मणिपुर की आंतरिक मणिपुर लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से छीन ली है. इस संसदीय सीट पर बीजेपी की ओर से चुनाव लड़े मशहूर पर्यावरणविद आर के रंजन ने शानदार जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी ओइनम नबा किशोर सिंह को धुल चटाई. चुनाव आयोग से मिले आंकड़ों के अनुसार आर के रंजन ने ओइनम नबा किशोर को 17 हजार 755 वोटों के अंतर से हराया.
कब और कितनी हुई वोटिंग
इस सीट पर वोटिंग दूसरे चरण में 18 अप्रैल को हुई थी जिसमें क्षेत्र के कुल 9,28,626 वोटरों में से 7,53,709 वोटरों यानी 81.16 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था.
कौन-कौन हैं प्रमुख उम्मीदवार
आंतरिक मणिपुर लोकसभा सीट पर कुल 11 उम्मीदवार चुनावी रण में किस्मत आजमा रहे हैं. बीजेपी का इस सीट पर एनपीपी से समझौता है. लिहाजा इस सीट पर एनपीपी ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं. पिछले चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट से जीत हासिल की थी, लेकिन पार्टी ने इस बार अपना उम्मीदवार बदल दिया है. इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार ओइनम नबा किशोर सिंह हैं. सीपीआई के मोइरंगथेम नारा सिंह यहां मैदान में हैं.
2014 का चुनाव
पिछले चुनाव में इस सीट पर 74.92 फीसदी वोटिंग हुई थी. पिछले लोकसभा चुनाव में मणिपुर सीट से कांग्रेस पार्टी के डॉ. थोकचोम मेन्या ने जीत दर्ज की थी. वो तीसरी बार यहां से सांसद चुने गए. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उनको दो लाख 92 हजार 102 वोट यानी कुल मतदान का 46 फीसदी वोट मिले थे. डॉ. थोकचोम मेन्या ने अपने प्रतिद्वंदी सीपीआई के मॉयरांग थेम को 94 हजार 674 मतों से करारी हार दी थी. इस चुनाव में मॉयरांग थेम को एक लाख 97 हजार 428 वोट मिले थे.
मणिपुर में 60 सदस्यीय विधानसभा है. आंतरिक मणिपुर लोकसभा सीट के तहत विधानसभा की 32 सीटें आती हैं. साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 31 सीटों, नागा पीपुल्स फ्रंट ने 4, नेशनल पीपल पार्टी ने 4, लोक जनशक्ति पार्टी ने एक सीट और कांग्रेस ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके अलावा एक सीट पर निर्दलीय को जीत मिली थी. चुनाव के बाद बीजेपी ने सभी दलों के साथ सूबे में सरकार बना ली. अब विपक्ष में सिर्फ कांग्रेस पार्टी है.
सामाजिक तानाबाना
पहाड़ियों और घाटियों में बसे मणिपुर में नगा और कूकी जाति की लगभग 60 जनजातियां रहती हैं. यह लोक संगीत और कला में बहुत प्रवीण होते हैं. इस राज्य के लोग मणिपुरी भाषा बोलते हैं. यहां पहाड़ी ढालों पर चाय और घाटियों में धान की खेती की जाती है. आजादी से पहले मणिपुर एक रियासत थी, लेकिन आजादी के बाद यह भारत का एक केंद्रशासित राज्य बन गया. मणिपुर को 21 जनवरी 1972 को राज्य का दर्जा दे दिया गया, जिसकी राजधानी इंफाल है.
सीट का इतिहास
साल 1951 में इनर मणिपुर लोकसभा सीट अस्तित्व में आई. इसके बाद से यहां पर लगातार चुनाव हो रहे हैं. अब तक इस सीट पर 15 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं. इसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. अब तक हुए लोकसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस ने 10 बार जीत दर्ज की है. इसके अलावा सीपीआई ने दो बार जीत दर्ज की है. इस सीट पर मणिपुर स्टेट कांग्रेस पार्टी भी दो बार चुनाव जीत चुकी है. इसके अतिरिक्त एमआरपी पार्टी भी एक बार जीत दर्ज कर चुकी है.
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