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'26 जानें, 26 विधवाएं और परिवार तबाह', पहलगाम हमले की बरसी पर बोले डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री

विवेक अग्निहोत्री ने पहलगाम हमले की बरसी पर उन 26 लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने अपनी जान गंवाई थी. उन्होंने इमोशनल नोट शेयर करते हुए लिखा, 'कभी नहीं भूलेंगे, कभी माफ नहीं करेंगे.'

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पहलगाम हमले पर बोले विवेक अग्निहोत्री (Photo: X/@vivekagnihotri)
पहलगाम हमले पर बोले विवेक अग्निहोत्री (Photo: X/@vivekagnihotri)

अपनी अपकमिंग फिल्म 'ऑपरेशन सिंदूर' की तैयारी करते हुए फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने पहलगाम त्रासदी की पहली बरसी पर पीड़ितों को एक इमोशनल मैसेज के साथ याद किया. उन्होंने कहा कि कोई भी आस्था या विश्वास, खोई हुई जानों को कभी भी सही नहीं ठहरा सकता. डायरेक्टर ने आतंकवाद की मानवीय कीमत पर विचार किया और मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी; साथ ही इस बात पर जोर दिया कि इस त्रासदी को हमेशा याद रखना चाहिए और ऐसी हिंसा को कभी भी सामान्य नहीं मानना ​​चाहिए.

अग्निहोत्री ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर किया. जिसमें लिखा गया, 'एक साल बीत गया है. लेकिन कुछ दिन आगे नहीं बढ़ते. वे वहीं ठहर जाते हैं, जहां वे टूटे थे. मैं उन लोगों के बारे में सोचता रहता हूं जिन्हें हमने पहलगाम में खो दिया.' अपनी जान गंवाने वालों को याद करते हुए, उन्होंने उन कहानियों को दोहराया जो आज भी उन्हें परेशान करती हैं और इस त्रासदी के विनाशकारी प्रभाव को रेखांकित करती हैं.

विवेक अग्निहोत्री ने क्या लिखा?
फिल्ममेकर ने खोई हुई जानों के बारे में लिखा, और एक युवा नौसेना अधिकारी की कहानी याद की, जिसकी शादी को अभी सिर्फ छह दिन ही हुए थे और वह अपने हनीमून पर था. एक ऐसा हनीमून जिसे एक नई जिंदगी की शुरुआत का प्रतीक बनना था. उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का भी जिक्र किया जो अपने दिल में आस्था लेकर आया था, और इस बात से अनजान था कि नफरत किसी की जान लेने से पहले उसकी पहचान नहीं पूछती. साथ ही कानपुर के एक ऐसे युवा का भी जिक्र किया जो कुछ दिनों के लिए घर से निकला था, लेकिन फिर कभी वापस नहीं लौटा. यह दिखाते हुए कि कैसे पल भर में ही सपने टूट गए.

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फ़िल्ममेकर ने ऐसी हिंसा की अप्रत्याशित क्रूरता पर भी विचार किया. 'अलग-अलग घर, अलग-अलग सपने. एक ही हिंसा उन्होंने आगे कहा, और बताया कि कैसे जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोग एक दुखद नियति से जुड़ गए.

आंतकी हमले के बारे में विवेक अग्निहोत्री ने लिखा, '26 जानें गईं, 26 विधवाएं. 26 परिवार तबाह हो गए. यह क्षति कहीं ज्यादा गहरी है. लाखों उम्मीदें टूट गईं, एक राष्ट्र घायल हो गया, और मानवता पर ही सवाल उठ गया.'

उन्होंने आगे लिखा,  'आतंकवाद सिर्फ लोगों को ही नहीं मारता. यह जिंदगी को बीच में ही रोक देता है. यह अपने पीछे अधूरी बातचीत, न जीए गए साल, और ऐसे परिवारों को छोड़ जाता है जिन्हें अब खामोशी के साथ जीना सीखना पड़ता है.'

उन्होंने कहा कि यह दिन सिर्फ याद करने का ही नहीं था, बल्कि एक शांत और अडिग संकल्प का भी था कि कोई भी विचारधारा, कोई भी मकसद या कोई भी आस्था, निर्दोष लोगों की जान लेने को कभी भी सही नहीं ठहरा सकती. 

फिल्ममेकर ने अंत में लिखा, 'हम उनके प्रति यादों के ऋणी हैं. हम उनके प्रति गरिमा के ऋणी हैं. हम उनके प्रति एक ऐसी दुनिया के ऋणी हैं जो इस चीज को सामान्य मानने से इनकार करती है.'

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ऑपरेशन सिंदूर पर बन रही फिल्म
बता दें कि विवेक अग्निहोत्री 'ऑपरेशन सिंदूर' को डायरेक्ट करने की तैयारी कर रहे हैं. यह फिल्म पहलगाम घटना के बाद भारत की रणनीतिक सैन्य कार्रवाई पर हैं. T-Series और I Am Buddha Productions के बैनर तले बन रही ये फिल्म लेफ्टिनेंट जनरल K.J.S. 'Tiny' Dhillon की किताब 'ऑपरेशन सिंदूर: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियाज डीप स्ट्राइक्स इनसाइड पाकिस्तान' पर आधारित है. 

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