लोकसभा चुनाव से ऐन पहले देश में राजनीतिक दलों की अचानक बाढ़ सी आ गई है. केंद्रीय चुनाव आयोग ने एक आरटीआई के जवाब में कहा है कि पिछले करीब सात महीने में आम आदमी पार्टी समेत 126 नए राजनीतिक दलों का पंजीकरण हुआ है. हालांकि चुनाव आयोग ने इन दलों को मान्यता नहीं दी है. अलबत्ता इन्हें गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की श्रेणी में रखकर चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए गए हैं.
मुरादाबाद निवासी आरटीआई कार्यकर्ता निमित जायसवाल ने चुनाव आयोग से ये सूचनाएं मांगी थीं. आयोग ने बताया है कि इन सभी गैर मान्यता वाले दलों को निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश 1968 के पैरा 10 बी के तहत चुनाव चिह्न प्रदान किए गए हैं. इन दलों की कैटेगिरी में सबसे ऊपर 'आप' है जिसे आयोग ने 30 जुलाई 2013 को 'झाड़ू' चुनाव चिह्न आवंटित किया. ठीक इसी दिन आयोग में राष्ट्रीय बहुजन हिताय पार्टी ने भी अपना पंजीकरण कराया और आयोग ने उसे पतंग चुनाव चिह्न आवंटित किया.
इसके बाद सात अगस्त 2013 को राष्ट्रीय बन्धुत्व पार्टी, 16 अगस्त 2013 को पीस पार्टी, बहुजन समाज मुक्ति मोर्चा, पीपुल्स ग्रीन पार्टी को चुनाव चिह्न आवंटित किए गए. इसके बाद सिलसिला शुरू हुआ तो 126 पर जाकर रुका.
चुनाव आयोग में देश के छह राजनीतिक दलों इंडियन नेशनल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी), बसपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा है.
चुनाव आयोग ने 22 राज्यों के 56 राजनीतिक दलों को स्टेट पार्टी के तौर पर मान्यता दे रखी है. इनमें सर्वाधिक सात स्टेट पार्टी मणिपुर में हैं जबकि दूसरे नंबर पर चार स्टेट पार्टी के साथ पुडुचेरी है. आयोग के रिकॉर्ड में यूपी से मान्यता प्राप्त स्टेट पार्टी के तौर पर राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी का नाम पंजीकृत है.