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Modi in Punjab: 20 साल में पहली बार, पंजाब में बीजेपी की रैली और मंच पर नहीं होंगे 'बादल'!

PM Modi in Punjab: किसान आंदोलन के बाद पंजाब में हताश हो चुकी बीजेपी को पीएम मोदी से काफी उम्मीदें हैं. पंजाब में बीजेपी पहली बार अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने जा रही. ऐसे में 20 साल के इतिहास में पहली बार होगा कि पंजाब में बीजेपी की रैली पर अकाली दल और बादल परिवार का कोई सदस्य नहीं होगा. 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रकाश सिंह बादल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रकाश सिंह बादल
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पंजाब में पीएम मोदी की पहली रैली हो रही
  • बीजेपी के पंच पर नहीं होगा बादल परिवार
  • किसानों को क्या पीएम मोदी देंगे सौगात

Punjab Assembly Election 2022: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को फिरोजपुर रैली से पंजाब विधानसभा के लिए बीजेपी का चुनावी बिगुल फूकेंगे. किसान आंदोलन के बाद पंजाब में हताश हो चुकी बीजेपी को पीएम मोदी से काफी उम्मीदें हैं. पंजाब में पहली बार बीजेपी अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने जा रही है. ऐसे में 20 साल के इतिहास में पहली बार होगा कि पंजाब में बीजेपी की रैली पर अकाली दल और बादल परिवार का कोई सदस्य नहीं होगा. 

बीजेपी के लिए सबसे अहम बात यह है कि करीब ढाई दशकों के बाद पार्टी अपने दम पर पंजाब में कोई रैली करने जा रही है. हालांकि, इससे पहले भी बीजेपी ने कई रैलियां आयोजित की है, लेकिन, शिरोमणि अकाली दल उसमें शामिल होता रहा है. किसान आंदोलन के चलते अकाली दल ने बीजेपी से नाता तोड़कर अलग हो गई है. ऐसे में बीजेपी पंजाब में अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने और रैली में ताकत दिखाने जा रही है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिरोजपुर से विकास और पंजाब में 'परिवर्तन' का बिगुल फूंकेंगे. पीएम की इस रैली से पंजाब भाजपा को खासी उम्मीदें है. बीजेपी का दावा है कि फिरोजपुर रैली से पंजाब की चुनावी फिजा बदलेगी. क्योंकि पीएम मोदी पंजाब के लिए 42,750 करोड़ रुपये की विकास की सौगात देंगे. इसके अलावा पीएम दिल्ली, अमृतसर, कटरा एक्सप्रेस वे के साथ ही अमृतसर से ऊना फोर लेन सड़क का अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट, मुकेरियां से तलवाड़ा नई ब्राडगेज रेलवे लाइन और कपूरथला व होशियारपुर में मेडिकल कालेजों का नींव पत्थर भी रखेंगे.

पंजाब की सियासत को देखते हुए पीएम मोदी की फिरोजपुर रैली काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पंजाब में पहली बार अकाली दल और बादल परिवार के बगैर बीजेपी की रैली हो रही है. इतना ही नहीं कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों द्वारा किए गए आंदोलन के चलते भी पंजाब में बीजेपी का सियासी ग्राफ काफी गिर गया था. 

हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने 19 नवंबर को गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व वाले दिन कृषि सुधार कानून वापस लेने के बाद राज्य में बीजेपी की स्थिति जरूर बदल गई, लेकिन सियासी चुनौतियां अभी भी कम नहीं हुई हैं. पंजाब की सियासत में ढाई दशक तक बीजेपी की सहयोगी रही अकाली दल अब अलग होकर बसपा के साथ गठबंधन कर रखा है. ऐसे में बीजेपी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुखदेव सिंह ढींढसा की पार्टी के साथ हाथ मिलाया है. 

पंजाब के चुनावी माहौल को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी राज्य को विकास की सौगात के साथ-साथ किसानों को लेकर कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं. किसान आंदोलन भले ही खत्म हो चुके हैं, लेकिन किसानों के मन में अब भी कसक है. ऐसे में प्रधानमंत्री विकास के साथ-साथ किसानों को दर्द की दवा भी दे सकते हैं. ऐसे में देखना होगा कि पीएम मोदी फिरोजपुर से कैसे पंजाब के सियासी समीकरण साधते हैं? 

माना जा रहा है कि पीएम मोदी फिरोजपुर रैली में विकास की सौगात देने के साथ-साथ पंजाब और सिख समुदाय के लिए किए गए कार्यों को उपलब्धी के तौर पर गिना सकते हैं. इनमें करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलना, सिखों की काली सूची को खत्म करना, सिख विरोधी दंगों पर केंद्र की कार्रवाई, लंगर को जीएसटी मुक्त करने का फैसला और अफगानिस्तान से सिखों को सुरक्षित लाना. बीजेपी इसे पंजाब चुनाव में अपना ट्रंप कार्ड मान रही है. 

 

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