हस्तिनापुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक ब्लॉक-लेवल का शहर है, जहां अपना म्युनिसिपल बोर्ड है. आज भले ही यह छोटा हो, लेकिन महाभारत काल में कुरु वंश की राजधानी होने के कारण यह पूरे देश में मशहूर है.
हस्तिनापुर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट है और बिजनौर लोकसभा क्षेत्र के पांच हिस्सों में से एक है. इसे 1956 में परिसीमन आयोग के आदेश से बनाया गया था और यहां पहली बार 1957 में चुनाव हुए थे. 1991 और 1993 के चुनावों के लिए इस सीट को खत्म कर दिया गया था, लेकिन 1996 के चुनावों से पहले इसे फिर से शुरू किया गया.
हस्तिनापुर में अब तक 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. पहले दौर में, 1957 से 1989 के बीच, इस सीट पर कांग्रेस पार्टी का दबदबा रहा और उसने नौ में से छह चुनाव जीते. इस दौरान भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी और जनता दल ने एक-एक बार जीत हासिल की. 1996 के बाद से, बीजेपी और समाजवादी पार्टी ने दो-दो बार जीत हासिल की है, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार और बहुजन समाज पार्टी ने एक-एक बार जीत दर्ज की है.
2012 में, समाजवादी पार्टी के प्रभु दयाल बाल्मीकि ने पीस पार्टी के योगेश वर्मा को 6,641 वोटों से हराया. 2017 में बीजेपी ने मजबूत वापसी की और उसके उम्मीदवार दिनेश खटीक ने योगेश वर्मा को 36,062 वोटों से हराया. उस समय वर्मा बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे. 2022 में दिनेश खटीक ने फिर से यह सीट जीती और समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ रहे योगेश वर्मा को 7,312 वोटों से हराया. खटीक को 107,587 वोट मिले, जबकि वर्मा को 100,275 वोट मिले. योगेश वर्मा के नाम यह अनोखा रिकॉर्ड है कि वे तीन अलग-अलग पार्टियों के टिकट पर लड़े तीनों चुनावों में दूसरे स्थान पर रहे.
लोकसभा चुनावों के दौरान हस्तिनापुर क्षेत्र में वोटिंग का ट्रेंड काफी बदलता रहा है. 2009 में, राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) पर 6,424 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में BJP ने BSP पर 45,582 वोटों की बड़ी बढ़त बनाई थी. 2019 में BSP ने इसका जवाब दिया और BJP से 5,743 वोटों से आगे रही. 2024 में RLD एक बार फिर सबसे आगे रही और समाजवादी पार्टी से 27,047 वोटों की बढ़त बनाई. RLD के चंदन चौहान को 86,473 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के दीपक सैनी को 59,426 वोट मिले.
हस्तिनापुर में वोटरों की संख्या पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ी है. 2012 में यहां 300,172 रजिस्टर्ड वोटर थे, जो 2017 में बढ़कर 326,707, 2019 में 334,786, 2022 में 344,527 और 2024 के लोकसभा चुनावों में 350,874 हो गए.
इस सीट पर वोटिंग प्रतिशत ज्यादातर 60 से 70 के बीच रहा है, लेकिन 2024 में इसमें भारी गिरावट आई. यह 2012 में 61.60 प्रतिशत, 2017 में 67.91 प्रतिशत, 2019 में 65.87 प्रतिशत और 2022 में 66.95 प्रतिशत था, जो 2024 में गिरकर 55.57 प्रतिशत हो गया.
हस्तिनापुर हिंदू-बहुसंख्यक सीट है. यहां के कुल वोटरों में 21.39 प्रतिशत वोटर अनुसूचित जाति (SC) के हैं. यह सीट मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां 71.52 प्रतिशत वोटर गांवों में और 28.48 प्रतिशत शहरी इलाकों में रहते हैं.
हस्तिनापुर का बहुत ज्यादा ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है. महाभारत काल में यह कुरु राज्य की राजधानी थी और कौरवों व पांडवों, दोनों की सत्ता का केंद्र थी. यह शहर जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है. यहां कई महत्वपूर्ण जैन मंदिर हैं, जिनमें मशहूर जंबूद्वीप मंदिर भी शामिल है. पांडवेश्वर मंदिर, द्रौपदी घाट और कर्ण मंदिर जैसे हिंदू मंदिर बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करते हैं. इस शहर का सिख इतिहास से भी संबंध है, क्योंकि यह 'पंच प्यारे' में से एक, भाई धर्म सिंह का जन्मस्थान है. सदियों के दौरान, हस्तिनापुर अपने प्राचीन वैभव से गिरकर आज एक छोटा ब्लॉक-स्तरीय शहर बन गया है.
हस्तिनापुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानों में बूढ़ी गंगा नदी के किनारे बसा है. यहां सड़क संपर्क ठीक-ठाक है. यहां कोई रेल संपर्क नहीं है, और सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन मेरठ में है, जो जिला मुख्यालय है और लगभग 40-45 किमी दूर है. बिजनौर लगभग 45-50 किमी, मुजफ्फरनगर लगभग 60 किमी, गाजियाबाद और नोएडा लगभग 100-110 किमी और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली लगभग 130-140 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 450 किमी दूर है.
यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. गन्ना, अनाज और बागवानी यहां की मुख्य फसलें हैं. मतदाताओं के मुख्य मुद्दों में गन्ने की कीमतें, सिंचाई, बिजली आपूर्ति, बाढ़ से सुरक्षा, रोजगार और बेहतर सड़क संपर्क शामिल हैं.
हस्तिनापुर ने पिछले कुछ वर्षों में अप्रत्याशित रुझान और बदलती राजनीतिक निष्ठाएं देखी हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय लोक दल के भाजपा के साथ गठबंधन करने के कारण, भाजपा के नेतृत्व वाले NDA को 2027 के विधानसभा चुनावों में थोड़ी बढ़त हासिल है. हालांकि, इस निर्वाचन क्षेत्र के उतार-चढ़ाव भरे इतिहास को देखते हुए, मुकाबला खुला और कड़ा रहने की संभावना है.
(अजय झा)
Yogesh Verma
SP
Sanjeev Kumar
BSP
Vinod Kumar
AIMIM
Archana Gautam
INC
Himanshu Siddharth
ASPKR
Nota
NOTA
Mamta
BVD
Anmol
AAAP
समाजवादी पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए अपना दूसरा उम्मीदवार घोषित कर दिया है. बरेली की बिथरी चैनपुर सीट से पूर्व बीजेपी सांसद धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव ने कहा कि उनके पार्टी में आने से पीडीए और सामाजिक न्याय की लड़ाई मजबूत होगी.
आकाश आनंद ने बुलंदशहर में रैली के दौरान मायावती से हुई बातचीत का जिक्र किया. उनके मुताबिक, उन्होंने मायावती से पूछा था कि वह बार-बार उनकी परीक्षा क्यों लेती हैं. आकाश ने बताया कि मायावती ने बाबा साहेब आंबेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम के संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी बिना परीक्षा लिए नहीं सौंपी जा सकती.
भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. यमुना किनारे बसी यह उपजाऊ भूमि पेड़े, डेयरी उद्योग और 'मथुरा रिफाइनरी' के लिए विश्व प्रसिद्ध है. यहां श्रीकृष्ण जन्मभूमि और बांके बिहारी मंदिर प्रमुख पर्यटन केंद्र हैं. सियासत की बात करें तो 2022 के चुनावों में भाजपा ने जिले की पांचों विधानसभा सीटों (छाता, मांट, गोवर्धन, मथुरा सदर और बलदेव) पर क्लीन स्वीप करते हुए परचम लहराया था.
अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधा. उन्होंने कुछ राजनीतिक दलों को 'प्रीपेड पार्टी' बताते हुए कहा कि उनका OTP कहीं और से आता है और उनके माइक-लाउडस्पीकर भी दूसरे दलों के हैं.
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चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि मनोज सिंह यादव 'प्रधान' से उनका पुराना संबंध है. वह कई सालों से जब भी वाराणसी या आसपास के जिलों गाजीपुर, चंदौली और मिर्जापुर जाते हैं, तो प्रधान की फॉर्च्यूनर से ही जाते हैं.
क्या है यूपी इलेक्शन का प्लान बी... क्योंकि अब ये सवाल उठ रहा है कि असदुद्दीन ओवैसी किसकी बी टीम हैं... समाजवादी पार्टी तो पहले दिन से ही ये आरोप लगाती रही है... लेकिन अब बाबा रामदेव के एक बयान ने यूपी में सियासी हलचल मचा दी है.. बाबा रामदेव ने कहा है कि ओवैसी वोट काटते हैं तो योगी जी का फायदा होता है. देखें...
समाजवादी पार्टी का पारंपरिक गढ़ माना जाने वाला मैनपुरी जिला 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और भाजपा के बीच कांटे के मुकाबले का गवाह बना. जिले की 4 में से 2 सीटों (करहल व किशनी) पर सपा का कब्जा बरकरार रहा, जबकि सदर मैनपुरी और भोगांव सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की. परिणाम 2-2 की बराबरी पर छूटने के बाद अब 2027 के महासमर पर सभी की निगाहें हैं.
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे अपनी साख बचाकर रखनी चाहिए. उनके मुताबिक आयोग ने यह साख खो दी है, इसलिए राजनीतिक कार्यकर्ताओं को लगातार निगरानी करनी पड़ रही है. उन्होंने बंगाल का उदाहरण दिया, जहां कई लोगों को पहले वोट डालने से रोका गया और बाद में उनके वोट को सही बताया गया.
यूपी के अमेठी में मतदाता सूची को लेकर प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है. महमूदपुर न्याय पंचायत में लगभग 200 जीवित ग्रामीणों के नाम वोटर लिस्ट से गायब कर दिए गए हैं, जबकि 48 से अधिक मृतकों के नाम अब भी सूची में बने हुए हैं.