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प्रियंका गांधी की सक्रियता के सवालों पर गुस्से में क्यों नजर आते हैं अखिलेश यादव?

लखीमपुर खीरी के पीड़ितों से मिलने के जिद पर अड़ीं प्रियंका गांधी के तेवर से योगी सरकार भले ही कम परेशान दिख रही हो, लेकिन यह बीजेपी से ज्यादा सपा की चिंता बढ़ाने वाली स्थिति जरुर मानी जा रही है. 2022 के चुनाव फाइट से बाहर नजर आ रही है. कांग्रेस को प्रियंका गांधी ने अपने तेवरों और संघर्ष के जरिए एक फिर फ्रंटफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लखीमपुर से लेकर सोनभद्र तक प्रियंका गांधी
  • प्रियंका की सक्रियता से क्या बंटेगा विपक्षी वोट?
  • प्रियंका गांधी के तेवर से कांग्रेस में नई ऊर्जा

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लखीमपुर खीरी कांड को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर भड़के हुए हैं. 'आजतक' से खास बातचीत में उन्होंने यूपी सरकार के साथ-साथ बीजेपी और केंद्र की मोदी सरकार को भी निशाने पर लिया. हालांकि ज्यादा महत्वपूर्ण बात ये है कि अखिलेश, योगी के साथ-साथ कांग्रेस और यूपी में खासतौर पर सक्रिय पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी से भी काफी नाराज नजर आए. अखिलेश को लखीमपुर कांड पर कांग्रेस, खासकर प्रियंका और राहुल की सक्रियता पसंद नहीं आई. राजनीतिक जानकार इसकी वजह कुछ महीने बाद होने वाले चुनाव और उसमें विपक्षी वोटों के बंटवारे की आशंका को मानते हैं.

क्यों प्रियंका पर भड़के नजर आ रहें अखिलेश?

अखिलेश से जब योगी सरकार द्वारा प्रियंका गांधी की गिरफ्तारी और कस्टडी में उनके झाड़ू लगाने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वो इसपर कुछ नहीं कहना चाहते क्योंकि उनको भी सरकार ने ऐसे ही हाल में रखा था. उनसे जब प्रियंका के इस आरोप पर सवाल किया गया कि सपा, योगी सरकार के खिलाफ मुखर नहीं है तो वो फूट पड़े. उन्होंने यहां तक कहा कि प्रियंका को किसी दूसरे राजनीतिक दल पर बिना जाने कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि प्रियंका तो यूपी सरकार की कस्टडी में कमरे में बंद थीं तो उनको सपा का सड़कों पर संघर्ष कैसे दिखेगा.  

अखिलेश के इस गुस्से की वजह भी है. दरअसल हाल फिलहाल में यूपी में ऐसे कई मामले आए हैं जिनमें दिल्ली से आकर प्रियंका और राहुल योगी सरकार के खिलाफ विपक्ष की आवाज बनते दिखे हैं, लेकिन सपा के विरोध-प्रदर्शन को उतनी तवज्जो न तो सरकार ने दी और न मीडिया में ही वो स्पेस मिला. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सपा को अनदेखा कर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों पर एक्टिव दिखना योगी सरकार की सोची-समझी रणनीति है.

यूपी की लड़ाई त्रिकोणीय बनती दिख रही

यूपी में योगी बनाम अखिलेश के बजाय 2022 का मुकाबला त्रिकोणीय हो तो फायदा बीजेपी को ही मिलेगा क्योंकि विपक्षी वोट बंटेंगे. बसपा का कोर वोट तो पहले से ही मायावती को समर्पित रहने की उम्मीद है. ऐसे में माना यही जा रहा है कि प्रियंका की सक्रियता और कांग्रेस की मजबूती बीजेपी और योगी की राह आसान ही करेगी. 

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार सैय्यद कासिम कहते हैं कि कांग्रेस प्रदेश में जमीनी स्तर पर अभी इतनी मजबूत नहीं है कि अपने दम पर सत्ता हासिल कर सके. बीजेपी और सीएम योगी आदित्यनाथ भी ये समझते हैं. बसपा प्रमुख मायावती साइलेंट मोड पर हैं. सूबे में 2022 की लड़ाई योगी बनाम अखिलेश बनती दिख रही है. कांग्रेस चुनावी लड़ाई से बाहर मानी जा रही है और तमाम नेता पार्टी छोड़कर सपा का दामन थाम रहे हैं. ऐसे में लखीमपुर खीरी की घटना पर प्रियंका गांधी के तेवर और योगी सरकार का उसे लेकर रवैया काफी कुछ कहता है.  

