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गुजरात में BJP की रिकॉर्ड जीत, 'हाथ' को हिमाचल का साथ, मैनपुरी में डिंपल जीतीं तो रामपुर से सपा साफ

गुजरात में बीजेपी ने बड़ी जीत के साथ ही कई रिकॉर्ड तोड़ डाले, कई रिकॉर्ड बना डाले. वहीं पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में जनता ने अपने फैसले में प्रदेश के राज को बदलकर रिवाज कायम रखा है. इसके अलावा 5 राज्यों की 6 विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर हुए उपचुनावों के नतीजों में कहीं कांग्रेस तो कहीं बीजेपी और सपा गठबंधन की जीत हुई है.

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पीएम नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और अखिलेश यादव
पीएम नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और अखिलेश यादव

गुजरात और हिमाचल विधानसभा के नतीजों की घोषणा गुरुवार 8 दिसंबर को हुई. इसके साथ ही 5 राज्यों की 6 विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर हुए उपचुनावों के नतीजे भी इसी दिन आए. इस बार गुजरात में बीजेपी ने वो कर दिखाया है, जो इसके पहले कभी किसी राज्य में नहीं किया. वहीं हिमाचल में जनता ने अपने फैसले में प्रदेश में राज बदलने का रिवाज कायम रखा है. जबकि उपचुनावों में कहीं बीजेपी तो कहीं कांग्रेस और आरएलडी ने जीत दर्ज की. 

दरअसल, गुजरात में बीजेपी ने बड़ी जीत के साथ ही कई रिकॉर्ड तोड़ डाले, कई रिकॉर्ड बना डाले. बीजेपी ने 2002 का 127 सीट जीतने का अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है. गुजरात में बीजेपी की लगातार 7वीं जीत का रिकॉर्ड बना है और बंगाल में लेफ्ट के 32 साल के शासन की बराबरी कर ली है. इस बार गुजरात की 182 सीटों में से बीजेपी को 156 सीटों पर जीत मिली है, जबकि कांग्रेस को 17, आम आदमी पार्टी को 5 और अन्य को चार सीटों पर जीत मिली है.

उधर, पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद सबसे बड़ा सवाल ये था कि क्या इस सूबे का सियासी मिजाज बदलेगा. क्या बीजेपी को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का मौका मिलेगा. लेकिन जनता ने अपने फैसले में प्रदेश के राज बदलकर रिवाज कायम रखा है. इसके साथ ही देश के सियासी फलक पर संकट में माने जाने वाली कांग्रेस पार्टी को जीत की संजीवनी मिली है. हिमाचल की 68 सीटों में से कांग्रेस को 40, बीजेपी को 25 और अन्य को 3 सीटों पर जीत मिली हैं, जबकि आम आदमी पार्टी का यहां खाता भी नहीं खुल पाया.

गुजरात के इतिहास में बीजेपी की सबसे बड़ी जीत

गुजरात में बीजेपी को इससे पहले इतनी बड़ी जीत कभी नहीं मिली थी. गुजरात में 1995 के बाद बीजेपी के आंकड़े पर नजर डालें तो ये जीत वाकई छप्परफाड़ नजर आएगी. 1995 में बीजेपी को 121 सीटें मिलीं. 1998 में 117, 2002 में पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने 127 सीटों के साथ रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी. मगर 2007 और 2012 में आंकड़ा फिर से घटा. 2007 में 117 और 2012 में बीजेपी को 115 सीटें मिलीं. पाटीदार आंदोलन के असर से 2017 में बीजेपी 99 सीटों पर आ गई. मगर इस बार 150 के आंकड़े को पारकर बीजेपी ने गुजरात में 1985 के उस रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया, जब कांग्रेस को 149 सीटें मिली थीं.

हिमाचल में सीएम चेहरे को लेकर सवाल

हिमाचल में कांग्रेस की जीत के बाद दो सबसे बड़े सवाल उठ रहे हैं. पहला ये कि जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा. हिमाचल में सीएम पद किसे मिलेगा. क्योंकि 12 नवंबर को मतदान के बाद ही हिमाचल के सीएम पद के लिए नेताओं की दिल्ली दौड़ शुरू हो गई थी. अब जीत के बाद सभी की निगाहें विधायक दल की बैठक और आलाकमान के फैसले पर टिक गई हैं. इसके साथ ही एक और सवाल हिमाचल की सियासी फिजा में गूंज रहा है कि क्या कांग्रेस की जीत के बाद हिमाचल में भी तोड़-फोड़ की राजनीति होगी. क्या बीजेपी सरकार बनाने के लिए ऐसी कोई कोशिश करेगी. ये चर्चा छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल के बयान से उठी, जिन्होंने अपने विधायकों को बीजेपी से बचाने की बात कही.

मैनपुरी में डिंपल का कमाल, सपा का जलवा बरकरार

मैनपुरी लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव की सबसे ज्यादा चर्चा थी. यहां मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद डिंपल यादव समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रही थीं. इस सीट में डिंपल को बंपर समर्थन मिला. डिंपल यादव ने बीजेपी के कैंडिडेट रघुराज शाक्य को करीब 2 लाख 88 हजार वोटों के बड़े अंतर से मात दी. यहां डिंपल को 6 लाख 18 हजार 120 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार रघुराज सिंह शाक्य को 3 लाख 28 हजार 986 वोट मिले. 

आजम के गढ़ में भी पहली बार खिला कमल

आजम खान के गढ़ कहे जाने वाले रामपुर में हुए उपचुनाव में बीजेपी ने पहली बार जीत दर्ज की है. रामपुर में बीजेपी प्रत्याशी आकाश सक्सेना ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आसिम रजा को 25,703 वोटों से हरा दिया. इसके अलावा यूपी की खतौली सीट से आरएलडी प्रत्याशी मदन भैया ने BJP कैंडिडेट राजकुमारी सैनी को 21,754 से हराया.

बिहार में बीजेपी की बड़ी जीत

इसके अलावा बिहार की कुढ़नी विधानसभा सीट पर बीजेपी को बड़ी जीत मिली है, इस सीट पर बीजेपी के केदार गुप्ता ने जेडीयू और महागठबंधन के उम्मीदवार को साढ़े तीन हज़ार से ज्यादा वोटों से हराया है. ख़ास बात ये है कि इस सीट पर एक तरफ बीजेपी थी और दूसरी तरफ जेडीयू के उम्मीदवार को 8 से ज्यादा पार्टियों का समर्थन हासिल था. इसके बावजूद महागठबंधन के उम्मीदार को हार का सामना करना पड़ा.

छत्तीसगढ़, ओडिशा और राजस्थान में बीजेपी की हार

छत्तीसगढ़ की भानुप्रतापपुर सीट पर कांग्रेस ने बीजेपी को मात दी है. यहां पर कांग्रेस की सावित्री मनोज मांडवी बीजेपी के ब्रह्मानंद नेताम को 21171 वोटों से मात दी है. ओडिशा से भी बीजेपी के लिए अच्छी खबर नहीं रही. ओडिशा के पदमपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजू जनता दल ने बीजेपी को हराया. यहां बीजेडी उम्मीदवार वर्षा सिंह बरिहा ने बीजेपी के प्रदीप पुरोहित को 42679 वोटों से मात दी है. राजस्थान उपचुनाव में भी बीजेपी की हार राजस्थान के सरदारशहर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी की हालत खराब रही. इस सीट पर बीजेपी के अशोक कुमार कांग्रेस के अनिल कुमार शर्मा से 26852 वोटों से हारे. 

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