scorecardresearch
 

Ahmednagar: 46 साल लगातार कांग्रेस के कब्जे में रही अहमदनगर लोकसभा सीट

Ahmednagar Lok sabha constituency 2019 के लोकसभा चुनाव 2019 में सबकी नजरें लगी हुई हैं. लोकसभा चुनावों के लिहाज से महाराष्ट्र की अहमदनगर सीट क्यों है खास,  इस आर्टीकल में पढ़ें...

Advertisement
X
अहमदनगर लोकसभा सीट
अहमदनगर लोकसभा सीट

महाराष्ट्र की अहमदनगर सीट एक समय कांग्रेस उम्मीदवार के जीत की गारंटी बन गई थी. 1952 से 1998 तक लगातार 46 सालों तक यहां कांग्रेस के सांसद रहे. इस कांग्रेस राज के वर्चस्व को एक कांग्रेसी बालासाहेब विखे पाटील ने तोड़ा जो 1998 में शिवसेना के टिकट पर यहां से लड़े और जीते. इसके बाद इस सीट पर कांग्रेस कभी वापिसी नहीं कर पाई. वर्तमान में अहमदनगर सीट से बीजेपी के दिलीप कुमार गांधी सांसद हैं जिन्हें तीसरी बार जनता की सेवा करने का मौका मिला.

व‍िधानसभा सीट का म‍िजाज

अहमदनगर लोकसभा सीट में 6 विधानसभा सीट आती हैं. इस लोकसभा सीट पर बीजेपी-शिवसेना गठबंधन का दबदबा है. शेगांव, राहुरी और कर्जत जामखेड में बीजेपी, पारनेर में शिवसेना, अहमदनगर शहर और श्रीगोंडा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक हैं.

अहमदनगर लोकसभा सीट का इत‍िहास

Advertisement

अहमदनगर लोकसभा सीट पर 1952 से 1998 तक करीब 46 सालों तक कांग्रेस का एकछत्र राज्य रहा. 1952 में कांग्रेस के उत्तमचंद आर बोगावत सांसद बने तो कांग्रेस की ये पुश्तैनी सीट बन गई. 1977 में जब देश से कांग्रेस साफ हो गई थी तब भी यहां कांग्रेसी सांसद बने. वाय जी पाटील यहां से 1984 से 1991 तक लगातार तीन बार सांसद रहे. 1998 में कांग्रेस के ही दिग्गज नेता लेकिन इस बार शिवसेना के टिकट पर लड़े बालासाहेब विखे पाटील अहमदनगर और कोपरगांव सीट से चुनाव जीते. उसके बाद कांग्रेस यहां कभी वापिसी नहीं कर पाई. 1999 में बीजेपी के दिलीप कुमार गांधी सांसद बने फिर एनसीपी के तुकाराम गडाख सांसद निर्वाचित हुए. उसके बाद फिर बीजेपी के दिलीप कुमार गांधी दूसरी बार इसी सीट से सांसद बने और 2014 के चुनाव में भी जीत हासिल की.

एक कांग्रेसी ने ही श‍िवसेना से लड़कर तोड़ा था कांग्रेस का त‍िल‍िस्म

अपने राजनीतिक जीवन में अधिकांश समय कांग्रेस में रहने वाले बालासाहेब 1998 में शिवसेना के टिकट पर लड़कर लोकसभा चुनाव जीते थे. वे एनडीए सरकार में वित्त राज्यमंत्री रहे थे. बाद में उन्हें भारी उद्योग मंत्री बनाया गया था. 2004 में वे वापस कांग्रेस में लौट आए थे. उनके पिता विट्ठलराव विखे पाटिल ने लोनी में एशिया की पहली सहकारी चीनी मिल स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

Advertisement

2014 लोकसभा चुनाव में जीत का गण‍ित

2009 के चुनाव में बीजेपी के दिलीप कुमार गांधी को 3,12,047 वोट मिले तो वहीं एनसीपी के शिवाजी कार्डिले को 2,65,316 वोट मिले. 2014 के लोकसभा चुनावों में दिलीप कुमार गांधी ने 6,05,185 वोट पाकर भारी जीत हासिल की. वहीं, पिछले चुनाव में निर्दलीय और इस बार एनसीपी के टिकट पर लड़े राजीव राजाले को 3,96,063 वोट मिले. तीसरे स्थान पर निर्दलीय रहा जिसे 12,683 वोट मिले.    

सांसद द‍िलीप कुमार गांधी के बारे में

गांधी ने अपना राजनीतिक करियर बीजेपी के जिला संगठन स्तर से की. इन्होंने यहां जिले में बीजेपी  महासचिव, संयुक्त सचिव और अध्यक्ष के पर काम किया. गांधी अहमदनगर नगर निगम में पार्षद भी चुने गए. 1999 में गांधी पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भी रहे. उसके बाद वे 2009 में दूसरी बार और 2014 में तीसरी बार सांसद चुने गए. 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इन्हें 2 लाख वोटों से भारी जीत मिली थी.

संसद में वर्तमान सांसद का प्रदर्शन और संपत्त‍ि

संसद में इनकी उपस्थिति 68 फीसदी रही. वहीं, संसद में 48  डीबेट में भाग लिया और 278 प्रश्न पूछे. प्राइवेट मेंबर्स बिल लाने में इनका खाता शून्य रहा. इस सीट पर संसदीय इलाके में खर्च करने के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान है. इसमें से म‍िले फंड का  105.71 फीसदी खर्च क‍िया. 2014 के लोक सभा चुनाव के हलफनामे में इन्होंने 6 करोड़ रुपये की संपत्त‍ि घोष‍ित की थी. इन पर 16 क्र‍िम‍िनल केस दर्ज हैं.

Advertisement
Advertisement