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आशा भोसले की सेहत पर पोती जनाई का पोस्ट, बताया अस्पताल में क्यों भर्ती हुईं 'सुरों की मल्लिका'

92 की सिंगर आशा भोसले को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. उन्हें बिगड़ी तबीयत के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. ये खबर आने के बाद सिंगर के फैंस के बीच हलचल मच गई थी. हालांकि उनकी पोती जनाई भोसले ने आशा के अस्पताल जाने की असली वजह बता दी है.

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अस्पताल में भर्ती आशा भोसले (Photo: Instagram/@asha.bhosle)
अस्पताल में भर्ती आशा भोसले (Photo: Instagram/@asha.bhosle)

92 की सिंगर आशा भोसले को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. जानकारी के मुताबिक, अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल यूनिट में आशा का इलाज चल रहा है. इस बीच सिंगर की पोती जनाई भोसले ने दादी की हेल्थ को लेकर अपडेट दे दी है. उन्होंने बताया कि आशा के अस्पताल में भर्ती होने की असली वजह क्या है.

पोती ने दी अपडेट

आशा भोसले की पोती जनाई भोसले (Zanai Bhosle) ने आशा की हेल्थ को लेकर ट्वीट किया है. उन्होंने बताया, 'मेरी दादी, आशा भोसले को थकान और चेस्ट इंफेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. हम आपसे आग्रह करते हैं कि हमारी प्राइवसी का ध्यान रखें. उनका इलाज चल रहा है और उम्मीद है कि सबकुछ ठीक हो जाएगा. हम आपको आगे पॉजिटिव अपडेट देंगे.

इससे पहले ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉक्टर प्रति समदानी ने आशा के अस्पताल में भर्ती होने की खबर की पुष्टि की थी. उन्होंने बताया था कि आशा भोसले को अस्पताल में उनकी केयर में एडमिट करवाया गया है. हालांकि डॉक्टर ने इसके आगे कोई भी जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया था. आशा भोसले का परिवार उनके साथ अस्पताल में है. फैंस उन्हें लेकर परेशान हैं और उनके जल्द ठीक होने की दुआ कर रहे हैं.

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लेजेंड हैं आशा भोसले

आशा भोसले बॉलीवुड के लेजेंडरी सिंगर्स में से एक हैं. उन्होंने अपनी आवाज का जादू बॉलीवुड फिल्मों में 1950 के दशक में चलाया था. उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर 40 और 50 के दशक की बड़ी गायिका थीं. मंगेशकर परिवार से आईं आशा भी अपनी बहन की ही तरह सुरीली आवाज वाली थीं. हालांकि उन्होंने बड़ी फिल्मों में अपनी आवाज देने से पहले कई लो बजट फिल्मों में गाना गाकर पहचान पाई. 1952 में आई फिल्म 'संगदिल' में उन्होंने गाने गाए थे. म्यूजिक कम्पोजर सज्जाद हुसैन की इस एल्बम ने आशा को फेम दिलाया.

उस जमाने के जाने माने डायरेक्टर बिमल रॉय ने 1953 में आई फिल्म परिणीता में आशा भोसले को साइन किया था. इसके बाद राज कपूर ने उनकी अपनी 1954 की फिल्म 'बूट पोलिश' में काम दिया. लेजेंडरी म्यूजिक कम्पोजर ओ पी नय्यर के साथ आशा ने 1952 से लेकर 1956 तक कई गानों पर काम किया था. मगर 1957 में आई बी आर चोपड़ा की फिल्म 'नया दौर' के साथ आशा भोसले ने सफलता का असली स्वाद चखा. इस फिल्म के गाने भी नय्यर ने ही कम्पोज किए थे.

मोहम्मद रफी के साथ आशा भोसले की जोड़ी उस जमाने में सुपरहिट थी. दोनों ने मिलकर 'मांग के साथ तुम्हारा', 'साथी हाथ बढ़ाना' और 'उड़ें जब जब जुल्फें तेरी' को गाया था. साहिर लुधियानवी के बोल और रफी संग आशा की आवाज का जादू सभी के सिर चढ़कर बोलता था. उन्होंने 60 के दशक की फिल्म 'गुमराह', 'हमराज', 'आदमी और इंसान' संग कई और में अपनी आवाज दी. 1966 में उन्होंने आर डी बर्मन के साथ फिल्म 'तीसरी मंजिल' के लिए गाने गाए थे, जिन्हें खूब सराहा गया.

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इसके बाद वो दौर आया जब आशा भोसले ने बॉलीवुड के हिट डांस नंबर गाने शुरू किए. कहा जाता है कि जब उन्होंने पहली बार 'आजा आजा' गाने को सुना था तो उन्हें लगा था कि वो वेस्टर्न म्यूजिक ट्यून पर नहीं गा पाएंगी. बर्मन ने इसे बदलने का ऑफर दिया, मगर आशा ने मना कर दिया. बाद में उन्होंने इसे एक चैलेंज की तरह लिया और 10 दिन रिहर्सल करने के बाद इसे रिकॉर्ड किया था. आज भी ये गाना लोगों की जुबान पर है. 'आजा आजा' के बाद आशा ने 'ओ हसीना जुल्फों वाली', 'ओ मेरे सनम रे', 'पिया तू अब तो आजा' और 'ये मेरा दिल' जैसे बढ़िया गाने गाए, जो हर पार्टी की जान बन गए थे.

उन्होंने अपने करियर को यहीं तक सीमित नहीं रखा. आशा भोसले ने गजलें भी गाईं. इसी से उन्हें अपने करियर का पहला नेशनल अवॉर्ड भी मिला. इसके बाद उन्होंने 90 और 2000 के दशक की फिल्मों 'रंगीला', 'लगाना', 'प्यार तूने क्या किया' और 'लकी' संग अन्य के लिए गाने गाए. आशा भोसले ने 91 साल की उम्र में दुबई में कॉन्सर्ट किया था. यहां उन्होंने पंजाबी सिंगर करण औजला का हिट गाना 'तौबा तौबा' गाकर जेन जी का भी दिल जीत लिया था.

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