यूपी की राजधानी लखनऊ से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर पड़ता है सीतापुर. लखनऊ से दिल्ली की ओर 89 किलोमीटर चलने पर पड़ने वाले सीतापुर जिले की राजनीति में अलग पहचान है. पौराणिक इतिहास भी सीतापुर को अलग मुकाम देता है. देवासुर संग्राम के समय देवताओं की मदद के लिए वज्र बनाने को अपनी अस्थियां देने वाले महर्षि दधीचि की तपोस्थली मिश्रिख हो या वेद व्यास के पुराणों की धरती के रूप में विख्यात नैमिषारण्य. इसे ब्रह्मा के चक्र की नेमि का भार सहन करने के कारण चक्रतीर्थ नाम मिला. ये सभी इसी जिले का हिस्सा हैं.
सीतापुर जिले में ही मुस्लिम धर्म गुरु बाबा गुलजार शाह की धरती बिसवां, खैराबाद का बड़े मखदूम साहब का दरगाह भी हैं जो अर्से से लोगों की आस्था का केंद्र बने हुए हैं. सीतापुर की अगर और खास बातों का जिक्र करें तो इसकी पहचान सीतापुर आंख अस्पताल के रूप में पूरे विश्व में है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 32 जिलों में सीतापुर आंख अस्पताल की शाखाएं चल रही हैं जो इस जिले की ख्याति को और विस्तार दे रही हैं. सीतापुर जिले में कुल सात तहसील, 19 ब्लॉक, 29 थाने और 2406 ग्राम पंचायतें भी हैं. कुल 5743 वर्ग किलोमीटर एरिया में फैले सीतापुर जिले की आबादी लगभग 52 लाख है.
सामाजिक और आर्थिक ताना-बाना
सीतापुर को ब्रिटिश काल में सन 1856 में खैराबाद अवध को छोड़कर जिले का केंद्र बनाया गया था. सामाजिक दृष्टि से देखें तो सीतापुर जिला हमेशा सामाजिक समरसता की एक मिसाल रहा है. देश और प्रदेश में तमाम मौके आए जब जाति और धर्म के मसलों पर विवाद हुए लेकिन इस जिले में कभी कोई विवाद नहीं हुआ. सुदामा चरित के रचयिता कवि नरोत्तम दास जिले के सिधौली तहसील में बाड़ी गांव के निवासी थे. नबीनगर के अनूप शर्मा, बलदेव नगर के द्विजबलदेव, गंधौली के मिश्र बन्धु भी अपनी अलग पहचान रखते हैं.
सीतापुर का स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में भी अलग महत्व है. गांधीजी की अगुवाई में हुए असहयोग आंदोलन और 1942 की अगस्त क्रांति के दौरान लालबाग पार्क में छह क्रांतिकारी शहीद हो गए थे. 1999 में करगिल की जंग के दौरान शहीद परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पांडेय का भी सीतापुर से नाता रहा. सीतापुर आर्थिक रूप से पिछड़ा है. कभी मूंगफली की खेती के लिए मशहूर सीतापुर जिले में अब चीनी मिल की वजह से गन्ने की खेती अधिक हो रही है. महमूदाबाद के कुछ इलाकों में मेंथा की खेती जरूर कुछ किसान करते हैं लेकिन इसके अलावा उद्योग की दृष्टि से कुछ भी इस जिले में नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि सीतापुर आर्थिक रूप से समृद्ध है.
राजनीतिक समीकरण
सीतापुर जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं. सीतापुर जिला चार संसदीय क्षेत्रों को भी अपना प्रतिनिधित्व देता है. सीतापुर सदर लोकसभा सीट में सीतापुर , लहरपुर, बिसवां, सेउता और महमूदाबाद विधानसभा सीटें आती हैं. पड़ोसी जनपद लखीमपुर की धौरहरा लोकसभा क्षेत्र में हरगांव और महोली विधानसभा, लखनऊ की मोहनलाल गंज लोकसभा सीट में सिधौली और हरदोई की चार विधानसभा सीट मिलाकर बनने वाली मिश्रिख लोकसभा सीट यानी सीतापुर को संसद में चार सीटों का प्रतिनिधित्व मिलता है. विधानसभा सीटों की बात करें तो जिले की नौ में से तीन मिश्रिख, सिधौली और हरगांव विधानसभा सीटें दलित वर्ग के लिए आरक्षित हैं.
सीतापुर जिले के जातिगत और राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो मुस्लिम, कुर्मी, दलित और ब्राह्मण वर्ग के मतदाताओं की हर चुनाव में निर्णायक भूमिका रही है. सीतापुर जिले में कभी कांग्रेस पार्टी का वर्चस्व रहा. 2007 के चुनाव में जिले की नौ में से पांच सीटों पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार जीते थे. बीते 25 साल से जिले की राजनीति कभी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) तो कभी समाजवादी पार्टी (सपा) के पक्ष में झुकी नजर आती है. 2019 में चारो संसदीय सीटों पर और नौ में से सात विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा है.
2017 का जनादेश
सीतापुर जिले की सभी नौ में से सात विधानसभा सीट पर 2017 में बीजेपी को जीत मिली. एक सीट पर सपा और एक पर बसपा के उम्मीदवार जीते. विधानसभा चुनाव से कुछ ही समय पहले सीतापुर सदर विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक राकेश राठौर, सिधौली सीट से बसपा के विधायक डॉक्टर हरगोविंद भार्गव सपा में शामिल हो जाने से समीकरण थोड़े बदलते दिख रहे हैं.
सीतापुर सदर विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर राकेश राठौर जीते थे. राकेश ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के राधेश्याम जायसवाल को मात दी थी. महोली विधानसभा सीट से बीजेपी के शशांक त्रिवेदी ने सपा के अनूप गुप्ता, हरगांव विधानसभा सीट से बीजेपी के सुरेश राही ने बसपा के रामहेत भारती, लहरपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के सुनील वर्मा ने बसपा के जासमीर अंसारी को मात दी थी.
सीतापुर जिले के बिसवां विधानसभा सीट से बीजेपी के महेंद्र यादव ने सपा के अफजाल कौसर, सेउता विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के ज्ञान तिवारी ने बसपा के नसीम इंजीनियर को हराया था. महमूदाबाद विधानसभा क्षेत्र से सपा के नरेंद्र वर्मा और सिधौली से बसपा के टिकट पर डॉक्टर हरगोविंद भार्गव जीते थे. मिश्रिख विधानसभा सीट से बीजेपी के राम कृष्ण ने बसपा के मनीष रावत को हराकर विजयश्री पाई थी.
जिले की बड़ी राजनीतिक हस्तियां
सीतापुर जिले की बड़ी राजनीतिक हस्तियों की बात करें तो केंद्र में मंत्री रहीं कांग्रेस की डॉक्टर राजेंद्र कुमारी वाजपेयी, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामलाल राही, प्रदेश के कार्यवाहक मुख्यमंत्री रहे डॉक्टर अम्मार रिजवी, राम रतन सिंह के नाम प्रमुखता से लिए जाते हैं. सीतापुर सदर सीट से छह बार विधायक रहे राजेंद्र कुमार गुप्ता बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं.