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बड़हरा विधानसभा सीट: यहां आजतक नहीं जीत पाई भाजपा, RJD की नजर हैट्रिक पर

पिछले विधानसभा चुनाव में यहां पर राजद और भाजपा के बीच मुकाबला था. राजद की ओर से सरोज यादव को कुल 65 हजार के करीब वोट मिले थे. जबकि भारतीय जनता पार्टी की ओर से आशा देवी को 51 हजार वोट मिल पाए थे.

क्या राजद के हाथ आएगी जीत ? क्या राजद के हाथ आएगी जीत ?
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में विधानसभा चुनाव की हलचल
  • बड़हरा सीट पर बीजेपी को जीत का इंतजार

बिहार के भोजपुर जिला में आने वाली बड़हरा विधानसभा सीट पर फिर राष्ट्रीय जनता दल का कब्जा है. पिछले दो चुनाव में राजद को ही जीत मिल रही है, ऐसे में इस बार नजर हैट्रिक पर है. बाढ़ को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले विधासभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को जीत का खाता खोलने का इंतजार है. अभी तक बीजेपी यहां चुनाव नहीं जीत सकी है.

कौन है उम्मीदवार?
•    राघवेंद्र प्रताप सिंह – भारतीय जनता पार्टी
•    सरोज यादव – राष्ट्रीय जनता दल
•    सियामती राय – रालोसपा
•    रघुपति यादव – जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक)

मतदान की तिथि – पहला चरण, 28 अक्टूबर

क्या कहता है सीट का इतिहास?
आरा लोकसभा क्षेत्र में आने वाली इस सीट पर कभी बाप और बेटे का कब्जा होता था. 1967 के चुनाव में कांग्रेस की ओर से अंबिका शरण सिंह चुनाव जीते जो दो बार इस सीट से विधायक बने, उसके बाद उनके बेटे 1985 में यहां पर चुनाव जीते और 2000 तक लगातार चार बार इस सीट पर कब्जा जमाए रखा. 2005 में यहां से जदयू को जीत मिली, लेकिन पिछले दो चुनाव में राजद का ही कब्जा रहा है.

क्या कहता है सीट का सियासी समीकरण?
इस सीट पर ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ, बनिया जैसे समुदाय के अधिक वोटर हैं. इसके अलावा यादव, दलित और मुसलमान समाज का तबका भी बड़ी संख्या में यहां का वोटर है, यही कारण है कि राजद का MY समीकरण यहां पर काम आता है. अगर यहां वोटरों की संख्या को देखें तो तीन लाख के करीब वोटर हैं, जिनमें से 1.43 लाख पुरुष वोटर हैं.  

2015 विधानसभा चुनाव के क्या रहे नतीजे?
पिछले विधानसभा चुनाव में यहां पर राजद और भाजपा के बीच मुकाबला था. राजद की ओर से सरोज यादव को कुल 65 हजार के करीब वोट मिले थे. जबकि भारतीय जनता पार्टी की ओर से आशा देवी को 51 हजार वोट मिल पाए थे. आशा देवी इससे पहले जदयू की ओर से इस सीट पर चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन पिछले चुनाव में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया. पिछले विधानसभा चुनाव में यहां 51 फीसदी मतदान हुआ था. 

विधायक के बारे में?
सरोज यादव कई बार सुर्खियों में रह चुके हैं. जब 2015 में राजद और जदयू की सरकार बनी थी, तो कुछ ही वक्त के बाद अपनी ही सरकार के खिलाफ सरोज यादव धरने पर बैठ गए थे. आरोप लगाया कि अफसर भ्रष्ट हैं और काम नहीं कर रहे हैं. इसके अलावा एक बार विधायक के पास दस लाख रुपये की रंगदारी मांगने का फोन आया था, जिस वक्त उन्होंने सुर्खियां बटोरी थीं. उनपर स्थानीय जिले में कुछ भी दर्ज हैं.  


 

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