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अखिलेश-मायावती ने नहीं की होती 'ये गलती' तो BJP की होती करारी हार

बीजेपी के 'अपार बहुमत' का विश्लेषण करें तो एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आता है.

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अखिलेश यादव और मायावती.
अखिलेश यादव और मायावती.

उत्तर प्रदेश चुनाव के ठीक बाद एक इंटरव्यू में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संकेत दिए थे कि पूर्ण बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में वे मायावती के साथ भी हाथ मिला सकते हैं. लेकिन चुनाव परिणाम उनकी उम्मीदों से बहुत अलग आ चुका है और वे अब यूपी की सत्ता छोड़ने की तैयारी कर रहे होंगे.

लेकिन बीजेपी के 'अपार बहुमत' का विश्लेषण करें तो एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आता है. अगर कांग्रेस, सपा और बसपा को कुल मिले वोटों को जोड़ दें तो यह बीजेपी को मिले वोट से बहुत अधिक है. यानी कांग्रेस-सपा अगर बसपा भी होती तो मुमकिन है कि रिजल्ट आज से बिल्कुल अधिक होता.

सपा-बसपा-कांग्रेस को 50 फीसदी वोट
शाम 4 बजे तक चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, चुनाव में सिर्फ 39.6 फीसदी वोट मिले हैं. जबकि बीएसपी को बेहद कम सीटें मिलने के बावजूद 22 फीसदी वोट मिले हैं. जबकि सपा को 21.9 फीसदी और कांग्रेस को 6.3 फीसदी लोगों ने वोट दिया है. हालांकि वोट बंट जाने की वजह से अधिकांश सीटों पर जीत बीजेपी की हुई है.

ऐसे में अगर बीएसपी, सपा और कांग्रेस गठबंधन के साथ होती तो कुल 50 फीसदी वोट एक जगह हो सकते थे.

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बिहार में हुई थी बीजेपी की करारी हार
बिहार में एक-दूसरे के बेहद विरोधी रहे लालू यादव और नीतीश कुमार चुनाव के वक्त साथ हो गए थे. 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी-जेडीयू ने कांग्रेस के एक साथ महागठबंधन तैयार किया था.

इस वजह से बीजेपी को 24 फीसदी वोट तो मिले थे, लेकिन सीटें नहीं मिल पाईं थी. आरजेडी का 18 फीसदी, जेडीयू का 16 फीसदी और कांग्रेस का 6 फीसदी वोट एक साथ होने की वजह से 178 सीटें मिल गई थीं. एनडीए के पास 58 सीटें आईं थीं.

ऐसे में यूपी चुनाव का ऐतिहासिक रिजल्ट मायावती और अखिलेश को साथ न आने की 'गलती' का एहसास करा सकता है.

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