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हिट हुआ था अमाल मलिक का गाना, कमाए 100 करोड़, फिर भी सिंगर के हाथ रह गए खाली

अमाल मलिक ने बताया कि 2020 से रॉयल्टी सिस्टम लागू तो हो गया है, लेकिन गाने के मास्टर राइट्स अब भी ज्यादातर लेबल के पास ही रहते हैं. अपनी पर्सनल कमाई का ब्योरा देते हुए अमाल ने बताया कि प्रोडक्शन खर्च और टीम को पेमेंट करने के बाद उनके हाथ में बहुत कम पैसा बचता है.

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अमाल मलिक ने गानों से कमाई पर की बात (Photot: Instagram @jiohotstar)
अमाल मलिक ने गानों से कमाई पर की बात (Photot: Instagram @jiohotstar)

अमाल मलिक ने भारत में म्यूजिक रॉयल्टी सिस्टम की कड़वी सच्चाई पर खुलकर बात की है. उन्होंने बताया कि क्रिएटर्स को अक्सर अपनी मेहनत के मुकाबले म्यूजिक की कमाई का सिर्फ एक छोटा-सा हिस्सा ही मिल पाता है. अपने हिट गाने 'सूरज डूबा है' का उदाहरण देते हुए अमाल ने गाने के रेवेन्यू और कमाई के बीच के भेद का खुलासा किया.

रॉयल्टी सिस्टम क्या है?

जूम से बात करते हुए अमाल मलिक ने बताया कि 2020 से रॉयल्टी सिस्टम लागू तो हो गया है, लेकिन गाने के मास्टर राइट्स अब भी ज्यादातर लेबल के पास ही रहते हैं. उन्होंने कहा, '2020 से रॉयल्टी सिस्टम लागू हो गया है. जावेद अख्तर साहब ने इसके लिए बहुत संघर्ष किया था. एक्टर्स को लगता है कि अगर वे गाने में खड़े हो गए तो गाना हिट हो जाएगा. ये सिर्फ 50% सच है. बाकी 50% क्रेडिट गीतकार, म्यूजिक कंपोजर, डायरेक्टर और आखिर में सिंगर को जाता है. सिंगर जरूर महत्वपूर्ण है, लेकिन वे गाने के क्रिएटर नहीं होते. साउंड के ये चार स्तंभ गाने पर अधिकार रखते हैं. म्यूजिक प्रोड्यूसर्स को अपने गानों पर अधिकार नहीं है, जबकि वेस्ट में इस कैटेगरी को भी गाने के अधिकार मिलते हैं.'

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8 लाख में बने गाने ने कमाए 100 करोड़

अमाल ने 2015 में रिलीज हुई रणबीर कपूर स्टारर फिल्म 'रॉय' के गाने 'सूरज डूबा है' का उदाहरण देते हुए मुद्दे को और साफ किया. उन्होंने कहा, 'भारतीय सिस्टम में हम वेस्ट से काफी पीछे हैं. टेलर स्विफ्ट को मास्टर रॉयल्टी मिलने की वजह से वे अपना एल्बम वापस खरीद सकीं और उसे अपनी मर्जी से रिलीज कर सकीं. जैसे सूरज डूबा है गाने के लिए मुझे सिर्फ 8 लाख रुपये मिले थे और उसमें मैंने सब कुछ लगा दिया था. घर चलाना था, गाना बनाना था. इस गाने को बनाने में ज्यादा से ज्यादा 10 लाख रुपये लगे होंगे. गाना 8-10 लाख रुपये में बनाया गया था.'

अमाल के अनुसार, पिछले कई सालों में इस गाने ने बहुत बड़ी कमाई की है. उन्होंने बताया, 'मेरी समझ के अनुसार पिछले 12 सालों में इस गाने ने औसतन 65 करोड़ रुपये कमाए हैं. मैंने ये आंकड़ा 7 साल पहले चेक किया था. अब तो ये 100 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया होगा, यानी 10 लाख रुपये में बना गाना 100 करोड़ रुपये कमा चुका है, और हमें कुल मिलाकर शायद 15-20 लाख रुपये ही दिए गए होंगे. इसमें इंजीनियर, लोकेशन, खाना, सब कुछ शामिल है. लेकिन रॉयल्टी शामिल नहीं है.'

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अमाल के हाथ फिर भी खाली

अपनी व्यक्तिगत कमाई का ब्योरा देते हुए अमाल ने बताया कि प्रोडक्शन खर्च और टीम को पेमेंट करने के बाद उनके हाथ में बहुत कम पैसा बचता है. उन्होंने कहा, 'उस राशि में मैंने अपनी टीम को पेमेंट किया. सब कुछ चुकाने के बाद एक गाने के मुझे 75,000 से 1.5 लाख रुपये तक की सैलरी मिलती है. इसलिए मेरी मां कहती थीं, 'तुम शोज भी नहीं करते, फिल्में छोड़ रहे हो, फिर घर कैसे चलेगा?' लेकिन भगवान मेहरबान है. 130 गाने करने के बाद भी मेरी मां को ये चिंता क्यों करनी पड़े कि खाना कहां से आएगा?'

अमाल ने रेवेन्यू के बंटवारे में असंतुलन पर जोर देते हुए कहा कि गाने की ज्यादातर कमाई लेबल के पास चली जाती है. उन्होंने कहा, 'भारत में सिंगर्स को पब्लिशिंग राइट्स तो मिलते हैं, जैसे सूरज डूबा है के लिए मुझे सालाना 20 लाख रुपये मिलते हैं, लेकिन वो गाना 100 करोड़ रुपये कमा चुका है. तो असमानता साफ दिख रही है. गाने का 95% हिस्सा लेबल को जाता है. अब वो गाना मेरा नहीं रहा. लेबल उसका कुछ भी कर सकता है. चाहे तो रीमिक्स कर सकता है. मैं कुछ नहीं कर सकता, बस यही दुआ कर सकता हूं कि वे मुझे क्रेडिट दें. अगर ग्लोबल रॉयल्टी शेयर देखें तो उसमें से भी 95% लेबल को जाता है और बाकी 5% को बाकी टीम में बांट लिया जाता है.'

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यह गाना टी-सीरीज के तहत रिलीज हुआ था. इस खास गाने की कमाई को लेकर लेबल की तरफ से अभी तक कोई कमेंट नहीं किया गया है.

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