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यादव परिवार के बिखराव के पीछे है ये महिला, मुलायम की है बेहद करीबी

मुलायम सिंह और साधना का एक बेटा है. बेटे का नाम प्रतीक है, जिसका जन्म 1988 में हुआ. प्रतीक कहते हैं कि उनकी राजनीति में कोई दिलचस्पी कई आरोप लगाते हैं कि साधना मुलायम को अखिलेश के खिलाफ खड़ा करने में लगे हुई हैं.

साधना गुप्ता साधना गुप्ता

समाजवादी पार्टी और यादव परिवार में हलचल मची हुई है. परिवार दो गुटों में बंट गया है. एक गुट अखिलेश के पक्ष में है तो दूसरा शिवपाल के. इस बीच धर्मसंकट में फंसे हैं पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव. मुलायम सिंह यहां रामायण के दशरथ की तरह धर्मसंकट में फंसे हुए हैं. दशरथ की तरह मुलायम यहां अपने आप को दूसरी पत्नी साधना और अखिलेश के बीच में फंसा हुआ पा रहे हैं.

अंदरूनी सूत्रों की मानें तो यादव परिवार के ड्रामे के पीछे साधना की भूमिका मानी जा रही है. यानी कि साधना यहां रामायण की कैकेयी के किरदार में हैं. 2003 से पहले कम ही लोग साधना को जानते होंगे, जब मुलायम सिंह की पहली पत्नी और अखिलेश की मां मालती यादव का देहांत हुआ. इसी साल साधना को मुलायम की पत्नी का दर्जा मिला. हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि दोनों ने कब शादी की.

मुलायम सिंह और साधना का एक बेटा है. बेटे का नाम प्रतीक है, जिसका जन्म 1988 में हुआ. प्रतीक कहते हैं कि उनकी राजनीति में कोई दिलचस्पी कई आरोप लगाते हैं कि साधना मुलायम को अखिलेश के खिलाफ खड़ा करने में लगे हुई हैं.

2012 में ही रची साजिश
दरअसल कहानी की शुरुआत 2012 में होती हैं, जब सपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आती है. साधना और शिवपाल चाहते थे कि अखिलेश मुख्यमंत्री ना बनें, मुलायम सिंह ही नेतृत्व करें. लेकिन मुलायम सिंह ने सत्ता अखिलेश को सौंपी. हाल ही पार्टी से बर्खास्त हुए उदयवीर सिंह ने आरोप लगाया था कि 2012 में साधना ने सपा नेताओं को लामबंद करने की कोशिश की, जिससे अखिलेश को दूर रखा जा सके. साधना अभी भी वही करना चाह रहे हैं. वह नहीं चाहतीं कि 2017 में भी अखिलेश ही पार्टी का चेहरा हों.

अमर सिंह की हैं करीबी
अखिलेश मानते हैं कि अमर सिंह साधना के करीब हैं और वही उन्हें राजनीतिक हठकंडे समझाते हैं. अखिलेश अमर सिंह को पार्टी में नहीं चाहते हैं. माना जाता है की साधना की वजह से ही अमर सिंह की पार्टी में वापसी हुई.

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