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Giridih Election Result 2019: गिरिडीह की 6 सीटों पर किनको मिली फतह, सबसे ज्यादा वोटों से जीता यह उम्मीदवार

धनवार विधानसभा सीट से झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) पार्टी के बाबू लाल मरांडी ने 2009 से चला रहा अपना सूखा खत्म करते हुए जीत दर्ज की है. पूर्व मुख्यमंत्री मरांडी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के लक्ष्मण प्रसाद सिंह को 17550 वोट से हरा दिया.

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Jharkhand: Giridih, Dumri, Bagodar and Dhanwar Vidhan Sabha Election Result 2019 (File Photo-ANI)
Jharkhand: Giridih, Dumri, Bagodar and Dhanwar Vidhan Sabha Election Result 2019 (File Photo-ANI)

  • गिरिडीह जिले में आती हैं बगोदर, जमुआ, गाण्डे, गिरिडीह, डुमरी, धनवार विधानसभा सीटें
  • बगोदर, जमुआ, गाण्डे, गिरिडीह, डुमरी में 16 दिसंबर और धनवार में 12 दिसंबर को पड़े वोट

झारखंड के गिरिडीह जिले की बगोदर, जमुआ, गाण्डे, गिरिडीह, डुमरी, धनवार विधानसभा सीटों पर सोमवार को वोटों की गिनती की गई. बगोदर विधानसभा सीट से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट) (लिबरेशन) के उम्मीदवार विनोद कुमार सिंह ने जीत दर्ज कर ली. उन्होंने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंदी और बीजेपी के प्रत्याशी नागेंद्र महतो को 14,545 वोटों से करारी मात दी. पिछली बार इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के नागेंद्र महतो ने 4,339 वोटों से जीत दर्ज की थी. यहां चौथे चरण में 16 दिसंबर को वोट डाले गए थे.

धनवार विधानसभा सीट से जीते मरांडी

धनवार विधानसभा सीट से झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) पार्टी के बाबू लाल मरांडी ने 2009 से चला रहा अपना सूखा खत्म करते हुए जीत दर्ज की है. पूर्व मुख्यमंत्री मरांडी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के लक्ष्मण प्रसाद सिंह को 17550 वोट से हरा दिया. मरांडी को कुल 52352, जबकि लक्ष्मण को 34802 वोट मिले. सीपीआईएमएल के राजकुमार यादव 32245 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा के निजामुद्दीन अंसारी को 14432 वोट मिले.

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डुमरी सीट से जगरनाथ महतो ने मारी बाजी

वहीं, डुमरी विधानसभा सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा के जगरनाथ महतो ने जीत दर्ज कर ली है. उन्होंने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंदी आजसू पार्टी की प्रत्याशी यशोदा देवी को 34,288 वोटों से करारी शिकस्त दी. तीसरे नंबर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदीप कुमार साहू रहे. पिछली बार भी जगरनाथ महतो ने इस सीट से जीत हासिल की थी. पिछली बार उन्होंने 32,481 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. यहां चौथे चरण में 16 दिसंबर को वोट डाले गए थे.

गाण्डे सीट पर सरफराज ने लहराया परचम

झारखंड की गाण्‍डे विधानसभा सीट से झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के डॉ. सरफराज अहमद ने 8,855 वोटों से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी जय प्रकाश वर्मा को करारी मात दी है. इस चुनाव में डॉ. सरफराज अहमद को 65,023 वोट मिले, जबकि जय प्रकाश वर्मा को 56,168 वोटों से संतोष करना पड़ा. पिछली बार इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के जय प्रकाश वर्मा ने 10,279 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी. यहां चौथे चरण में 16 दिसंबर को वोट डाले गए थे.

गिरिडीह से जेएमएम और जमुआ से बीजेपी ने मारी बाजी

गिरिडीह विधानसभा सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सुदिव्य कुमार ने जीत हासिल की है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के निर्भय कुमार शाहाबादी को हार का सामना करना पड़ा है. सुदिव्य कुमार ने 15,884 वोटों से निर्भय कुमार शाहाबादी को हराया. इस चुनाव में सुदिव्य कुमार को 80,871 वोट मिले, जबकि निर्भय कुमार शाहाबादी को 64,987 वोटों से संतोष करना पड़ा. पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के निर्भय कुमार शाहाबादी ने 9,933 वोटों के अंतर से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे थे.

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उधर, जमुआ विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी केदार हजरा ने 18,175 वोटों से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे. उन्होंने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंदी और कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी मंजु कुमारी को करारी मात दी. पिछली बार भी भारतीय जनता पार्टी के केदार हजरा ने 23,100 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी. जमुआ विधानसभा सीट पर चौथे चरण में 16 दिसंबर को वोट डाले गए थे.

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झारखंड की सभी 81 विधानसभा सीट पर कुल पांच चरणों में विधानसभा चुनाव कराए गए थे. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने मिलकर चुनाव लड़ा है.

