लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है लेकिन कांग्रेस के नेता अभी नींद से जागना ही नहीं चाहते. जहां एक तरफ राहुल गांधी जनता के हाथ में शक्ती देने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस खुद अपने नेताओं की ‘ना-ना’ से परेशान है. चुनाव सिर पर हैं और पार्टी के सूरमा हथियार छोड़कर मैदान से भागने को तैयार खड़े हैं.
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक नफा-नुकसान को तोल-मोल कर चलने वाले देश के वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को लोकसभा की चुनावी लड़ाई में वोटों की कड़की का डर है. खासतौर से तमिलनाडु में शिवगंगा की चढ़ाई पिछली बार से ज्यादा कठिन हो गई है. चिदंबरम इस कोशिश में हैं कि जैसे-तैसे उनके पड़ोसी राज्य कर्नाटक से सीट मिल जाए.
‘2जी घोटाले’ से लेकर ‘आदर्श बिल्ड़िंग घोटाले’ और ‘अन्ना आंदोलन’ पर सरकार की खूब पैरवी करने वाले मनीष तिवारी के भी हाथ-पांव फूले हुए हैं. सियासी माहौल को भांपते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी अपनी पुरानी सीट लुधियाना से चुनावी मैदान में नहीं जाना चाहते. दरअसल मनीष को अपनों का ही गुस्सा भारी पड़ सकता है. स्थानीय नेताओं ने मनीष के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.
शिपिंग मिनिस्टर जी.के. वासन ने भी चुनाव लड़ने से कन्नी काट ली है. वहीं पूर्व पर्यावरण मंत्री जयंती नीराजन ने भी लोकसभा की सीट का बोझ ढोने से मना कर दिया है. कपिल सिब्बल की कहानी सबसे जुदा है. पार्टी को डर है कि सिब्बल कहीं हार न जाएं. कांग्रेस सिब्बल को चांदनी चौक की बजाए अमृतसर भेजने के मूड में है. लेकिन सिब्बल हैं कि मानने को तैयार ही नहीं कि वो हार भी सकते हैं.
कांग्रेस आलाकमान को इस बात की चिंता है कि अगर बड़े-बड़े मंत्री इस तरह घर बैठ जाएंगे तो बाकी नेताओं का क्या होगा?