सीतापुर उत्तर प्रदेश का एक जिला स्तरीय शहर और सीतापुर जिले का मुख्यालय है. इस शहर की ऐतिहासिक और पौराणिक जड़ें काफी गहरी हैं. स्थानीय परंपरा के अनुसार, राजा विक्रमादित्य ने पहली शताब्दी ईसा पूर्व में इस बस्ती की स्थापना की थी और भगवान राम की पत्नी सीता के नाम पर इसका नाम सीतापुर रखा था. सदियों के दौरान यह अवध के एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ. आज भी यह जिले के आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए प्रमुख शहरी केंद्र बना हुआ है.
स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनावों के साथ हुए 1951 के परिसीमन के दौरान सीतापुर विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया था. यह एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और सीतापुर लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन में इसकी सीमाओं का पुनर्गठन किया गया और अब इसमें सीतापुर तथा खैराबाद नगर पालिका बोर्ड का पूरा क्षेत्र, सीतापुर सदर, खैराबाद और अलीया कानूनगो सर्किल के ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं. इस विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप अर्ध-शहरी है.
सीतापुर ने 1952 से राज्य में हुए सभी 18 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है. 1952 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुआ था. भाजपा यहां सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत रही है और उसने यह सीट नौ बार जीती है, जिसमें उसकी पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ की दो जीत भी शामिल हैं. कांग्रेस पार्टी और समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर चार-चार बार जीत दर्ज की है. कांग्रेस पार्टी की जीत शुरुआती दशकों में लगातार दो कार्यकाल के रूप में आई, जबकि समाजवादी पार्टी के चार कार्यकाल 1996 से 2012 के बीच लगातार चार चुनावों में रहे. इससे पहले भाजपा ने लगातार पांच जीत दर्ज की थीं. भाजपा का गठन 1980 में हुआ था, जब तत्कालीन जनसंघ के सदस्य जनता पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी बनाने के लिए बाहर आए थे.
व्यक्तिगत उम्मीदवारों में राजेंद्र कुमार गुप्ता ने यह सीट छह बार जीती. उन्होंने 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की और इसके बाद लगातार पांच चुनाव भाजपा के उम्मीदवार के रूप में जीते. इस तरह उन्होंने लगातार छह जीत दर्ज कीं. राधे श्याम जायसवाल ने समाजवादी पार्टी के लिए लगातार चार कार्यकाल जीते.
2012 में राधे श्याम जायसवाल ने समाजवादी पार्टी के लिए अपना लगातार चौथा कार्यकाल जीता. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के अयूब खान को 10,298 वोटों से हराया, जबकि भाजपा तीसरे स्थान पर रही.
24 साल के अंतराल के बाद भाजपा ने यह सीट फिर हासिल की. भाजपा के उम्मीदवार राकेश राठौर ने समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक राधे श्याम जायसवाल को 24,839 वोटों से हराया. 2022 में भाजपा ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण राकेश राठौर को टिकट नहीं दिया और उनकी जगह उनके हमनाम राकेश राठौर गुरु को उम्मीदवार बनाया, जो पेशे से कार मैकेनिक थे. उन्होंने केवल 1,253 वोटों के बेहद मामूली अंतर से भाजपा के लिए यह सीट बरकरार रखी. राठौर को 99,349 वोट मिले, जबकि राधे श्याम जायसवाल को 98,096 वोट मिले.
सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनाव के मतदान रुझान बताते हैं कि यहां के मतदाताओं ने अलग-अलग दलों को मौका दिया है. 2009 में कांग्रेस पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी पर 6,208 वोटों की बढ़त बनाई थी, जबकि समाजवादी पार्टी और भाजपा क्रमश: तीसरे और चौथे स्थान पर रही थीं. पांच साल बाद तस्वीर बदल गई और 2014 में भाजपा ने बहुजन समाज पार्टी पर 22,139 वोटों की बढ़त बना ली. 2019 में बहुजन समाज पार्टी पर उसकी बढ़त घटकर 15,667 वोट रह गई.
2024 में एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला. पूर्व भाजपा विधायक राकेश राठौर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और उन्हें सीतापुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया. उन्होंने भाजपा के खिलाफ बाजी पलट दी. राकेश राठौर को 109,249 वोट मिले, जबकि उनके भाजपा प्रतिद्वंद्वी राजेश वर्मा को 92,923 वोट मिले. इस तरह कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा क्षेत्र में 16,326 वोटों की बढ़त बनाई और अंतत: सीतापुर लोकसभा सीट जीत ली.
सीतापुर में पिछले कुछ वर्षों में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 342,103 से बढ़कर 2017 में 378,839, 2019 में 387,587, 2022 में 399,503 और 2024 में 403,591 हो गई. मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2012 में मतदान 57.53 प्रतिशत रहा और 2017 में बढ़कर 61.83 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 57.03 प्रतिशत रह गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 58.30 प्रतिशत हुआ. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत और घटकर 54.65 प्रतिशत रह गया.
सीतापुर एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी की भी अच्छी संख्या है. मुस्लिम मतदाता 23.40 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी 25.77 प्रतिशत है. बाकी मतदाताओं में विभिन्न ओबीसी समुदाय शामिल हैं, जिनमें खास तौर पर कुर्मी और अन्य पिछड़ी जातियां शामिल हैं. इसके अलावा ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य जैसे सवर्ण समूह भी यहां मौजूद हैं. ये समुदाय विधानसभा क्षेत्र के शहरी और अर्ध-शहरी हिस्सों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं. इस सीट का सामाजिक स्वरूप मिश्रित है, जहां 56.04 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 43.96 प्रतिशत आबादी शहरी है.
