनेट का एक हिस्सा मर्दों के खिलाफ भी बता रहा है. हाल ही में दिव्या ने महिलाओं की सुरक्षा पर बात करते हुए एक बेहद पर्सनल और इमोशनल कहानी सुनाई. उन्होंने बताया कि ईव टीजिंग जैसी घटना का सामना करने का साहस उन्हें अपनी मां से मिला है.
दिव्या की बहन को लड़के ने छेड़ा
जूम के साथ बात करते हुए दिव्या दत्ता ने अपनी बहन के साथ हुई घटना को पहली बार पब्लिकली याद किया. उन्होंने कहा, 'वो मेरी बहन को पीछे चुटकी काटने वाला था और मैंने बस उसे पकड़ लिया. अब ये आत्मविश्वास कहां से आया? क्योंकि मैं पूरी तरह से तैयार थी. ये मेरी मां से आया था. मैंने उसे पकड़ा और इतना कसकर मारा कि उसके होश ठिकाने लगा दिए. सबने पलटकर देखा और फिर सब लोग मदद के लिए आ गए. वो लड़का भाग गया. यही आत्मविश्वास दूसरों को देना है. जिन्हें आप प्यार करते हैं, उनके लिए खड़े हो.'
दिव्या दत्ता ने बचपन की एक और जरूरी घटना का भी जिक्र किया. स्कूल से घर आते समय एक लड़का बार-बार उन्हें परेशान करता था. उन्होंने बताया, 'जब मैंने अपनी मां को बताया, तो उन्होंने तुरंत एक्शन लिया. अगले दिन वे उसी गली में कुछ लोगों के साथ खड़ी रहीं और उस लड़के का सीधा सामना किया. उस घटना ने मुझे बहुत कुछ सिखाया, लोगों के खड़े होकर सामना करने के बारे में और डर को हावी न होने देने के बारे में.'
नेशनल फिल्म अवॉर्ड विजेता रहीं एक्ट्रेस ने बताया कि इन अनुभवों ने उन्हें खुद के लिए खड़े होने का आत्मविश्वास दिया, जो बाद में उनके प्रोफेशनल जीवन में भी काम आया. दिव्या दत्ता ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में काम करते समय धैर्य और अपनी पर्सनल बाउंड्री का साफ ज्ञान बहुत जरूरी है. उनके अनुसार, उन्होंने जानबूझकर 'लंबा रास्ता' चुना. उन्होंने जल्दबाजी में कोई भी रोल स्वीकार करने की बजाय उन मौकों का इंतजार किया जो उनके मूल्यों से मेल खाते थे.
एक्ट्रेस ने कहा कि एक ऐसी इंडस्ट्री में जहां रिश्ते और रेपुटेशन बहुत तेजी से फैलते हैं, बार-बार गलत लगने वाले प्रोजेक्ट्स को 'नहीं' कहने से आखिरकार उन्हें वजनदार और अर्थपूर्ण रोल मिले. दिव्या दत्ता ने यह भी बताया कि शालीनता से अपनी बात रखना, वो भी बिना फालतू विवाद पैदा किए, एक ऐसा कौशल है जो समय, अनुशासन और अनुभव के साथ विकसित होता है. इसी ने पूरे करियर में उनकी गरिमा और एजेंसी बनाए रखने में मदद की है.