पुरकाजी, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का एक छोटा सा शहर है जहां नगर पंचायत है. इसकी सीमा उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से लगती है. यह राज्य के पश्चिमी हिस्से में स्थित है और उपजाऊ 'अपर दोआब' क्षेत्र का हिस्सा है. यह शहर अपने गहरे ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है. पुरकाजी का 'सुलिवाला बाग' वह जगह है जहां 1857 की आजादी की पहली लड़ाई के दौरान अंग्रेज़ों ने लगभग 500 स्वतंत्रता सेनानियों को एक साथ फांसी दी थी.
पुरकाजी, अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित विधानसभा सीट है और बिजनौर लोकसभा क्षेत्र के पांच हिस्सों में से एक है. यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद बनाई गई थी और यहां पहला चुनाव 2012 में हुआ था. इसके मौजूदा इलाके में मुजफ्फरनगर तहसील के तहत आने वाले मुजफ्फरनगर, शेरपुर, छपार, बागवाली, सिसोना, बढेड़ी, बिजौप्रा, खुड्डा, खामपुर, बरला और पुरकाजी नगर पंचायत के कानूनगो सर्कल शामिल हैं.
बनने के बाद से ही इस सीट पर पार्टियों का दबदबा बदलता रहा है. यहां के नतीजे आमतौर पर उम्मीदवारों की पर्सनैलिटी, SC समुदाय के समीकरण और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की व्यापक राजनीतिक लहरों से तय होते हैं.
पुरकाजी में अब तक तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. 2012 में BSP जीती, जब अनिल कुमार ने कांग्रेस के दीपक कुमार को 8,908 वोटों से हराया. 2017 में BJP ने यह सीट जीती. प्रमोद उत्वाल ने कांग्रेस उम्मीदवार दीपक कुमार को 11,253 वोटों से हराया, जबकि मौजूदा BSP विधायक अनिल कुमार तीसरे स्थान पर रहे. 2022 में अनिल कुमार RLD में शामिल हो गए और मौजूदा BJP विधायक प्रमोद उत्वाल को 6,532 वोटों से हराकर सीट जीती. अनिल कुमार को 92,672 वोट मिले, जबकि प्रमोद उत्वाल को 86,140 वोट मिले.
बिजनौर संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले पुरकाजी हिस्से में लोकसभा चुनावों में भी इसी तरह के उतार-चढ़ाव देखे गए हैं. 2009 में, BSP ने RLD पर 2,088 वोटों के मामूली अंतर से बढ़त बनाई थी. 2014 में BJP ने समाजवादी पार्टी पर 37,621 वोटों की बड़ी बढ़त बनाई थी. 2019 में, BSP ने फिर से BJP पर 19,436 वोटों की बढ़त हासिल की. 2024 में, RLD (जो अब BJP के साथ गठबंधन में है) ने समाजवादी पार्टी पर 11,969 वोटों से बढ़त बनाई. RLD के चंदन चौहान को 77,298 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के दीपक सैनी को 65,329 वोट मिले.
पुरकाजी में वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 281,311 रजिस्टर्ड वोटर थे और वोटिंग प्रतिशत 59.53% था. यह संख्या 2017 में बढ़कर 313,968 (वोटिंग 65.08%), 2019 में 324,340 (वोटिंग 66.65%) और 2022 में 329,110 (वोटिंग 65.35%) हो गई. 2024 के लोकसभा चुनावों में, वोटरों की संख्या 334,796 थी और वोटिंग प्रतिशत 60.08% रहा.
2011 की जनगणना के अनुमानों के अनुसार, इस इलाके में अनुसूचित जाति की आबादी काफी ज्यादा है (कुल वोटरों का लगभग 35%), जो इसके आरक्षित सीट होने के अनुरूप है. इसके अलावा यहां हिंदू बहुसंख्यक हैं और अन्य समुदाय भी रहते हैं. यह सीट मुख्य रूप से ग्रामीण है, और पुरकाजी शहर के आसपास ही थोड़ा शहरी इलाका है.
