देश में यूं तो कुल 29 राज्य हैं, लेकिन उत्तर भारत के बिहार और यूपी का दबदबा देश समेत विदेशों में हर कोने में है. सत्ता के मठाधीशों से लेकर सड़क किनारे पकवान बनाने वालों तक हर जगह इनकी मौजूदगी है. बिहार की बात करें तो यहां के निवासियों में कुछ ऐसे गुण हैं, जो असल जीवन से लेकर सिनेमाई पर्दे तक ह्यूमर यानी हास्य रस का काम करते हैं. एक नजर बिहारियों के ऐसे ही 10 गुणों पर जो उन्हें जुदा बनाती हैं...
* इस गैलरी का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है.
बिहार के हर माता-पिता की चाहत अपने लाल को इस बिल्डिंग में 'लाल बत्ती' के साथ देखने की होती है. यह गर्व की बात है कि यूपीएससी से चयनित छात्रों और शीर्षस्थ अधिकारियों में बिहारियों की कमी नहीं है. हालांकि, एक सच यह भी है कि पटना की गलियों से लेकर दिल्ली के मुखर्जी नगर और राजेन्द्र प्लेस में बिहारियों की एक पौध वर्षों से इस ओर अपना सिर फाेड़ रही है. जरूरत सितरों से आगे ब्रह्मांड में और भी तारों की ओर कदम बढ़ाने की है.
बात सियासत की हो और बिहार का नाम न आए, ऐसे तो हालात नहीं. बहुत पहले टीवी पर किसी कार्यक्रम के दौरान सुनने को मिला था- 'बिहार के बच्चे मां की कोख से राजनीति का ककहरा पढ़कर आते हैं.' वैसे अगर आपको शक हो तो बिहार जाने वाली किसी ट्रेन से लेकर बिहारी समुदाय के किसी चौराहे पर घंटा भर समय दीजिए. पूरे देश की सियासत न समझा दें तो कहिएगा...
बिहार और राजनीति की बातचीत में जब तक लालू प्रसाद यादव के नाम का तड़का न हो, मजा नहीं आता. राजनीति से याद आया, अगर आप राह चलते किसी बिहारी से टकरा जाएं और आपको यह गुमान हो कि आप किसी स्थानीय नेता या अफसर के रिश्तेदार हैं तो जरा संभलकर. क्योंकि आम तौर पर हम बिहारी लालू प्रसाद यादव से नीचे किसी और से रिश्ता तो रखते ही नहीं हैं.
अब बात पेट पूजा की. जानता हूं तस्वीर देखकर ही कई लोगों के मुंह में पानी आ गया होगा. लेकिन भाई, लिट्टी-चोखा पर तो हम बिहारियों का कॉपीराइट है. यह जायज भी है, क्योंकि इसे खाने के लिए शौक और हमसे बेहतर इसे बनाने का हुनर भी किसी के पास नहीं है.
खाना-पीना हो गया हो तो थोड़ा मूड फ्रेश कर लीजिए. बिहार में इसे खैनी कहते हैं, वैसे आप सूर्ती भी कह सकते हैं. न न, चेहरा मत देखिए, ये तो जेडीयू के अध्यक्ष शरद यादव हैं. इनके हाथ में जो हेलीकॉप्टर में भी शोभा पा रही है, वह खैनी है. अब इसकी लत के बारे में क्या कहना, शरद बाबू मध्य प्रदेश से बिहार में राजनीति करने आए और भविष्य में कुछ लेकर लौटें न लौटें, खैनी उनके हाथों में हमेशा शोभा पाएगी.
ऐसा है कि लाख मल्टीप्लेक्स आ जाए, लेकिन आज भी सिल्वर स्क्रीन के बल पर अगर कोई फिल्म हिट होती है तो इसमें बिहार के दर्शकों का बड़ा योगदान है. और हां, बाकी देश के लिए भले ही मिथुन चक्रवर्ती और धर्मेंद्र अब बूढ़े हो चले हों, लेकिन आज भी बिहार में इनकी फिल्में शाहरुख, सलमान से ज्यादा चलती हैं. जोरदार डायलॉग, शानदार डांस और धांसू एक्शन के अलावा और क्या चाहिए...
जैसा कि पहले ही लिखा चुका हूं. देश के किसी भी कोने में जाइए आपका हम बिहारियों से मिलना जरूर होगा. खासकर यदि आप सड़क के सारथी हैं तो रिक्शा वाले भइया से लेकर ऑटो वाले और सड़क किनारे पकवान बेचने वाले. भई राजधानी दिल्ली हो या कहीं और हमें तो अपनों के बीच ही अपनापन लगता है...
सानिया मिर्जा टेनिस कोर्ट पर स्टार प्लेयर बनीं, लेकिन इन्हें 'टेनिस सनसनी' बनाने में बिहार के लोगों का बहुत बड़ा हाथ है. चंदू के सैलून से लेकर पप्पू की चाय दुकान तक हर जगह आज भी सानिया ही चमकती है. अब क्या करें, 'सानिया मिर्जा के नथुनिया जान मारे ला....'
ईस्ट और वेस्ट. अपना धोनी सबसे बेस्ट. परवरिश और पहचान भले ही झारखंड में मिली, लेकिन खून (बिहार में जन्म) तो अपना ही है... तो ऐसा है कि टीम इंडिया तो जीतेगी ही और अगर नहीं भी जीते तो दुनिया चाहे इधर की उधर हो जाए, कप्तान तो अपना धोनी ही रहेगा.
अंतिम लेकिन सबसे खास. हम बिहारियों की भाषा और टोन. हिंदी प्रदेश से होने के बावजूद बिहारी एक टोन बन गया है. बोलने के क्रम में किसी भी बिहारी से र और ड़ का उच्चारण करवा लीजिए. स और श का उच्चारण करवा लीजिए. कहने का अर्थ यह कि बिहार से हैं तो चाहे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न पहुंच जाएं, कितने भी भाषा समृद्ध क्यों न हो जाएं, बोलने के क्रम में एक बार भी बिहारी टोन में नहीं बोले तो क्या बोले.
वैसे तस्वीर पर मत जाइएगा, मनाेज वाजपेयी बड़ी अच्छी हिंदी बोलते हैं.