हजारीबाग से अलग होकर बना था गिरिडीह जिला

गिरिडीह 4 दिसंबर 1972 में हजारीबाग से अलग होकर नया जिला बना था. इसके उत्तर में बिहार का नवादा और जमुई है. पूर्व में देवघर और जामताड़ा, दक्षिण में धनबाद-बोकारो और पश्चिम में हजारीबाग और कोडरमा जिला है. पूरा जिला घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है. इस जनजातीय भूमि के पारंपरिक शासक मुंडा जनजाति के लोग रहे हैं. 1556 में मुगल सम्राट अकबर के सत्ता में आने तक इस क्षेत्र के बारे में बेहद कम लोगों को जानकारी थी.

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Jharkhand Election Results Live: नतीजों से पहले नेताओं ने किए जीत के दावे

इस जिले का सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा धार्मिक स्थल है पारसनाथ मंदिर. यह जैन समुदाय के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है. ऐसा कहा जाता है कि करीब 2000 साल पहले समेकित शिखर यानी जिस पहाड़ी पर पारसनाथ मंदिर है, उसे एकाग्रता की चोटी भी कहा जाता था. क्योंकि 24 में से 20 तीर्थंकरों ने इस स्थान पर समाधि या ध्यान केंद्रित कर निर्वाण प्राप्त किया.

18वीं सदी की शुरुआत में इस क्षेत्र को हजारीबाग के ब्रिटिश नियंत्रित जिले में शामिल किया गया था. यह शहर लंबे समय तक ब्रिटिश शासन के दक्षिण-पश्चिम फ्रंटियर एजेंसी का हिस्सा रहा है. ब्रिटिश शासन के दौरान 1871 में खनिजों के आवागमन को लेकर यहां रेलवे ट्रैक बिछाया गया. गिरिडीड अपनी खनिज संपदा के लिए पूरे देश में विख्यात है.

गिरिडीह जिले की आबादी 24.45 लाख, साक्षरता दर 63.14%

गिरिडीह जिले की कुल आबादी 2,445,474 है. इसमें से 1,258,098 पुरुष और 1,187,376 महिलाएं हैं. यहां का औसत लिंगानुपात 944 है. जिले का औसत शिक्षा दर 63.44 फीसदी है. पुरुषों में शिक्षा दर 62.3 फीसदी और महिलाओं में 39.5 फीसदी है. गिरिडीह के 8.5 फीसदी लोग शहरी क्षेत्रों में और 91.5 फीसदी लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. जिले में कुल मिलाकर 13 ब्लॉक्स हैं.

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गिरिडीह की जातिगत गणित

अनुसूचित जातिः 325,493

अनुसूचित जनजातिः 238,188

गिरिडीह जिले की आबादी

हिंदूः 1,856,202

मुस्लिमः 508,586

ईसाईः 14,645

सिखः 937

बौद्धः 650

जैनः 1,503

अन्य धर्मः 59,218

जिन्होंने धर्म नहीं बतायाः 3,733

गिरिडीह जिले में कामगारों की स्थिति

गिरिडीह जिले में कुल मिलाकर 1,036,277 लोग रोजगार में लगे हैं. इनमें से करीब 40 फीसदी ऐसे हैं जो या तो स्थाई रोजगार में शामिल हैं या साल में 6 महीने से ज्यादा कमाते हैं.

मुख्य कामगारः 412,912

किसानः 134,666

कृषि मजदूरः 78,621

घरेलू उद्योगः 13,020

अन्य कामगारः 186,605

सीमांत कामगारः 623,365

जो काम नहीं करतेः 1,409,197

गिरिडीह की कला और संस्कृति

गिरिडीह अपनी आकर्षक जनजातीय कला और चित्रकला के लिए काफी प्रसिद्ध है. दीवारों पर की जाने वाली कोहबर और सोहराई पेंटिंग यहां की रग-रग में बसा है. मधुबनी पेंटिंग्स भी इस क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं. पत्थरों पर नक्काशीदार चित्रकला पैतकर मृत्यु के बाद मानव की यात्रा का प्रतीक है. गिरिडीह एक धर्मनिरपेक्ष क्षेत्र है. यहां होली, दिवाली, ईद और क्रिसमस जैसे सभी प्रमुख त्यौहारों को खुशी और उत्साह से मनाया जाता है. हिंदी शहर की आम भाषा है. हालांकि जनजातीय वर्चस्व वाले क्षेत्र में संथाली भी बोली जाती है.

शहर में लंगटा बाबा समाधि स्थल भी है जो खरगाडिह में स्थित है. समाधि स्थल पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग आते हैं. हरिहर मंदिर भी प्रसिद्ध है. इसके परिसर में 65 फीट ऊंचे शिवलिंग को भारत का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है. इसके अलावा यहां देखने और घूमने लायक जगहें हैं उसरी फॉल, खंडोली बांध, कबीर ज्ञान मंदिर आदि.

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