बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी, एशिया की सबसे अमीर सिविक बॉडी. बीएमसी चुनाव पर पूरे देश की नजर रहती है. 75 हजार करोड़ रुपये की यह नगरपालिका हर बार पावर, पैसे और प्रतिष्ठा की लड़ाई बन जाती है. बीएमसी में 227 वार्ड हैं और इनमें जो पार्टी सबसे मजबूत होती है, राज्य की सियासत में उसी का सिक्का चलता है. बीएमसी चुनाव में गुरुवार का दिन था वोटिंग का और कल शुक्रवार को आएंगे नतीजे. लेकिन इससे पहले एग्जिट पोल ने सीटों को लेकर एक अनुमान पेश किया है.
क्या कहता है एग्जिट पोल का अनुमान?
Axis My India के एग्जिट पोल्स (Exit Polls) के मुताबिक बीजेपी गठबंधन, जिसमें भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना शिंदे गुट शामिल हैं, को 131 से 151 सीटें मिलने का अनुमान है. यानी बीजेपी को बीएमसी में स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है. दूसरे नंबर पर है यूबीटी गठबंधन यानी ठाकरे ब्रदर्स जिन्हें 58 से 68 सीटें मिल सकती हैं. कांग्रेस को 12 से 16 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं अन्य 6 से 12 सीटें निकाल सकता है.

अगर यूबीटी+ और कांग्रेस साथ लड़ते तो
यूं तो कांग्रेस राज्य में शिवसेना यूबीटी के साथ महा विकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा है लेकिन बीएमसी में उसने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. इसका असर एग्जिट पोल में साफ दिख रहा है. हालांकि बीजेपी गठबंधन को प्रचंड बहुमत मिलने का अनुमान है लेकिन अगर कांग्रेस यूबीटी गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ती तो तस्वीर कुछ और हो सकती थी.
अगर एग्जिट पोल में अनुमानित सीटों को जोड़ दें तो साथ मिलकर लड़ने पर यूबीटी+ और कांग्रेस गठबंधन को 70 से 84 सीटें मिल सकती थीं. हालांकि अन्य को साथ लेकर भी इन दलों के लिए बीजेपी+ को पीछे छोड़ना मुश्किल होता. अब बात वोटिंग प्रतिशत की कर लेते हैं.
वोटिंग प्रतिशत में बदल सकती थी तस्वीर
Axis My India के एग्जिट पोल्स की मानें तो बीजेपी+ को 42 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है. तो वहीं यूबीटी+ को 32 प्रतिशत और कांग्रेस को 13 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं. वहीं अन्य को भी 13 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है.

अगर कांग्रेस और यूबीटी+ साथ मिलकर चुनाव लड़ते तो यह आंकड़ा 45 प्रतिशत तक पहुंच सकता था और बीजेपी+ को पीछे छोड़ देता लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हालांकि एग्जिट पोल के ये आंकड़े सिर्फ अनुमान हैं. अंतिम तस्वीर नतीजों के रूप में शुक्रवार को सामने आएगी.
1996 से बीएमसी की सत्ता शिवसेना के पास
अगर एग्जिट पोल के ये अनुमान नतीजों में बदलते हैं तो सबसे बड़ा झटका शिवसेना को लगेगा. 1996 से लेकर 2017 तक बीएमसी की सत्ता शिवसेना के पास रही है. यह पहला चुनाव है जब पार्टी एकनाथ शिंदे के पास है. 2017 में आखिरी बार बीएमसी चुनाव हुए थे. तब शिवसेना ने 84 सीटें जीतकर मेयर का पद अपने पास रखा था. लेकिन अब सियासी हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.