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धर्मेंद्र प्रधान को यूपी चुनाव की कमान, नई टीम से बीजेपी ने साधे इतने सारे समीकरण

ओबीसी समुदाय से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान को यूपी चुनाव की कमान सौंपी गई है तो उनके साथ केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, अर्जुन राम मेघवाल, सरोज पांडेय, शोभा करंदलाजे, कैप्टन अभिमन्यु, अन्नपूर्णा देवी और विवेक ठाकुर को भी लगाया है. बीजेपी ने यूपी चुनाव की टीम गठन में सूबे के जातीय समीकरण का पूरा ख्याल रखा है. 

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सीएम योगी आदित्यनाथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सीएम योगी आदित्यनाथ
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ओबीसी समुदाय से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान बने प्रभारी
  • बीजेपी ने चुनाव की 8 सदस्यीय कमेटी बनाई
  • सरोज पांडेय पर होगा ब्राह्मणों को जोड़ने का जिम्मा

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की कमान संभालने के लिए बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अगुवाई में आठ सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है. धर्मेंद्र प्रधान को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए प्रभारी नियुक्त किया गया है और उनके साथ सात सहप्रभारी बनाए गए हैं. बीजेपी ने चुनावी टीम के जरिए जातीय और सियासी समीकरण साधने की कवायद की है. 

ओबीसी समुदाय से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान को यूपी चुनाव की कमान सौंपी गई है तो उनके साथ केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, अर्जुन राम मेघवाल, सरोज पांडेय, शोभा करंदलाजे, कैप्टन अभिमन्यु, अन्नपूर्णा देवी और विवेक ठाकुर को भी लगाया है. बीजेपी ने यूपी चुनाव की टीम गठन में सूबे के जातीय समीकरण का पूरा ख्याल रखा है. 

ओबीसी पर नजर

यूपी में सबसे बड़ी आबादी ओबीसी समुदाय की है, जो सूबे की सियासत में अहम भूमिका अदा करते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव से ही बीजेपी के पाले में आ खड़े हुए यूपी में सर्वाधिक आबादी वाले पिछड़ा और अन्य पिछड़ा वर्ग को साधे रखने के लिए जेपी नड्डा ने ओबीसी समुदाय से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान को यूपी चुनाव प्रभारी बनाया है. धर्मेंद्र प्रधान ने छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड राज्य में प्रभारी रहते हुए ओबीसी के बड़े तबके को पार्टी से जोड़ने का काम किया था. 

बीजेपी का यह कार्ड यूपी में पिछड़ों को अपने पाले में खींचने का प्रयास कर रही समाजवादी पार्टी के दांव को बेअसर करने वाला माना जा रहा है. 15 साल के बाद 2017 में यूपी की सत्ता में बीजेपी वापसी में ओबीसी की अहम भूमिका रही है और अब 2022 में ओबीसी को पार्टी के साथ सहेजकर रखने का जिम्मा धर्मेंद्र प्रधान के कंधों पर होगा. धर्मेंद्र प्रधान 2017 में उत्तराखंड में जेपी नड्डा के साथ चुनाव की कमान संभाल चुके हैं. बीजेपी की सत्ता में वापसी के पीछे उनकी रणनीति को अहम माना गया था. प्रधान छत्तीसगढ़ और झारखंड में बीजेपी को चुनाव में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं. अब उनकी परीक्षा यूपी के 2022 चुनाव में होनी है. 

प्रभारियों की नियुक्तियों में जातीय समीकरण का ध्यान

यूपी में ब्राह्मण की नाराजगी को दूर करने का जिम्मा अब सरोज पांडेय के कंधों पर होगा. सरोज पांडेय बीजेपी की तेज तर्रार नेता मानी जाती हैं और छत्तीसगढ़ से आती हैं. काफी लंबे समय से बीजेपी में संगठन का काम संभाल रही हैं. यूपी में ब्राह्मणों को साधने के लिए सपा से लेकर बसपा तक जुटी हैं और बीजेपी को ब्राह्मण विरोधी बता रही हैं. ऐसे में बीजेपी ने सरोज पांडेय के जरिए ब्राह्मण समुदाय को एक बड़ा संदेश देने की कवायद की है. हालांकि, मोदी सरकार ने पिछले दिनों अपनी कैबिनेट में भी ब्राह्मण चेहरे के तौर पर यूपी से अजय मिश्रा को मंत्री बनाकर शामिल किया है. 