पुरकाजी के इतिहास में 1857 की आजादी की पहली लड़ाई का एक दर्दनाक लेकिन गर्व भरा अध्याय जुड़ा है. पुरकाजी शहर में स्थित 'सूलिवाला बाग' (जिसे 'गार्डन ऑफ गैलोज' या फांसी का बाग भी कहा जाता है) लगभग 500 स्वतंत्रता सेनानियों को एक साथ फांसी दिए जाने की घटना का मूक गवाह है. ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह में शामिल होने के कारण, अंग्रेज कलेक्टर के आदेश पर औपनिवेशिक ब्रिटिश अधिकारियों ने उन्हें फांसी दी थी. आज भी, बाग में मौजूद कुछ पुराने पेड़ों के बारे में माना जाता है कि इन्हीं पर शहीदों को फांसी दी गई थी. स्थानीय लोग लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि सुलीवाला बाग को राष्ट्रीय 'शहीद स्थल' घोषित किया जाए. 2017 से, यह शहर इन बलिदानों के सम्मान में हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस मनाता आ रहा है.
पुरकाजी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है. यहां गन्ना मुख्य फसल है और इसकी खेती के लिए नहरों से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है. यह क्षेत्र गांवों और स्थानीय बाजारों के एक समूह के रूप में विकसित हुआ है, जहां आजादी के बाद भी खेती और उससे जुड़े काम ही मुख्य हैं. समय के साथ खेती से अलग रोजगार के अवसर धीरे-धीरे बढ़े हैं.
भौगोलिक दृष्टि से, पुरकाजी समतल और उपजाऊ दोआब क्षेत्र में स्थित है, जो कई तरह की फसलों के लिए बहुत उपयुक्त है. नहरों से सिंचाई खेती में मदद करती है, जबकि स्थानीय बाजार और खेती से जुड़े कुछ काम अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं. चुनावों के दौरान सिंचाई, बिजली की आपूर्ति, गन्ने की कीमत और ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे अक्सर उठते रहते हैं.
बुनियादी ढांचे में वे जिला सड़कें शामिल हैं जो गांवों को पुरकाजी शहर और मुजफ्फरनगर से जोड़ती हैं. सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन मुजफ्फरनगर में है. यहां स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और स्थानीय बाजार मौजूद हैं, लेकिन वोटर अक्सर बेहतर सड़कों, जल निकासी, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सुविधाओं की मांग करते हैं.
पुरकाजी जिला मुख्यालय मुजफ्फरनगर से 29 किमी दूर है. मेरठ 65 किमी, सहारनपुर 65 किमी, शामली 45 किमी, पानीपत (हरियाणा) 75 किमी, बागपत 85 किमी, रुड़की 55 किमी, सोनीपत (हरियाणा) 95 किमी, गाजियाबाद 115 किमी, नोएडा 125 किमी और दिल्ली 125 किमी दूर हैं. NH-58 (दिल्ली-देहरादून हाईवे) पर स्थित पुरकाजी, उत्तराखंड के हरिद्वार से 56 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ यहां से लगभग 450 किमी दूर है.
राजनीतिक नजरिए से देखें तो 2027 के विधानसभा चुनाव में पुरकाजी सीट पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है. अभी यह सीट राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के पास है. मौजूदा विधायक अनिल कुमार योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री हैं और RLD अब NDA गठबंधन का हिस्सा है, इसलिए चाहे BJP उम्मीदवार उतारे या RLD, सत्ताधारी गठबंधन को साफ बढ़त हासिल है. अनुसूचित जाति के वोटरों के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) का दबदबा बना हुआ है, जबकि समाजवादी पार्टी (SP) NDA को कड़ी टक्कर दे सकती है. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस ग्रामीण सीट पर, जहां गन्ने की खेती आजीविका का मुख्य आधार है, चुनाव का नतीजा काफी हद तक टिकट बंटवारे, स्थानीय जातिगत समीकरणों और किसानों, सिंचाई व युवाओं के रोजगार जैसे अहम मुद्दों को हल करने की पार्टियों की क्षमता पर निर्भर करेगा.
(अजय झा)
Pramod Utwal
BJP
Surendra Pal Singh
BSP
Uma Kiran
ASPKR
Deepak Kumar
INC
Nota
NOTA
Mukesh Kumar
IND
Kavita
BMUP
Neelam Devi
IND
Anil Kumar
AAAP
Suneel Kumar
IND
Sunita
MKUP
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