आंध्र प्रदेश की श्रीकाकुलम लोकसभा सीट पर तेलुगू देशम पार्टी के युवा सांसद राम मोहन नायडू का कब्जा है. श्रीकाकुलम आंध्र प्रदेश का उत्तरी छोर है जहां से इस बार जनसेना पार्टी के मेट्टा राम राव चुनाव लड़ रहे हैं. यहां पिरामिड पार्टी और इंडिया प्रजा बंधु पार्टी जैसे दल भी इस बार मैदान में हैं. कांग्रेस की तरफ से डोला जगन मोहन राव उम्मीदवार हैं तो बीजेपी से पेरला संबा मूर्ति हैं. जगनमोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस से डुवड्डा वानी उम्मीदवार हैं. यहां असली लड़ाई टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के ही बीच है.
साल 1984 से यह सीट टीडीपी का मजबूत गढ़ है. साल 2009 में टीडीपी का यहां से कब्जा हट गया था लेकिन 2014 में पार्टी फिर जीती और उसके उम्मीदवार राममोहन नायडू ने वाईएसआर कांग्रेस की शांति रेड्डी को हराया. इस सीट पर पहले फेज में 11 अप्रैल को मतदान है.
श्रीकाकुलम निर्वाचन क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें हैं. इनके नाम हैं-इचापुरम, पलासा, टेक्काली, पत्थापटनम, श्रीकाकुलम, अमवडलावासा और नरसनपेट्टा. इस सीट पर कलिंग और वेलामा समुदायों के बीच कई चुनावों में टक्कर होती रही है. अगले चुनाव में भी यही दोनों समुदाय उम्मीदवार की जीत-हार का फैसला करेंगे.
2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की कुल आबादी 1933930 है जिसमें 78.62 प्रतिशत ग्रामीण और 21.38 प्रतिशत शहरी आबादी है. इस सीट पर अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का अनुपात क्रमशः 8 और 4.82 प्रतिशत है.
श्रीकाकुलम सीट सामान्य श्रेणी में आता है. सांसद टीडीपी के राममोहन नायडू हैं. पिछले चुनाव में उन्होंने वाईएसआर कांग्रेस की प्रत्याशी को 127,572 वोटों से हराया था. साल 2014 में 1,413,989 लोगों ने मतदान किया. चुनाव आयोग के मुताबिक 2014 में 74.36 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. इस सीट पर पिछले चुनाव में 1812 पोलिंग बूथ थे. महिला मतदाताओं की संख्या 707,161 है.
आंध्र में कुल 25 लोकसभा सीटें हैं. इनमें एक श्रीकाकुलम सीट पर 1951/52 में निर्दल उम्मीदावर बोड्डेपल्ली राजा राव ने जीत दर्ज की. बाद में इस सीट पर 1957,1962,1971,1977 और 1980 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की. इस सीट पर लगातार राव ने जीत दर्ज की क्योंकि वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे. 1984 में टीडीपी के अप्पैयाडोरा हनुमंतू यहां जीते लेकिन बाद में पार्टी हारती रही. 1996 से लेकर 2004 तक पार्टी के नेता येरन नायडू चुनाव जीतते रहे. येरन नायडू ने पूरे श्रीकाकुलम में अपनी अच्छी राजनीतिक पकड़ बनाई जिसके कारण वे कई बार संसदीय चुनाव जीते.
1996 में युनाइटेड फ्रंट की सरकार में वे कैबिनेट मंत्री रहे. हालांकि 2009 में टीडीपी यहां से हार गई और कांग्रेस उम्मीदवार किल्ली कृपा रानी को जीत मिली. 2012 में येरन नायडू की सड़क हादसे में मौत हो गई जिसके बाद उनके बेटे राममोहन नायडू ने राजनीति में प्रवेश किया. 2014 के चुनाव में उनकी बंपर जीत हुई. उस चुनाव में इस सीट पर तीन तरफा लड़ाई थी जिसमें एक ओर राममोहन नायडू तो दूसरी ओर कांग्रेस से कृपा रानी और शांति रेड्डी रहे.
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