लोकसभा चुनाव से पहले बिहार का सियासी मिजाज गरमाया हुआ है. इस समय सबसे ज्यादा चर्चा पूर्णिया लोकसभा सीट को लेकर है. कारण, इस सीट से आरजेडी ने बीमा भारती को उम्मीदवार बनाया है. उन्होंने यहां से नामांकन भी कर दिया है. उधर, हाल ही में पार्टी विलय कर कांग्रेस में शामिल हुए पप्पू यादव पहले से ही इस सीट पर दावेदारी करते रहे हैं. वहीं अब भी उनकी दावेदारी जारी है. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि वह पूर्णिया सीट से ही चुनाव लड़ेंगे.
अब पप्पू यादव का ताजा बयान सामने आया है. इसमें वह लालू यादव से गुहार लगाते नजर आए हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया है कि उन्हें पूर्णिया सीट से ही चुनाव लड़ना है, फिर चाहे आरजेडी ही क्यों न अपने सिंबल पर चुनाव लड़वा ले. इसके साथ ही उन्होंने साफ कहा है कि उनका लक्ष्य लोकसभा चुनाव है, न कि अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव.
वहीं बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने बिना नाम लिए पप्पू यादव पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि हम कहां किसी का नाम ले रहे हैं. जाहिर सी बात है कि जो हमारे खिलाफ हैं वो भाजपा के साथ हैं.
पप्पू यादव ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि मैं इसके बारे में बहुत स्पष्ट हूं, मेरा लक्ष्य 2024 है. कुछ लोग 2025 का लक्ष्य रख रहे हैं. मैं हमेशा विषम समय में लालू यादव के साथ रहा हूं, लेकिन जब मेरी बारी आई. हो सकता है मेरी पूजा, इबादत में कोई कमी रह गई हो. मैंने स्पष्ट रूप से कहा है कि मैं समझौता नहीं करूंगा या मधेपुरा या सुपौल नहीं जाऊंगा. मैंने कहा कि मैं पूर्णिया नहीं छोड़ूंगा. अगर आप चाहें तो मैं आरजेडी के सिंबल पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं. मुझसे क्या गलती हुई है?
आरजेडी के खाते में गई पूर्णिया सीट
बता दें कि पूर्णिया सीट से चुनाव लड़ने के लिए पप्पू यादव ने बीते महीने 20 मार्च को दिल्ली में अपनी जन अधिकार पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लिया था. कांग्रेस में विलय के बाद वो पार्टी से पूर्णिया सीट पर अपनी उम्मीदवारी का टिकट चाहते थे. हालांकि पूर्णिया सीट को लेकर बिहार में महागठबंधन में शामिल आरजेडी और कांग्रेस के बीच ठन गई थी.
लालू यादव किसी भी कीमत पर पूर्णिया सीट कांग्रेस को नहीं देना चाहते थे. यही वजह है कि सीट शेयरिंग फाइनल होने से पहले ही लालू यादव ने बीमा भारती को बुलाकर पूर्णिया से चुनाव लड़ने के लिए अपनी पार्टी का सिंबल दे दिया था. इसके बाद दिल्ली में सीट शेयरिंग के लिए आरजेडी और कांग्रेस की बीच जो मीटिंग हुई थी उसमें लालू के दबाव के आगे कांग्रेस को झुकना पड़ा और पूर्णिया सीट से उन्हें अपना दावा छोड़ना पड़ा.