जेवर, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले का एक कस्बा और नगर पंचायत है. यह जिले की तीन तहसीलों (सब-डिविजन) में से एक है और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र का हिस्सा है. यह मुख्य रूप से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए जाना जाता है, जो जून 2026 में चालू हुआ था.
1962 के चुनावों से पहले बनी जेवर सीट 2007 तक अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित थी. परिसीमन आयोग के बदलावों के बाद, 2012 के चुनावों से यह एक सामान्य, अनारक्षित सीट बन गई है. यह गौतम बुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. इसमें पूरी जेवर तहसील, गौतम बुद्ध नगर तहसील की बिलासपुर और दनकौर नगर पंचायतें और कई आस-पास के गांव शामिल हैं, जिससे इसका स्वरूप काफी हद तक ग्रामीण है.
जेवर में अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. शुरुआती दशकों में यह सीट कभी किसी एक पार्टी के पक्ष में नहीं रही (स्विंग सीट थी), लेकिन बाद में यहां बीजेपी और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) का लंबे समय तक दबदबा रहा. अब तक बीजेपी यहां पांच बार जीती है, जबकि कांग्रेस और बीएसपी तीन-तीन बार जीती हैं. भारतीय क्रांति दल दो बार जीता. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी और जनता दल ने एक-एक बार यह सीट जीती है.
वेदराम भाटी ने बीएसपी के लिए लगातार तीसरा कार्यकाल जीता (पहला 2012 में), जिसमें उन्होंने कांग्रेस पार्टी के धीरेंद्र सिंह को 9,500 वोटों से हराया. उस साल चौथे स्थान पर रही बीजेपी ने 2017 में अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए जेवर सीट जीती. उनके उम्मीदवार धीरेंद्र सिंह थे, जो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. सिंह ने मौजूदा बीएसपी विधायक वेदराम भाटी को 22,173 वोटों से हराया और 2022 में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के अवतार सिंह भड़ाना के खिलाफ 56,315 वोटों के बड़े अंतर से सीट बरकरार रखी. सिंह को 117,205 वोट मिले, जबकि भड़ाना को 60,890 वोट मिले.
जेवर विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग का ट्रेंड संसदीय चुनावों में भी वैसा ही दिखता है. 2009 में यहां BSP ने BJP पर 23,954 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में BJP ने समाजवादी पार्टी पर 7,579 वोटों की बढ़त हासिल की. 2019 में BSP पर 7,259 वोटों की मामूली बढ़त बनाए रखी और 2024 में समाजवादी पार्टी पर अपनी बढ़त को बढ़ाकर 73,531 वोट कर लिया. 2024 में, BJP के डॉ. महेश शर्मा को इस लोकसभा क्षेत्र में 104,759 वोट मिले, जबकि उनके समाजवादी पार्टी के प्रतिद्वंद्वी डॉ. महेंद्र सिंह नागर को 31,228 वोट मिले.
विकास और शहरी विस्तार के साथ जेवर के मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. यहां रजिस्टर्ड मतदाताओं की संख्या 2012 में 287,711, 2017 में 322,998, 2019 में 333,537, 2022 में 352,164 और 2024 में 369,824 थी. वोटिंग प्रतिशत आम तौर पर संतोषजनक रहा है- 2012 में 62.05%, 2017 में 65.46%, 2019 में 64.72% और 2022 में 65.94%, लेकिन 2024 में यह घटकर 55.04% हो गया.
जेवर हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है. यहां मुख्य वोटर ग्रुप गुर्जर, जाट और जाटव (अनुसूचित जाति) हैं. अनुसूचित जाति के लोग यहां के कुल मतदाताओं का लगभग 21.10% हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में यहां मुसलमानों की आबादी कम है. यह सीट मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां लगभग 71.91% मतदाता ग्रामीण और 28.09% शहरी हैं.
जेवर ग्रेटर नोएडा-आगरा कॉरिडोर में यमुना के पश्चिमी किनारे पर स्थित है और जलोढ़ मैदान (Alluvial plain) में बसा है, जहां लंबे समय से खेती स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार रही है. ग्रेटर नोएडा को आगरा से जोड़ने वाले यमुना एक्सप्रेसवे के बनने और जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से बदलाव की रफ्तार तेज हुई है. इससे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन उपलब्ध हुई है और इंडस्ट्रियल बेल्ट, स्पेशल इकोनॉमिक जोन, प्रस्तावित फिल्म सिटी और बहुमंजिला रिहायशी व कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में निवेश बढ़ा है. यमुना एक्सप्रेसवे और जेवर को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, अलीगढ़ और उससे आगे जोड़ने वाले स्टेट हाईवे से सड़क संपर्क बेहतर हुआ है, जबकि नए एयरपोर्ट ने स्थानीय विकास की दिशा बदली है और बेहतर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय हवाई संपर्क का वादा किया है. एयरपोर्ट और शहर के लिए रेल और मेट्रो लिंक का प्रस्ताव रखा गया है और वे योजना के अलग-अलग चरणों में हैं. एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और उससे जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण से कई किसानों को अच्छा मुआवजा मिला और कुछ लोगों के लिए यह आर्थिक रूप से बहुत फायदेमंद साबित हुआ, जबकि लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, एविएशन से जुड़ी सेवाओं और रियल एस्टेट की ओर झुकाव के साथ लोगों की आजीविका और जमीन के इस्तेमाल के तरीके भी बदलने लगे.
दूरी के लिहाज से देखें तो ग्रेटर नोएडा, जेवर के मुख्य इलाके से लगभग 25 किमी, नोएडा लगभग 45 किमी, गाजियाबाद लगभग 70 किमी, बुलंदशहर लगभग 45 किमी, अलीगढ़ और मेरठ दोनों लगभग 95 किमी, आगरा यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए लगभग 125 किमी, दिल्ली रास्ते के आधार पर लगभग 70-90 किमी और राज्य की राजधानी लखनऊ सड़क मार्ग से लगभग 520 किमी दूर है.
2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही बीजेपी के पक्ष में जेवर का इतिहास रहा है. पार्टी ने 2014 के बाद से यहां सभी चुनावों में बढ़त बनाई है, 2017 से लगातार दो विधानसभा चुनाव जीते हैं और 2014 के बाद से तीन लोकसभा चुनावों में भी आगे रही है. RJD के सहयोगी के तौर पर लौटने से स्थानीय स्तर पर BJP का सामाजिक गठबंधन और मजबूत होने की उम्मीद है. वहीं, BSP का 2027 के चुनाव अकेले लड़ने का फैसला BJP-विरोधी वोटों को और बांट सकता है और मौजूदा सरकार को हटाने की समाजवादी पार्टी की कोशिशों को मुश्किल बना सकता है. ऐसे में, जब तक विपक्ष स्थानीय स्तर पर मजबूत चुनौती पेश नहीं करता, BJP की जीत की संभावना सबसे ज्यादा बनी रहेगी.
(अझय झा)
Avtar Singh Bhadana
RLD
Narender Kumar
BSP
Manoj
INC
Nota
NOTA
Sunil Gautam
IND
Veer Singh
IND
Poonam
AAAP
Dhaniram
IND
Neeru Walia
SVSAP
Vijay
IND
Trilok Chand Sharma
IND
Manoj Kumar Sharma
LOKJANP
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