सीतापुर का संबंध पारंपरिक रूप से रामायण से जोड़ा जाता है. स्थानीय मान्यता है कि भगवान राम के वनवास के दौरान सीता इस क्षेत्र में उनके साथ रही थीं. सदियों बाद प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य ने उनके सम्मान में इस बस्ती की स्थापना की थी, ऐसा माना जाता है. भारतीय परंपरा में विक्रमादित्य को एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है. उन्हें वर्तमान मध्य प्रदेश में स्थित उज्जैन का शक्तिशाली शासक माना जाता है और उनका संबंध विक्रम संवत कैलेंडर से भी जोड़ा जाता है. लोककथाओं में उन्हें बुद्धिमत्ता और वीरता के आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.
मध्यकाल में यह क्षेत्र बड़े अवध क्षेत्र का हिस्सा था. अकबर के शासनकाल में आईन-ए-अकबरी में इसका उल्लेख चत्यापुर या चितियापुर के रूप में मिलता है. पास ही स्थित नैमिषारण्य, जो गोमती नदी के किनारे है, लंबे समय से वैदिक शिक्षा और हिंदू तीर्थस्थल के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में माना जाता रहा है.
अवध के नवाबों के शासन के दौरान यह क्षेत्र खैराबाद सरकार के हिस्से के रूप में प्रशासित होता था. 1856 में अंग्रेजों द्वारा अवध का विलय किए जाने के बाद सीतापुर को एक नए जिले का मुख्यालय चुना गया. तब से यह क्षेत्र का प्रमुख प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्र बना हुआ है.
व्यापक सीतापुर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में आज भी कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है. गेहूं, धान, दालें, गन्ना, सरसों और मूंगफली यहां की प्रमुख फसलों में शामिल हैं. कृषि आधारित उद्योगों, खासकर चीनी, चावल और आटा मिलों से रोजगार मिलता है. इसके अलावा जिले का संबंध लंबे समय से हथकरघा और कालीन बनाने के काम से भी रहा है. खैराबाद समेत जिले के कुछ हिस्सों की सूती और ऊनी दरियां पारंपरिक रूप से क्षेत्र के बाहर भी जानी जाती रही हैं.
विधानसभा क्षेत्र और जिला व्यापक गोमती नदी तंत्र का हिस्सा हैं. गोमती नदी सीतापुर जिले की दक्षिणी और पश्चिमी सीमा के एक हिस्से का निर्माण करती है. सरायन, कठना, चौका और कई छोटी नदियां तथा जलधाराएं जिले के अलग-अलग हिस्सों में जल निकासी का काम करती हैं.
सीतापुर सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यह लखनऊ से लगभग 89 किलोमीटर, अयोध्या से करीब 170 किलोमीटर, लखीमपुर खीरी से 45 किलोमीटर, हरदोई से 72 किलोमीटर, शाहजहांपुर से 80 किलोमीटर, कानपुर से 163 किलोमीटर, बरेली से 170 किलोमीटर और नई दिल्ली से करीब 411 किलोमीटर दूर है.
2022 के विधानसभा चुनाव के बाद सीतापुर की राजनीति में काफी बदलाव आया है. भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक राकेश राठौर से दूरी बना ली. इसके बाद राकेश राठौर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की स्थिति मजबूत की. कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में लोकसभा चुनाव लड़ा और विधानसभा क्षेत्र में अच्छी बढ़त हासिल की.
इस बीच भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए राकेश राठौर गुरु को टिकट दिया था. पेशे से कार मैकेनिक राकेश राठौर गुरु ने केवल 1,253 वोटों के अंतर से सीट जीत ली. बाद में उन्हें योगी आदित्यनाथ सरकार में कनिष्ठ मंत्री बनाया गया. राकेश राठौर को 2025 में एक महिला की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया था. महिला ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था. उन्होंने कुछ समय हिरासत में बिताया और बाद में उन्हें जमानत मिल गई.
यह कहना मुश्किल है कि ये घटनाक्रम भाजपा को सीतापुर विधानसभा सीट बरकरार रखने में मदद करेंगे या उसके खिलाफ जाएंगे, जैसा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में हुआ था. इतना तय है कि सीतापुर में अगला विधानसभा चुनाव सामान्य चुनाव से अलग नजर आ सकता है. एक ओर राकेश राठौर अब कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा में सीतापुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा के पास उनके हमनाम राकेश राठौर गुरु के रूप में विधानसभा सीट है. ऐसे में इस मुकाबले में व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों तरह के समीकरण दिखाई दे सकते हैं. यह पहले से ही दिलचस्प नजर आ रहे चुनाव को और चर्चा में ला सकता है.
(अजय झा)
Radhey Shyam Jaiswal
SP
Khurshid Ansari
BSP
Saket Mishra
IND
Shamina Shafiq
INC
Nota
NOTA
Rupendra Kumar
IND
Azaan
IND
Rakesh
IND
Anand Jaiswal
AAAP
Pankaj Mishra
IND
Dr. Babu Ram Gautam
AIPF
Dinesh Kumar Jaiswal
IND
Ramshankar
SDU
Satyendra Kumar
BSRD
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