गाजियाबाद, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले का मुख्यालय और एक शहर है. दिल्ली से सटा होने और राज्य का पहला बड़ा शहर होने के कारण इसे 'उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार' कहा जाता है. यह दिल्ली नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) का हिस्सा है और कानपुर के बाद राज्य का दूसरा सबसे ज्दाया औद्योगिक शहर है.
1957 में बनी गाजियाबाद विधानसभा सीट एक सामान्य, अनारक्षित सीट है. यह गाजियाबाद लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है और इसमें गाजियाबाद नगर निगम के 25 वार्ड आते हैं, जिससे इसे शहरी स्वरूप मिलता है.
गाजियाबाद में अब तक 19 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2004 और 2014 में हुए दो उपचुनाव भी शामिल हैं. शुरुआती दशकों में कांग्रेस पार्टी का दबदबा था और उसने छह बार यह सीट जीती थी. वहीं, 1991 के बाद से हुए पिछले 10 चुनावों में से सात जीतकर BJP ने यहां अपनी मजबूत पकड़ बनाई है, हालांकि वह इसे अपना गढ़ पूरी तरह नहीं बना पाई है क्योंकि उसकी जीत का सिलसिला कई बार टूटा है. उसने 1991 और 1996 के बीच लगातार तीन बार जीत हासिल की और हाल ही में 2017 के बाद से हुए तीनों चुनाव जीते हैं. रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, इंडियन नेशनल कांग्रेस (U), समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने एक-एक बार यह सीट जीती है.
BSP ने 2012 में BJP से यह सीट छीन ली थी और अब तक की अपनी एकमात्र जीत दर्ज की थी. तब उसके उम्मीदवार सुरेश बंसल ने BJP के अपने प्रतिद्वंद्वी अतुल गर्ग को 12,121 वोटों से हराया था. 2017 में BJP ने यह सीट वापस हासिल कर ली, जब अतुल गर्ग ने BSP के मौजूदा विधायक सुरेश बंसल को 70,505 वोटों से हराया. अतुल गर्ग ने और भी बड़े अंतर से BJP के लिए यह सीट बरकरार रखी. 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के विशाल वर्मा को 1,05,537 वोटों से हराया. गर्ग को 1,50,205 वोट मिले, जबकि वर्मा को 44,668 वोट ही मिल पाए. बाद में गाजियाबाद लोकसभा सीट से गर्ग के लोकसभा के लिए चुने जाने के कारण उसी साल उपचुनाव हुआ. इसमें BJP के उम्मीदवार संजीव शर्मा ने समाजवादी पार्टी के सिंह राज जाटव को 69,351 वोटों के कम अंतर से हराया. इसकी मुख्य वजह वोटिंग में भारी गिरावट थी. वोटिंग प्रतिशत गिरकर 33.30% पर आ गया, जो 2022 के चुनावों के मुकाबले 18.47% कम था.
विधानसभा चुनावों के उलट, लोकसभा चुनावों में गाजियाबाद क्षेत्र में BJP का रिकॉर्ड शानदार रहा है. पार्टी ने पिछले चारों संसदीय चुनावों में जीत हासिल की है. 2009 में पार्टी कांग्रेस से 9,535 वोटों से आगे थी. 2014 में BSP ने कांग्रेस की जगह दूसरी पोजीशन ले ली, लेकिन BJP ने BSP को 81,702 वोटों के बड़े अंतर से हराया. 2019 में BJP को इस क्षेत्र में एक और नई पार्टी से चुनौती मिली, लेकिन उसका कोई खास असर नहीं हुआ. पार्टी ने समाजवादी पार्टी को 86,221 वोटों के और भी बड़े अंतर से हराया. 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP की बढ़त थोड़ी कम हुई, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं थी. पार्टी कांग्रेस से 63,256 वोटों से आगे रही. BJP के अतुल गर्ग को 137,206 वोट मिले, जबकि उनकी कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी डॉली शर्मा को 73,950 वोट मिले.
