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Siwan: बाहुबली शहाबुद्दीन के इर्द-गिर्द घूमती है इस जिले की राजनीति, बदल रहा चुनावी गणित

पश्चिमी बिहार में यूपी बॉर्डर से सटे सीवान जिले की राजनीति बाहुबली शहाबुद्दीन के इर्द गिर्द घूमती है. शहाबुद्दीन वो नाम है जिसे लालू-राबड़ी शासनकाल में अपराध का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता था. सीवान जिले की आठ विधानसभा सीटों पर बाहुबली शहाबुद्दीन का पूरा प्रभाव रहता है.

तिहाड़ जेल में बंद शहाबुद्दीन फिर सुर्खियों में. तिहाड़ जेल में बंद शहाबुद्दीन फिर सुर्खियों में.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सीवान जिले की राजनीति पर शहाबुद्दीन का प्रभाव
  • जिले की आठ सीटों पर बदल रहा चुनावी गणित
  • तिहाड़ जेल में बंद शहाबुद्दीन फिर सुर्खियों में

पश्चिमी बिहार में यूपी बॉर्डर से सटे सीवान जिले की राजनीति बाहुबली शहाबुद्दीन के इर्द गिर्द घूमती है. शहाबुद्दीन वो नाम है जिसे लालू-राबड़ी शासनकाल में अपराध का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता था. सीवान जिले की आठ विधानसभा सीटों पर बाहुबली शहाबुद्दीन का पूरा प्रभाव रहता है. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 आते ही तिहाड़ जेल में बंद शहाबुद्दीन फिर सुर्खियों में है. माना जा रहा है कि जिले की सभी सीटों पर बाहुबली का प्रभाव अभी भी अच्छा खासा है. 

सीवान सदर विधानसभा 
सीवान सदर विधानसभा की बात करें, तो यहां से बीजेपी ने व्यासदेव प्रसाद का टिकट काटकर ओमप्रकाश यादव को दिया है. व्यासदेव का टिकट कटने के बाद बीजेपी में घमासान मचा हुआ है. व्यासदेव ने निर्दलीय नामांकन कर दिया है. कुशवाह वोट पर अच्छी पकड़ रखने वाले व्यासदेव वोट काटकर बीजेपी के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं. वहीं इस सीट से महागठबंधन ने अवध बिहारी चौधरी को टिकट दिया है, जो ओमप्रकाश यादव के समधी हैं. वहीं माना ये जा रहा है इस सीट पर शहाबुद्दीन का अच्छा असर रहता है. अब ये असर किस ओर करवट लेगा, ये तो भविष्य ही बताएगा. 

जीरादेई विधानसभा
जीरादेई विधानसभा क्षेत्र की अगर बात करें तो यहां NDA में ही गुटबाजी दिखाई दे रही है. मौजूदा विधायक रमेश सिंह कुशवाहा का टिकट काटकर कमला कुशवाह को दिया गया है, ऐसे में रमेश कुशवाह अब महागठबंधन को जीत दिलाने का ऐलान कर चुके हैं. वहीं बताया ये जा रहा है कि बीजेपी के स्थानीय नेता रमाकांत पाठक की बहू आभा पाण्डेय और एलजेपी के उम्मीदवार के तौर पर विनोद तिवारी एनडीए को नुकसान पहुंचा रहे हैं. भाकपा माले के अमरजीत कुशवाह जो कि अभी सीवान जेल में बंद है, लेकिन महागठबंधन का दावा है कि इस बार जीत भाकपा माले प्रत्याशी की ही होगी. 

रघुनाथपुर विधानसभा
रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र की जो सीट पिछले बार बीजेपी के खाते में थी, लेकिन इस बार यह सीट जेडीयू के खाते में चली गई है. ऐसे में बीजेपी के नेता मनोज सिंह एलजेपी का दामन थाम कर चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. NDA को मनोज सिंह खासा नुकसान पहुंचा सकते हैं. इस सीट पर लड़ाई महागठबंधन के उम्मीदवार हरिशंकर यादव से मानी जा रही है. हालांकि यहां से महागठबंधन प्रत्याशी हरिशंकर यादव बाहुबली नेता शहाबुद्दीन के करीबी माने जाते हैं, यदि ये सीट हारते हैं, तो चर्चा है कि ये हार शहाबुद्दीन की होगी. 

बड़हरिया विधानसभा
बड़हरिया विधानसभा को सीएम नीतीश कुमार के खास विधायक श्यामबहादुर सिंह का गढ़ माना जाता है. कहा जाता है कि श्यामबहादुर सिंह को हराना शेर के मुंह से निवाला निकालने की तरह है. यहां से आरजेडी ने बच्चा पाण्डेय को टिकट दिया है. बच्चा पाण्डेय बीजेपी एमएलसी टुन्ना पाण्डेय के भाई हैं. टुन्ना पांडे एनडीए में रहते हुए भी श्यामबहादुर का विरोध कर रहे हैं और अपने भाई आरजेडी प्रत्याशी बच्चा पाण्डेय के लिए खुलेआम वोट भी मांग रहे हैं.

दरौंदा विधानसभा
दरौंदा विधानसभा क्षेत्र की सीट जेडीयू से बीजेपी के खाते में चल जाने से यहां भी बगावत हो चुकी है. JDU सांसद कविता सिंह के पति अजय सिंह पिछली बार विधानसभा उपचुनाव में दरौंदा से जेडीयू उम्मीदवार बनाये गए थे. इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी कर्णजीत सिंह ने उन्हें हरा दिया था. बीजेपी ने यहां से इस बार कर्णजीत को टिकट दिया है. अजय सिंह द्वारा उनका खुलकर विरोध किया जा रहा है. इस विरोध का सीधा फायदा महागठबंधन प्रत्याशी अमरनाथ यादव को मिलता दिखाई दे रहा है. 

दरौली विधानसभा
दरौली सुरक्षित सीट है. इस सीट पर भाकपा माले का शुरू से दबदबा रहा है. इस बार वहां कोई विशेष लड़ाई नहीं देखी जा रही है. कारण ये है कि पिछली बार आरजेडी और भाकपा माले अलग अलग चुनाव लड़ीं थीं, लेकिन इस बार एक साथ हैं. ऐसे में क्षेत्र में चर्चा है कि दोनों वोट जुड़ जाने से भाकपा माले की सीट निकल सकती है. वहीं बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर रामायण मांझी हैं, जो एक बार विधायक भी रह चुके हैं. 

गोरेयाकोठी विधानसभा
गोरेयाकोठी विधानसभा की बात करें तो यहां के वर्तमान आरजेडी विधायक सत्यदेव सिंह का टिकट पार्टी ने काट कर नूतन वर्मा को महागठबंधन का उम्मीदवार बनाया है. ऐसे में सत्यदेव सिंह रालोसपा का दामन थाम कर चुनावी मैदान में कूद गए हैं, वहीं आरजेडी के रामायण चौधरी ने भी बगावत का बिगुल फूंक दिया है. माना जा रहा है कि आरजेडी को ये दोनों भाई बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिसका सीधा फायदा बीजेपी के उम्मीदवार देवेशकान्त सिंह को मिल सकता है. 

महाराजगंज विधानसभा 
महाराजगंज सीट की बात करें तो वर्तमान विधायक हेमनारायण साह JDU के उम्मीदवार फिर से बने हैं. हालांकि कुछ क्षेत्रों में इनका पुरजोर विरोध हो रहा है. इनके सामने महागठबंधन के कांग्रेस उम्मीदवार विजय शंकर दुबे हैं, जो कि सोनिया और राहुल गांधी के काफी करीबी माने जाते हैं. पिछली बार मांझी से चुनाव जीते थे, लेकिन इस बार महाराजगंज से लड़ रहे हैं. एलजेपी ने इस सीट डॉ. देवरंजन को चुनाव मैदान में उतारा है.

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