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बिहार विधानसभा चुनावः वो सीट जहां 2015 में बना था रिकॉर्ड, इस बार क्या होगा

बिहार में इस बार 3 चरणों में चुनाव में होंगे और 10 नवंबर को परिणाम आएंगे. 5 साल पहले इसी समय बिहार में चुनाव प्रचार का जोर था और सभी राजनीति दल अपने सहयोगी दलों के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में जुटे थे. 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव के बाद जब 8 नवंबर 2015 को चुनाव के नतीजे आए तो सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नतीज तरारी सीट का रहा.

क्या तरारी विधानसभा की जीत का रिकॉर्ड टूटेगा इस बार (सांकेतिक-पीटीआई) क्या तरारी विधानसभा की जीत का रिकॉर्ड टूटेगा इस बार (सांकेतिक-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में इस बार 3 चरणों में हो रहा चुनाव
  • 2015 में सबसे छोटी जीत का रिकॉर्ड तरारी में बना
  • भोजपुर जिले में पड़ता है तरारी विधानसभा सीट
  • सीपीआई के सुदामा को मिली थी रोमांचक जीत
  • 3 उम्मीदवारों को मिले थे 40 हजार से ज्यादा वोट

बिहार विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है. आजाद भारत के इतिहास में यह चुनाव अपने आप में बेहद खास होगा क्योंकि यह चुनाव महामारी के दौर में कराया जा रहा है. कोरोना का रौद्र रूप जारी है और इस खतरनाक महामारी के बीच में चुनाव होगा. ऐसे में चुनाव आयोग, राजनीतिक दल और मतदाताओं सभी के लिए यह बड़ी चुनौती होगी. खैर, अब जब चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है तो क्या 2015 का वो रिकॉर्ड इस बार के चुनाव में टूटेगा.

बिहार में इस बार 3 चरणों में चुनाव में होंगे और 10 नवंबर को परिणाम आएंगे. 5 साल पहले इसी समय बिहार में चुनाव प्रचार का जोर था और सभी राजनीति दल अपने सहयोगी दलों के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में जुटे थे. 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव के बाद जब 8 नवंबर 2015 को चुनाव के नतीजे आए तो सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नतीज तरारी सीट का रहा.

सबसे छोटी जीत 

तरारी सीट बिहार विधानसभा सीट की क्रम संख्या 196 है और यह भोजपुर जिले में पड़ती है. यह सीट चर्चा में इसलिए आई क्योंकि यहां पर हार-जीत का अंतर बेहद कम था और महज 272 मतों के अंतर से जीत मिली थी. 2015 में सबसे कम हार-जीत का अंतर वाला परिणाम यहीं रहा.

तरारी विधानसभा सीट पर 14 उम्मीदवार मैदान में थे और यहां मुख्य मुकाबला भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एम-एल), महागठबंधन और एनडीए के बीच था. महागठबंधन की ओर से यहां पर कांग्रेस तो एनडीए की ओर से लोक जनशक्ति पार्टी का उम्मीदवार मैदान में था.

कुल 2,86,054 मतदाताओं वाले तरारी विधानसभा सीट पर 1,53,002 वोट पड़े जिसमें 1,49,144 वोट वैध पाए गए. इस तरह यहां पर 53.5 फीसदी वोट पड़ा था. इन तीनों दलों के उम्मीदवारों को 40 हजार से ज्यादा वोट मिले.

सीपीआई को मिली जीत

लेकिन अंतिम दौर की लड़ाई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एम-एल) और लोक जनशक्ति पार्टी के बीच रही और जीत का फासला 272 मतों के अंतर से रह गया. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सुदामा प्रसाद को 44,050 वोट मिले तो लोक जनशक्ति पार्टी की गीता पांडे 43,778 वोट ही हासिल कर सकीं. कांग्रेस के अखिलेश 40,957 तीसरे स्थान पर रहे. खास बात यह रही कि यहां से नोटा चौथे स्थान पर रहा और उसे 3,858 वोट मिले.

2015 के चुनाव में यह सबसे छोटी हार का रिकॉर्ड (272) रहा. जबकि 2010 के चुनाव में केओटी में सबसे छोटी हार का रिकॉर्ड बना जो महज 2 अंकों तक सिमट गया था. यहां पर हार-जीत का अंतर महज 24 वोटों का रहा था.

5 साल का वक्त गुजर चुका है और फिर से चुनाव प्रचार जोर पकड़ता दिख रहा है तो ऐसे में बदले राजनीतिक हालात में सबकी नजर इस पर होगी क्या बिहार की जनता तरारी सीट का रिकॉर्ड तोड़ पाती है या नहीं. या फिर इस बार हार-जीत का नया रिकॉर्ड बनेगा.

 
 

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