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आरा विधानसभा सीट: पिछले चुनाव में सिर्फ 666 वोट से हार गई थी भाजपा, इसबार करेगी वापसी?

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं, ऐसे में नेताओं की नजर हर एक सीट पर है.

करीबी मुकाबले में हुई थी राजद की जीत करीबी मुकाबले में हुई थी राजद की जीत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में चुनावी हलचल हुई तेज
  • पिछले चुनाव में रहा था कड़ा मुकाबला

भोजपुर जिले में आने वाली आरा विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी अपनी वापसी की कोशिश करेगी. बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं, ऐसे में नेताओं की नजर हर एक सीट पर है. आरा विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन पिछले चुनाव में उसे राजद से करारी हार मिली थी. 

कौन है उम्मीदवार?
•    अमरेंद्र प्रताप सिंह – भाजपा
•    प्रवीण कुमार सिंह – रालोसपा
•    कुयामुद्दीन अंसारी – सीपीआई (एमएल)

मतदान की तिथि – पहला चरण, 28 अक्टूबर

क्या कहता है सीट का इतिहास?
आरा विधानसभा सीट भोजपुर जिले में आती है, आरा एक लोकसभा क्षेत्र भी है. 1951 में ये सीट बनी थी, तब कांग्रेस का ही कब्जा रहा था. 1969 में पहली बार कांग्रेस को हार मिली और सोशलिस्ट पार्टी यहां आई. 1972 के बाद कांग्रेस कभी यहां वापस ना आ सकी. पहले लोकदल, फिर जनता पार्टी और अंत में भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाए रखा. लगातार चार बार जीत दर्ज करने के बाद भाजपा को पिछले चुनाव में हार मिली थी. 

क्या कहता है जातीय समीकरण?
आरा इलाके में भी यादव और मुस्लिम वोटों का नतीजों पर बड़ा प्रभाव रहता है. यही कारण रहा कि पिछले चुनाव में राजद को MY फॉर्मूले तहत जीत मिल पाई थी. और इसी जातीय फॉर्मूले ने कांटे के मुकाबले में भाजपा को मात दी थी. पिछले चुनाव में इस सीट पर करीब पौने तीन लाख वोटर थे, जिसमें 1.45 लाख वोटर पुरुष थे. 

पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे?
2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू और राजद एक साथ थे, यही कारण रहा कि भाजपा के हाथ से ये सीट निकल गई थी. 2000 से 2010 तक यहां पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से विधायक रहे अमरेंद्र प्रताप सिंह को पिछले चुनाव में मात्र 666 वोट से हार मिली थी. राजद के नवाज आलम को कुल 70004 वोट मिले थे, जबकि अमरेंद्र प्रताप को  69338 वोट मिल पाए थे.

स्थानीय विधायक के बारे में
राष्ट्रीय जनता दल के मोहम्मद नवाज आलम इस सीट पर काफी वक्त से जोर आजमा रहे थे. लेकिन सफलता उन्हें पिछले चुनाव में मिली, वो भी मात्र 666 वोट से जीत मिल पाई थे. इससे पहले मोहम्मद नवाज आलम यहां पर 2005 में दोनों बार और 2010 में अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन जीत नहीं मिल पाई थी. 

 

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