scorecardresearch
 

गुजरात: पूर्व IPS और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट DG वंजारा जल्द लॉन्च करेंगे अपनी राजनीतिक पार्टी

डीजी वंजारा गुजरात में इशरत जहां, शौराबुद्दीन शेख़, तुलसी प्रजापति जैसे फर्जी एनकाउंटर के आरोप की वजह से 9 साल जेल में रहे हैं. डीजी वंजारा को कोर्ट ने सबूत ना होने की वजह से रिहा कर दिया था. पिछले दिनों कई धर्मसभा में डीजी वंजारा दिखे थे. अब राजनीतिक दल लाने की घोषणा की है.

X
डीजी वंजारा. -फाइल फोटो डीजी वंजारा. -फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2002 से 2005 तक अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के DCP रहे हैं वंजारा
  • वंजारा की पोस्टिंग के दौरान करीब 20 लोगों का एनकाउंटर हुआ था

गुजरात में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव से कुछ महीने पहले राज्य के पूर्व आईपीएस अधिकारी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट डीजी वंजारा ने जल्द ही अपनी राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने की घोषणा की है. डीजी वंजारा ने इस संबंध में रविवार को एक ट्वीट कर इसकी जानकारी दी.

राज्य के पूर्व आईपीएस और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की पार्टी इस साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव में दिख सकती है. वंजारा ने जल्द ही अपनी राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने की बात कही है. रविवार को डीजी वंजारा ने इस संबंध में ट्विटर पर जानकारी दी. 

ट्वीट में वंजारा ने कहा कि गुजरात में एक नया राजनीतिक विकल्प उभरने वाला है, जो दिसंबर में जीत हासिल करेगा और लोकतंत्र की स्थापना करेगा. गुजरात नए आदर्शों को लागू करेगा. उन्होंने कहा कि गुजरात में नए राजनीतिक विकल्प की शुरुआत होने जा रही है, जो दिसंबर 2022 में विजय हासिल करेगा और राजसत्ता के साथ-साथ धर्मसत्ता की स्थापना भी करेगा. मुसलमानों, ईसाईयों और यहूदियों के देशों में राजसत्ता और धर्मसत्ता सक्रिय है तो भारत में क्यों नहीं. इसका जवाब गुजरात के लोग देंगे. गुजरात नये आदर्श का पालन करेगी. 

उन्होंने कहा कि राजनीतिक के साथ-साथ धर्म की रक्षा भी जरूरी है, इसलिए हम राजनीतिक पार्टी की शुरुआत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जल्द ही इस पार्टी को लॉन्च किया जाएगा, जो कि सत्ताधारी पार्टी के विरोध में अपनी सच्ची लोकशाही के उद्देश्य के साथ खड़ी होगी.

कौन हैं डीजी वंजारा?

डीजी वंजारा गुजरात काडर के आईपीएस अधिकारी थे उनकी छवि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की रही है. वह 2002 से 2005 तक अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के DCP थे. उनकी इस पोस्टिंग के दौरान करीब 20 लोगों का एनकाउंटर हुआ. CBI जांच में पता चला कि ये एनकाउंटर फर्जी थे. वंजारा को पहली बार अप्रैल, 2007 में गुजरात CID की टीम ने सोहराबुद्दीन शेख और उनकी पत्नी कौसर बी के फर्जी मुठभेड़ मामले में उनकी कथित संलिप्तता के लिए गिरफ्तार किया था. बाद में उन्हें इशरत जहां और तीन अन्य लोगों और तुलसीराम प्रजापति की हत्या के लिए भी आरोपी बनाया गया.

वंजारा को 2007 में उनकी गिरफ्तारी के बाद साबरमती सेंट्रल जेल में रखा गया. नवंबर, 2012 में सोहराबुद्दीन मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुकदमा चलाने के बाद उन्हें मुंबई की तलोजा जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था. जून, 2013 में सीबीआई ने इशरत जहां मामले में वंजारा को गिरफ्तार किया और उन्हें साबरमती जेल वापस लाया गया. सितंबर, 2014 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन मामले में जमानत दी थी. फरवरी, 2015 में सीबीआई की विशेष अदालत ने इशरत मामले में उन्हें जमानत दे दी. इसके बाद वो जेल से बाहर आ गए.

फिर 2017 में सोहराबुद्दीन शेख मामले में वंजारा को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया. मई, 2019 में सीबीआई अदालत ने उन्हें इशरत जहां मामले में भी बरी कर दिया था.

ये भी पढ़ें

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें