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बुलंदशहर में अखिलेश-जयंत का रोड शो, अनूपशहर में NCP ने भी उतारी अपनी कोर टीम

बुलंदशहर में गुरुवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने रोड शो किया. अखिलेश यादव और जयंत चौधरी ने अनूपशहर सीट पर भी प्रचार किया.

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बुलंदशहर में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी का रोड शो
बुलंदशहर में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी का रोड शो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • NCP के कोटे में गई है अनूपशहर सीट
  • केके शर्मा को NCP ने बनाया है प्रत्याशी

उत्तर प्रदेश में प्रथम चरण का मतदान 10 फरवरी को होना है. उससे पहले सभी सियासी पार्टियां अपनी जमीन को मजबूत करने के लिए मैदान में उतर चुकी हैं. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने गुरुवार को बुलंदशहर में समाजवादी विजय रथ के जरिए रोड शो किया.

अखिलेश यादव और जयंत चौधरी ने अनूपशहर सीट पर भी प्रचार किया. यह सीट कभी भी सपा नहीं जीत पाई है. इस बार इस सीट को सपा ने शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को दी है. एनसीपी ने यहां से केके शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया है. रोड शो के दौरान अखिलेश ने केके शर्मा की जीत का दावा किया. 

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस यूपी में अपना खाता खोलने जा रही है. इस रोड के दौरान एनसीपी की कोर टीम भी सड़क पर नजर आई. यूपी जैसे राजनैतिक तौर पर महत्वपूर्ण राज्य में अपनी पार्टी को जीत दिलाने का मौका एनसीपी चूकना नहीं चाहती है, यही वजह है कि एनसीपी के बड़े नेता यहां डेरा डाले हुए हैं.

इस सीट को जीताने की ज़िम्मेदारी एनसीपी ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता और राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज शर्मा को दी है. उन्हें चुनाव प्रभारी बनाया गया है. उनके साथ ही दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष योगानंद शास्त्री भी जमे हुए हैं. पिछले दिनों महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक भी यहां आए थे और केके शर्मा के पक्ष में जनसंपर्क किया था.

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एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता धीरज शर्मा ने गुरुवार को कहा कि हम सपा रालोद के स्थानीय स्तर पर मजबूत संगठन और एनसीपी के कार्यकर्ताओं की मेहनत से यूपी विधानसभा में प्रवेश करने जा रहे हैं. गौरतलब है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में एनसीपी का कोई विधायक सदन नहीं पहुंचा था, जबकि 2012 में एक सीट पर जीत मिली थी.

 

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