कासिम के मुताबिक सूबे में कांग्रेस उतनी आक्रामक नहीं है, जितना उसे सीएम योगी ने बना दिया है. इसके पीछे सीएम योगी की रणनीति ये हो सकती है कि बीजेपी और योगी विरोधी वोट विपक्ष में किसी एक दल के साथ न जुड़ें बल्कि उनमें बंटवारा हो जाए. लखीमपुर खीरी मामले पर योगी सरकार अखिलेश यादव और दूसरे विपक्षी नेताओं को तुरंत छोड़ देती है, लेकिन प्रियंका की गिरफ्तारी देखें तो साफ तौर पर पता चलता है कि कैसे बीजेपी सरकार कांग्रेस को आक्रामक होने के लिए मुद्दा थाली में सजा कर दे रही है. योगी सरकार के इस कदम का सियासी संदेश साफ है कि विपक्ष के तौर पर यूपी में कांग्रेस भी अहम भूमिका में है. . 

कांग्रेस जनता की आवाज बनकर सामने आई है

वहीं, कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रदेश अध्यक्ष शाहनवाज आलम इससे इत्तेफाक नहीं रखते. वे आजतक डॉट इन से कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विपक्षी पार्टी होने के नाते जनता की आवाज बनने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस कार्यकर्ता आवाम के मुद्दों को लेकर सड़कों पर संघर्ष करने से लेकर लाठी खा रहे हैं और जेल जा रहे हैं. प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने के बाद से ही कांग्रेस सूबे में किसी की पिछलग्गू बनकर नहीं चल रही. वो हर मुद्दे पर अपना अलग संघर्ष कर रही है. इसी का नतीजा है कि योगी सरकार को झुकना पड़ा और राजनीतिक दलों को लखीमपुर के पीड़ितों से मिलने की इजाजत देनी पड़ी. 

आलम कहते हैं कि इससे पहले सोनभद्र हत्याकांड, हाथरस कांड, सीएए-एनआरसी आंदोलन में मारे गए मुस्लिमों के मामले में प्रियंका गांधी ही पीड़ितों के साथ खड़ी नजर आईं. दूसरी ओर सीबीआई और ईडी के डर से सपा-बसपा खामोश रहते हैं या फिर खुद को नजरंबद करा लेते हैं. 

यूपी में बीजेपी का विकल्प सिर्फ सपा है!

समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री अताउर्रहमान कहते हैं कि लखीमपुर खीरी घटना को लेकर सपा योगी सरकार के खिलाफ गांव-गांव तक जाएगी. योगी सरकार किसानों की आवाज कुचल रही है और जानबूझ कर कांग्रेस को अहमियत दे रही है. कांग्रेस और बीजेपी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों की मिलीभगत है. सूबे की जनता इस बात को समझती है कि योगी आदित्यनाथ का विकल्प सपा प्रमुख अखिलेश यादव हैं. ऐसे में विपक्ष के वोटों में कन्फ्यूजन पैदा करने के लिए योगी सरकार सोची समझी रणनीति के तहत कांग्रेस को बढ़ाने का काम कर रही है. लेकिन, जनता इसमें नहीं फंसने वाली है. 

प्रियंका ने कांग्रेस में नई जान फूंकी है

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस कहते हैं कि विपक्षी दल होने के नाते सपा-बसपा और कांग्रेस का काम है कि लोगों के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ उतरकर आंदोलन करें. बसपा की राजनीति कभी सड़क पर उतरकर आंदोलन वाली नहीं रही और सपा पहले की तरह आक्रमक नहीं रही. वहीं, प्रियंका गांधी ने जब से यूपी कांग्रेस की कमान संभाली है, वो लगातार योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. लखीमपुर खीरी मामले में प्रियंका गांधी ने सुबह तक का इंतजार भी नहीं किया और रात में ही रवाना हो गई. योगी सरकार भी यह बात समझ रही है कि अगर उन्हें छोड़ा गया तो वो पीड़ितों से बिना मिले नहीं लौटेंगी. इसीलिए बीजेपी प्रियंका गांधी को लेकर दूसरी विपक्षी पार्टियों की तुलना में ज्यादा चिंतित रहती है. 

सिद्धार्थ कलहंस भी कहते हैं कि बीजेपी को यह दांव महंगा भी पड़ सकता है, क्योंकि शहरी क्षेत्रों में सपा-बसपा का आधार नहीं है बल्कि बीजेपी और कांग्रेस का है. प्रियंका गांधी की सक्रियता से शहरी वोटों का झुकाव कांग्रेस की तरफ बढ़ सकता है. कांग्रेस के मजबूत होने का बीजेपी को फायदा मिलेगा यह कहना उचित नहीं है. 

वरिष्ठ पत्रकार अमिता वर्मा कहती हैं कि प्रियंका गांधी की कोशिशों से कांग्रेस को सूबे में चर्चा तो खूब मिल रही है, लेकिन फिलहाल कोई सियासी फायदा होगा यह कहना मुश्किल है. प्रियंका ने लखीमपुर खीरी मामले को लेकर जिस तरह से सूबे में हलचल बढ़ा रखी है, वो सपा के लिए चिंता बढ़ाने वाली है. कांग्रेस की नजर सपा के ही वोट बैंक पर है. ऐसे में कांग्रेस के मजबूत होना बीजेपी के लिए फायदेमंद तो सपा के लिए परेशानी खड़ी करने वाला साबित हो सकता है.

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