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Aligarh politics: तालीम और ताले के शहर अलीगढ़ का ऐसा रहा है सियासी गणित

Aligarh politics: अलीगढ़ में विधानसभा की 7 सीटें हैं. 2017 के चुनाव में बीजेपी ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी. जबकि उससे पहले 2012 के चुनाव में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी.

अलीगढ़ में विधानसभा की 7 सीटें अलीगढ़ में विधानसभा की 7 सीटें
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से है जिले की पहचान
  • अलीगढ़ जिले में विधानसभा की कुल सात सीटें
  • 2017 में बीजेपी ने सभी सात सीटें जीती थीं

अलीगढ़, अपनी तालीम और ताले के लिए दुनियाभर में मशहूर है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ये जिला हमेशा राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र रहा है. पिछले कुछ वक्त से ये शहर विवादों का भी केंद्र रहा है. 

सर सैयद अहमद खान ने शिक्षा के जिस मंदिर की नींव रखी थी, वो विश्व प्रसिद्ध अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी इसी शहर में मौजूद है. इस यूनिवर्सिटी से निकलकर छात्र जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में देश का नाम रोशन कर रहे हैं. 

अलीगढ़ के ताले भी हर तरफ अपनी छाप छोड़ते आए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जब अलीगढ़ के दौरे पर पहुंचे तो यहां के तालों का जिक्र करना नहीं भूले. यहां बड़े पैमाने पर ताले व हार्डवेयर का काम किया जाता है. 

अलीगढ़ की सियासत को देखा जाए तो यहां समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल मजबूत स्थिति में रही है. साथ ही बसपा का जनाधार भी अतीत में यहां रहा है. लेकिन 2017 के विधानसभा में जब भाजपा की लहर चली तो ये सभी दल यहां पिछड़ गए थे. भाजपा ने जिले की सभी सातों विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की थी. जबकि 2012 में भाजपा का यहां से एक भी विधायक नहीं था. अब 2022 का चुनाव है, नया चुनाव है और नए समीकरण उभर रहे हैं. 

अलीगढ़ जिले की आबादी 36 लाख से ज्यादा है. अलीगढ़ का लिटरेसी रेट लगभग 69.61% है. अलीगढ़ में 7 विधानसभा व 1 लोकसभा सीट है. इगलास व छर्रा विधानसभा सीट हाथरस लोकसभा क्षेत्र में लगती हैं. अलीगढ़ एक मंडल है और इसके अंतर्गत चार जिले- हाथरस, कासगंज, एटा व अलीगढ़ आते हैं. 

अलीगढ़ जनपद में करीब 55 फीसदी हिन्दू आबादी है, जबकि 43 फीसदी के करीब मुसलमानों की आबादी है. दलित वोटर यहां काफी प्रभावशाली है. कई इलाकों में ओबीसी वोटर निर्णायक भूमिका में है. 

अलीगढ़ ज़िले में 7 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें कोल, अलीगढ़ शहर, बरौली, अतरौली, छर्रा, खैर (सुरक्षित) और इगलास (सुरक्षित) है. 

2017 विधानसभा चुनाव का रिजल्ट

-कोल सीट से भाजपा के अनिल पराशर चुनाव जीते थे, दूसरे नंबर पर सपा के शाज़ इश्हाक रहे थे. 
-अलीगढ़ शहर विधानसभा सीट से भाजपा के संजीव राजा चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नंबर पर सपा के जफर आलम रहे थे. 
-बरौली विधानसभा सीट से भाजपा के ठाकुर दलवीर सिंह चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नंबर पर बसपा के जयवीर सिंह रहे थे.
अतरौली विधानसभा सीट से भाजपा के संदीप सिंह चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नंबर पर सपा के वीरेश यादव रहे थे. बता दें कि संदीप सिंह, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पोते हैं. 
-छर्रा विधानसभा सीट से भाजपा के ठाकुर रावेंद्र पाल सिंह चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नंबर पर सपा के ठाकुर राकेश सिंह रहे थे.
-खैर सुरक्षित विधानसभा सीट से भाजपा के अनूप वाल्मीकि चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नंबर पर बसपा प्रत्याशी राकेश कुमार मौर्य रहे थे.
-इगलास सुरक्षित विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी राजवीर दिलेर जीते थे. जबकि इस सीट पर 2019 में हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजकुमार सहयोगी ने जीत दर्ज की थी. दूसरे नंबर पर बसपा प्रत्याशी राकेश कुमार रहे थे.
इस तरह 2017 के चुनाव में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की थी और सपा व बसपा दोनों ही पिछड़ गए थे. हालांकि, 2012 के चुनाव में सपा का जादू चला था और साथ में आरएलडी को भी अभूतवपूर्व नतीजे मिले थे. 

2012 के विधानसभा चुनाव नतीजे

-कोल विधानसभा सीट पर  सपा से हाजी जमीरउल्लाह खान चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नंबर पर कांग्रेस के विवेक बंसल रहे थे.
-अलीगढ़ शहर विधानसभा सीट से सपा के जफर आलम चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नंबर पर भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय रहे थे.
-बरौली विधानसभा सीट से रालोद के टिकट पर ठाकुर दलवीर सिंह चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नम्बर पर बसपा के ठाकुर जयवीर सिंह रहे थे.
-छर्रा विधानसभा सीट से सपा के ठाकुर राकेश सिंह चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नंबर पर बसपा के मूलचंद्र बघेल रहे थे.
-अतरौली विधानसभा सीट से सपा के वीरेश यादव चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नंबर पर जनक्रांति पार्टी की प्रेमलता देवी रही थीं.
-खैर सुरक्षित विधानसभा सीट से रालोद के भगवती प्रसाद सूर्यवंशी चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नंबर पर बसपा की राजरानी रही थीं
-इगलास सुरक्षित विधानसभा सीट से रालोद के त्रिलोकिराम दिवाकर चुनाव जीते थे जबकि दूसरे नंबर पर बसपा प्रत्याशी राजकुमार रहे थे.

बता दें कि अलीगढ़ की बेल्ट में राजपूत, जाट और गुर्जर वोट भी है. जिसके दम पर रालोद भी यहां दमखम दिखाती रही है. जबकि मुस्लिम और दलितों के सहारे बसपा को भी जीत मिलती रही है और सपा भी अपना परचम लहराती रही है. 2022 के चुनाव में सपा और रालोद मिलकर लड़ रहे हैं. अगर दोनों पार्टियों का वोटबैंक जुड़ता है तो नतीजे बदल सकते हैं. 

 

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