यूपी में भूमिहारों को साधने का काम बिहार के दिग्गज नेता सीपी ठाकुर के बेटे राज्यसभा सदस्य विवेक ठाकुर के कंधों पर होगा. यूपी में भूमिहार समुदाय भले ही दो फीसदी हो, लेकिन वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, बलिया, आजमगढ़ और जौनपुर में अच्छी खासी संख्या है. यह पूर्वांचल का इलाका बिहार से सटा हुआ है. ऐसे में विवेक ठाकुर यूपी के भूमिहारों के बीच बीजेपी के लिए अहम रोल अदा कर सकते हैं. 

हालांकि, भूमिहार यूपी में फिलहाल बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है, लेकिन मौजूदा समय में भूमिहारों का कोई बड़ा नेता नहीं है. मनोज सिन्हा जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल हो गए हैं, जिसके सक्रिय राजनीति में अब वो नहीं है. ऐसे में पूर्व अधिकारी एके शर्मा को यूपी की राजनीति में बीजेपी ने उतारा, लेकिन योगी ने उन्हें अपनी कैबिनेट में अभी तक जगह न देने से उनका कोई खास प्रभाव नहीं जम सका. ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी विवेक ठाकुर के जरिए भूमिहारों को एक संदेश दिया है. 

जाट नेता को भी लगाया

किसान आंदोलन के कारण पश्चिम यूपी में बीजेपी की समीकरण गड़बड़ा रहा है. 2013 मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बीजेपी में आया जाट समुदाय अब किसान आंदोलन के कारण उसके खिलाफ खड़ा दिखाई दे रहा है. ऐसे में बीजेपी ने जाट समुदाय को बीजेपी के साथ साधकर रखने के लिए हरियाणा के पूर्व मंत्री और जाट समाज से आने वाले कैप्टन अभिमन्यु को यूपी चुनाव का सहप्रभारी नियुक्ति किया है. हरियाणा के सटे हुए पश्चिम यूपी में कैप्टन अभिमन्यु की नातेदारी और रिश्तेदारी भी है. ऐसे में बीजेपी ने अब उनके जरिए जाट की नाराजगी को दूर करने का दांव चला है. 

यादवों की जिम्मेदारी महिला नेता को

बीजेपी की नजर उत्तर प्रदेश में सपा के कोर वोटबैंक यादव समुदाय पर है, जिसे साधने के लिए पार्टी ने यादव समुदाय से आने वाली अन्नपूर्णा देवी को यूपी चुनाव में सहप्रभारी नियुक्त किया है. यूपी में करीब 10 फीसदी यादव वोटर है, जो सपा का मजबूत वोटबैंक माना जाता है. बीजेपी ने पिछले चुनाव में भले ही गैर-यादव ओबीसी को टारगेट किया हो, लेकिन इस बार उसकी नजर अति पिछड़े वोटों के साथ-साथ यादव वोटों पर भी है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने आजतक के कार्यक्रम में कहा था कि यादव समुदाय को पार्टी से जोड़ने के लिए हम लगातार कोशिश कर रहे हैं और जल्द ही यूपी में एक बड़ा सम्मेलन भी यादव समुदाय का करेंगे. 

यूपी की राजनीति में 22 फीसदी दलित मतदाता किसी भी पार्टी का सियासी खेल बनाने और बिगाड़ने की पूरी ताकत रखता है. नरेंद्र मोदी के केंद्र की सत्ता में आने के बाद से गैर-जाटव दलितों के बीच बीजेपी ने मजबूत पकड़ बनाई है. ऐसे में बीजेपी दलितों के बीच अपना सियासी आधार और भी मजबूत करने के लिए केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को सहप्रभारी बनाया है, जो खुद भी राजस्थान के दलित समाज से आते हैं. राजस्थान की सीमा पश्चिम यूपी के बृज क्षेत्र से लगी हुई है, जहां दलित समाज बड़ी संख्या में है. 

राजपूत समुदाय को साधने के लिए बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को यूपी का सहप्रभारी बनाया है. अनुराग ठाकुर युवा हैं और अपने समाज में उनकी अच्छी खासी लोकप्रियता है. हालांकि, यूपी में योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद राजपूत समुदाय बीजेपी का हार्डकोर वोटर बन गया है. इसके अलावा कर्नाटक से आने वाली शोभा करंदलाजे को भी यूपी चुनाव में सहप्रभारी नियुक्त किया गया है, जो आरएसएस से राजनीति में आई हैं. वो हार्डकोर हिंदुत्व की राजनीति करती रही हैं और अब यूपी में उसे सियासी धार देंगी. 


 

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