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छतरपुरः वोटरों ने BJP, कांग्रेस और AAP को दिया मौका, इस बार किसे मिलेगा अवसर?

छतरपुर विधानसभा को लेकर चुनावी इतिहास देखें तो पता चलता है कि 2008 के चुनाव में कांग्रेस के बलराम तंवर को जीत मिली. मगर 2013 के चुनावों में कांग्रेस अपनी कामयाबी दोहरा नहीं पाई और बीजेपी के ब्रह्म सिंह तंवर ने विजयी हुए.

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Delhi Assembly Election 2020 (फाइल फोटो-रॉयटर्स) Delhi Assembly Election 2020 (फाइल फोटो-रॉयटर्स)

  • छतरपुर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला
  • AAP का कांग्रेस व बीजेपी से टक्कर

छतरपुर विधानसभा क्षेत्र 2008 में अस्तित्व में आया. इस सीट पर कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का एक-एक बार कब्जा रहा है. अभी सीट पर आम आदमी पार्टी का कब्जा है.

चुनावी इतिहास देखें तो पता चलता है कि 2008 के चुनाव में कांग्रेस के बलराम तंवर को जीत मिली. लेकिन 2013 के चुनावों में कांग्रेस अपनी जीत दोहरा नहीं पाई और बीजेपी के ब्रह्म सिंह तंवर ने जीत हासिल की. वहीं 2015 के चुनावों में आम आदमी पार्टी के करतार सिंह तंवर जीतने में कामयाब रहे. इस तरह इस सीट पर दिल्ली की तीनों पार्टियों के उम्मीदवार एक-एक बार जीत हासिल करने में सफल रहे.

छतरपुर विधानसभा सीट का समीकरण

दक्षिणी दिल्ली लोकसभा में आने वाले छतरपुर विधानसभा के तहत आने वाली कुल आबादी में अनुसूचित जाति का अनुपात 14.16 फीसदी है. 2019 की मतदाता सूची के मुताबिक 2,09,356 मतदाता 171 मतदान केंद्रों पर वोटिंग करेंगे. 2015 के विधानसभा चुनावों में छतरपुर विधानसभा सीट पर 67.34% वोट पड़े. इस चुनाव में बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्ट को क्रमशः 36.44%, 7.5% और 54.29% वोट मिले.

विधानसभा चुनाव 2015 के नतीजे

करतार सिंह तंवर(आम आदमी पार्टी)- 67,645 (54.29%)

ब्रह्म सिंह तंवर (बीजेपी)- 45,405    (36.44%)

बलराम तंवर (कांग्रेस)- 9,339(7.49%)

विधानसभा चुनाव 2013 के नतीजे

ब्रह्म सिंह तंवर (बीजेपी)- 49,975    (45.07%)

बलराम तंवर (कांग्रेस)- 33,851    (30.53%)

ऋषि पाल(आम आदमी पार्टी)- 22,285 (20.10%)

2013-2015 में क्या क्या हुआ था

बहरहाल, दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक एवं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के समक्ष अपना सबसे मजबूत किला बचाने की प्रबल चुनौती है.

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पिछले विधानसभा चुनाव में दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटें जीतने वाले केजरीवाल का जादू इस बार चलेगा या नहीं इस पर पूरे देश की निगाहें हैं. केजरीवाल अपने पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान विशेषकर स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को गिनाते हुए इस बार भी पूरे आत्मविश्वास में हैं जबकि राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पिछला करिश्मा दोहराना मुश्किल नजर आ रहा है.

वर्ष 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही ‘AAP’ का गठन हुआ था और उस चुनाव में दिल्ली में पहली बार त्रिकोणीय संघर्ष हुआ जिसमें 15 वर्ष से सत्ता पर काबिज कांग्रेस 70 में से केवल आठ सीटें जीत पाई जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार बनाने से केवल चार कदम दूर अर्थात 32 सीटों पर अटक गई. ‘आप’ को 28 सीटें मिली और शेष दो अन्य के खाते में रहीं.

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बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के प्रयास में कांग्रेस ने ‘AAP’ को समर्थन दिया और केजरीवाल ने सरकार बनाई. लोकपाल को लेकर दोनों पार्टियों के बीच ठन गई और केजरीवाल ने 49 दिन पुरानी सरकार से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा और फरवरी 2015 में ‘AAP’ने सभी राजनीतिक पंडितों के अनुमानों को झुठलाते हुए 70 में से 67 सीटें जीतीं. बीजेपी तीन पर सिमट गई जबकि कांग्रेस की झोली पूरी तरह खाली रह गई.    

वोटिंग और मतगणना कब?

दिल्ली की पहली विधानसभा का गठन 1993 में हुआ था और इस बार यहां पर सातवां विधानसभा चुनाव कराया जा रहा है. इससे पहले राजधानी दिल्ली में मंत्रीपरिषद हुआ करती थी. दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में इस बार महज एक चरण में मतदान हो रहा है. 8 फरवरी को वोट डाले जाएंगे जबकि 11 फरवरी को मतगणना होगी. छठी दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी 2020 को समाप्त हो जाएगा.

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