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दिल्ली कैंट सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला, इस बार किसके सिर सजेगा ताज

बीजेपी 21 वर्ष से दिल्ली की सत्ता से बाहर है और वह इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि तथा हाल ही में 1731 कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर अपना मजबूत दावा ठोंकने की बात कर रही है.

Delhi Assembly Election 2020 (फोटो-रॉयटर्स) Delhi Assembly Election 2020 (फोटो-रॉयटर्स)

  • बीजेपी 21 वर्ष से दिल्ली की सत्ता से बाहर है
  • दिल्ली कैंट पर जीत दर्ज करना चाहेगी बीजेपी

दिल्ली कैंट विधानसभा प्रतिष्ठित सीटों में एक है. यह विधानसभा सीट नई दिल्ली जिले का हिस्सा है. सैन्‍य छावनी के लिए मशहूर यह इलाका नई दिल्‍ली लोकसभा क्षेत्र का हिस्‍सा है. अभी इस सीट पर आम आदमी पार्टी के सुरेंद्र सिंह विधानसभा सदस्य हैं. इस बार कांग्रेस से संदीप तंवर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से मनीष सिंह और आम आदमी पार्टी से वीरेंद्र सिंह कादयान इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

दिल्ली कैंट विधानसभा क्षेत्र में 2019 की मतदाता सूची के मुताबिक  1,23,511 मतदाता  114 मतदान केंद्रों पर वोटिंग करेंगे. विधानसभा चुनाव 2015 में  58.59% मतदान हुआ था. बीजेपी, कांग्रेस और AAP को क्रमशः 37.36%, 9.15% और 51.82% वोट मिले थे.

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विधानसभा चुनाव 2015

सुरेंद्र सिंह (आम आदमी पार्टी)-40,133 (51.82%)

करण सिंह तंवर (बीजेपी)-28,935 (37.36%)

संदीप तंवर (कांग्रेस)-7,087(9.15%)

विधानसभा चुनाव 2013

सुरेंद्र सिंह (आम आदमी पार्टी)-26,124 (39.67%)

करण सिंह तंवर (बीजेपी)-25,769 (39.13%)

अशोक कुमार जैन(कांग्रेस)-11,988 (18.20%)

बीजेपी की चुनौती

बीजेपी 21 वर्ष से दिल्ली की सत्ता से बाहर है और वह इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि तथा हाल ही में 1731 कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर अपना मजबूत दावा ठोंकने की बात कर रही है. पार्टी का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली में तीनों नगर निगमों के चुनाव में राजधानी की जनता ने AAP को नकार दिया और इस बार लोकसभा चुनाव में उसकी स्थिति पिछले आम चुनाव से भी बदतर हुई. पार्टी कांग्रेस की सक्रियता का लाभ मिलने की उम्मीद कर रही है.

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कांग्रेस की सुरत-ए-हाल

कांग्रेस ने हाल ही में अपने पुराने नेता सुभाष चोपड़ा को कमान सौंपी है और वह सभी पुराने नेताओं को एकजुट कर पूरी सक्रियता से जुटे हैं और पार्टी का घोषणापत्र आने से पहले ही सत्ता में आने पर लोक लुभावने वादे करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस के वोट प्रतिशत में अच्छा इजाफा होता है तो केजरीवाल के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. पिछले साल मई में हुए आम चुनाव बीजेपी ने दिल्ली की सातों सीटें जीतीं थी और कांग्रेस पांच में दूसरे नंबर पर रही थी. वर्ष 2014 के आम चुनाव में सभी सातों सीटों पर दूसरे नंबर पर रहने वाली AAP इस बार केवल दो पर ही दूसरे स्थान पर रही.

बगावत और आम आदमी पार्टी

आम आदमी पार्टी के टिकट पर पिछली बार जीते कई विधायकों की मुख्यमंत्री की कार्यशैली से नाराजगी रही और उन्होंने पार्टी के खिलाफ बगावती सुर अपना लिए. इनमें सबसे चर्चित चेहरा केजरीवाल के निकटतम सहयोगी और मंत्री रहे करावल नगर विधायक कपिल मिश्रा और चांदनी चौक की विधायक अल्का लांबा का है. इसके अलावा गांधी नगर से विधायक अनिल बाजपेयी और बिजवासन के कर्नल देवेंद्र सहरावत के भी बगावती सुर रहे. बवाना से विधायक वेद प्रकाश ने इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थामा और उपचुनाव में हार गए जबकि राजौरी गार्डन से जरनैल सिंह ने इस्तीफा देकर पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ा था. यहां हुए उपचुनाव में बीजेपी के टिकट पर लड़े अकाली उम्मीदवार मनजिंदर सिंह सिरसा विजयी हुए थे. दिल्ली में आठ फरवरी को मतदान और 11 फरवरी को मतगणना होगी.

वोटिंग और मतगणना कब?

दिल्ली की पहली विधानसभा का गठन 1993 में हुआ था और इस बार यहां पर सातवां विधानसभा चुनाव कराया जा रहा है. इससे पहले राजधानी दिल्ली में मंत्रीपरिषद हुआ करती थी. दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में इस बार महज एक चरण में मतदान हो रहा है. 8 फरवरी को वोट डाले जाएंगे जबकि 11 फरवरी को मतगणना होगी. छठी दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी 2020 को समाप्त हो जाएगा.

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