साहिबाबाद, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में स्थित गाजियाबाद शहर का एक प्रमुख इलाका है, जो औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्र के तौर पर जाना जाता है. दिल्ली की पूर्वी सीमा पर बसा और दिल्ली के ट्रांसपोर्ट हब 'आनंद विहार' के पास स्थित यह इलाका असल में राष्ट्रीय राजधानी के विस्तार के तौर पर काम करता है. इसे मुख्य रूप से दिल्ली में भीड़ कम करने के मकसद से बसाया गया था.
साहिबाबाद एक सामान्य (अनरिजर्व्ड) विधानसभा क्षेत्र है और गाजियाबाद लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. इसमें गाजियाबाद नगर निगम के 18 वार्ड और लोनी कानूनगो सर्कल के अर्थला और मकानपुर इलाके शामिल हैं.
यह इलाका दो नेताओं- सुनील कुमार शर्मा और अमरपाल शर्मा के बीच चुनावी अखाड़ा बन गया है, क्योंकि वे अब तक हुए तीनों विधानसभा चुनावों में एक-दूसरे के आमने-सामने रहे हैं. 2012 में अमरपाल शर्मा जीते. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लिए यह सीट जीती और BJP के सुनील कुमार शर्मा को 24,348 वोटों से हराया. 2017 में नतीजे पलट गए और सुनील कुमार शर्मा ने BJP के लिए यह सीट जीती. उन्होंने अमरपाल शर्मा (उस वक्त कांग्रेस में) को 1,50,685 वोटों के बड़े अंतर से हराया. सुनील कुमार शर्मा की जीत का अंतर और बढ़कर 2,14,835 वोट हो गया. उन्होंने BJP के लिए यह सीट बरकरार रखी और इस बार समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे अमरपाल शर्मा को हराया.
साहिबाबाद इलाके पर BJP की मजबूत पकड़ लोकसभा चुनावों में भी दिखी, जहां BJP ने सभी चार संसदीय चुनावों में बढ़त बनाई. पार्टी ने 2009 में कांग्रेस से 41,056 वोट, 2014 में 2,09,688 वोट और 2019 में समाजवादी पार्टी से 2,59,712 वोटों की बढ़त हासिल की. 2024 में कांग्रेस पार्टी के मुकाबले BJP की बढ़त थोड़ी कम होकर 1,91,184 वोट रह गई. BJP के अतुल गर्ग को 3,11,036 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की डॉली शर्मा को 1,19,852 वोट मिले. साहिबाबाद में वोटरों की संख्या बहुत ज्यादा है और हर चुनाव के साथ यह बढ़ती ही जा रही है. यहां वोटरों की कुल संख्या खुद गाजियाबाद शहर से भी दोगुनी से ज्यादा है, जो दिल्ली और दूसरी जगहों से लोगों के बड़े पैमाने पर यहां बसने को दिखाता है, क्योंकि इस इलाके में नई रिहायशी इमारतें और कॉम्प्लेक्स बन रहे हैं. साहिबाबाद में रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या 2012 में 676,637, 2017 में 865,641, 2019 में 948,785, 2022 में 1,021,035 और 2024 में 1,054,464 थी.
हालांकि, वोटिंग का प्रतिशत बहुत कम रहा है, जो शहरी उदासीनता और इस बात को दिखाता है कि दिल्ली से आए लोग अभी तक उत्तर प्रदेश की राजनीति से पूरी तरह जुड़ नहीं पाए हैं. यह 2012 में 49.31 प्रतिशत, 2017 में 49.20 प्रतिशत, 2019 में 49.55 प्रतिशत, 2022 में 47.18 प्रतिशत था और 2024 में गिरकर 42.82 प्रतिशत के चिंताजनक स्तर पर आ गया.
साहिबाबाद उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्रों में से एक है क्योंकि यहां रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या बहुत ज्यादा है और लगातार बढ़ रही है. ज्यादातर वोटर इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा और कौशांबी जैसे ऊंची इमारतों वाले और मेट्रोपॉलिटन इलाकों में रहते हैं. यह मुख्य रूप से एक शहरी सीट है जहां जाति और समुदाय का समीकरण मायने नहीं रखता, क्योंकि जो लोग वोट देने आते हैं, वे अपनी जाति या समुदाय के सदस्य के बजाय किसी पार्टी को वोट देते हैं.
साहिबाबाद को दिल्ली बॉर्डर पर होने का खास फायदा मिलता है, जिससे यह असल में दिल्ली का ही एक इलाका बन गया है. यह सुनियोजित टाउनशिप स्थानीय किसानों से जमीन लेकर बनाई गई थी. यहां के उद्योगों के अलावा, बढ़ती आबादी और दिल्ली की तरफ रहने वाले लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कई मॉल, होटल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भी बन गए हैं. यह सड़कों और उन सभी एक्सप्रेसवे से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है जो दिल्ली को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और उससे आगे के इलाकों से जोड़ते हैं. यहां दिल्ली मेट्रो नेटवर्क और दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) की सुविधाएं उपलब्ध हैं और इसका अपना रेलवे स्टेशन भी है. साथ ही, पूर्वी दिल्ली का आनंद विहार टर्मिनल भी पास ही है, जहां से कई लंबी दूरी की ट्रेनें और बसें चलती हैं. दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हाल ही में खुला नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अपेक्षाकृत छोटा हिंडन एयरपोर्ट भी साहिबाबाद के पास हैं और यहां से आसानी से पहुंचा जा सकता है. इसके अलावा, दिल्ली से हटाई गई कई थोक बाजार भी इसके आस-पास ही स्थित हैं.
साहिबाबाद दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, मोदीनगर, बुलंदशहर, मेरठ और सहारनपुर से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. बहुत से लोग रोजाना काम के सिलसिले में दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा आते-जाते हैं. जिला मुख्यालय गाजियाबाद यहां से लगभग 18 किमी दूर है. हापुड़ लगभग 45 किमी, मोदीनगर करीब 30 किमी, बुलंदशहर लगभग 60 किमी, मेरठ करीब 70 किमी, सहारनपुर लगभग 140 किमी, हरिद्वार करीब 180 किमी और देहरादून लगभग 220 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 450 किमी दूर है.
साहिबाबाद में बीजेपी विपक्ष से काफी आगे दिख रही है और 2027 के चुनावों में यह सीट जीतने की मजबूत स्थिति में है. पार्टी ने पिछले दो विधानसभा चुनाव बड़े अंतर से जीते हैं. समाजवादी पार्टी ने यह सीट कभी नहीं जीती है, और बीएसपी, जिसने 2012 में यह सीट जीती थी, अकेले चुनाव लड़ रही है और दूसरों का खेल बिगाड़ने की कोशिश में है. इन बातों से बीजेपी को साफ फ़ायदा मिल रहा है. संक्षेप में कहें तो, 2027 के चुनावों में यह सीट बीजेपी के हाथ से तभी निकल सकती है जब वह खुद कोई बड़ी गलती करे.
(अजय झा)
Amarpal Sharma
SP
Ajit Kumar Pal
BSP
Sangeeta Tyagi
INC
Chhavi Yadav
AAAP
Manmohan Jha
AIMIM
Nota
NOTA
Smt. Geetanjali
IND
Vijay Kumar
IND
Sujit Tiwari
SBSPSP
Bhupendra Nath
JANADIP
Anima Ojha
RTORP
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