गाजियाबाद विधानसभा क्षेत्र में रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में यह संख्या 335,260 थी, जो 2017 में बढ़कर 424,077 और 2019 में 448,097 हो गई. इसके बाद 2022 में यह संख्या बढ़कर 473,009 और 2024 के लोकसभा चुनावों में 476,653 हो गई.
वोटिंग प्रतिशत औसत रहा है. यह 2012 में 54.08 प्रतिशत, 2017 में 53.27 प्रतिशत, 2019 में 53.25 प्रतिशत, 2022 में 51.78 प्रतिशत था और 2024 में घटकर 47.76 प्रतिशत हो गया.
2011 की जनगणना के अनुसार, गाजियाबाद हिंदू-बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र है, जहां 72.93 प्रतिशत हिंदू, जिनमें 16.50 प्रतिशत अनुसूचित जाति के मतदाता शामिल हैं और 25.34 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं. यह मुख्य रूप से शहरी सीट है, जिसमें गाजियाबाद नगर निगम की सीमा के भीतर आने वाले वार्ड शामिल हैं.
गाजियाबाद की स्थापना 1740 में मुगल सम्राट मुहम्मद शाह के वजीर गाजी-उद-दीन ने की थी और इसका नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया था. ब्रिटिश काल तक यह एक छोटा सा शहर बना रहा, लेकिन बाद में यह ग्रांड ट्रंक रोड पर एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ. आजादी के बाद दिल्ली के पास होने के कारण शहर का तेजी से विकास हुआ और यह एक प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र बन गया.
गाजियाबाद की अर्थव्यवस्था विविध है. कानपुर के बाद यह उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे अधिक औद्योगिक शहर है. यहां के प्रमुख उद्योगों में स्टील, कागज, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और उपभोक्ता सामान शामिल हैं. यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र भी है. शहर का बुनियादी ढांचा बहुत अच्छा है. यह सड़क, रेल और दिल्ली मेट्रो नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल (RRTS) ने कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाया है. गाजियाबाद का अपना हवाई अड्डा (हिंडन हवाई अड्डा) है और यह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के भी करीब है. दिल्ली यहाँ से लगभग 20-25 किमी दूर है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा लगभग 25-35 किमी, हापुड़ लगभग 45 किमी, मोदीनगर लगभग 30 किमी, बुलंदशहर लगभग 60 किमी, मेरठ लगभग 70 किमी, सहारनपुर लगभग 140 किमी, हरिद्वार लगभग 180 किमी और देहरादून लगभग 220 किमी दूर हैं. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 450 किमी दूर है.
गाजियाबाद में इतिहास और वर्तमान, दोनों ही बीजेपी के पक्ष में हैं. 2014 से यहां हुए सभी छह चुनावों में जीत या बढ़त हासिल करने और भारी अंतर से जीतने के कारण, समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्ष के लिए कोई ऐसा उम्मीदवार और आकर्षक नैरेटिव ढूंढना मुश्किल होगा जो गाजियाबाद के वोटरों को बीजेपी से दूर कर सके, क्योंकि बीजेपी 2027 के चुनावों में भी अपनी जीत का सिलसिला जारी रखने के लिए मजबूत स्थिति में है.
(अजय झा)
Vishal Verma
SP
Krishan Kumar
BSP
Sushant Goyal
INC
Nimit
AAAP
Nota
NOTA
Pintu Singh
IND
Rani Dev Shree
IND
Sudhir Kumar
IND
Naresh Kumar
RSPS
Pradeep Kumar Pathak
SBSPSP
Amit Sharma
IND
Ashutosh Gupta
IND
Rajnish Kumar Thakur
IND
Rakesh Suri
RTORP
उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी की सियासी चाल बदली-बदली नजर आ रही है. बीजेपी के साथ दोस्ती का रंग अब उन पर चढ़ने लगा है. इसीलिए जाट-मुस्लिम समीकरण के बजाय जाटों की किसान अस्मिता को सनातन और सवर्ण पहचान देने में जुटे हैं.
पेपर लीक और शिक्षा में धांधली को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का आंदोलन चल रहा है, जिसमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी और पार्टी सांसद डिंपल यादव फ्रंटफुट पर संघर्ष करती नजर आ रही हैं. जंतर-मंतर पर उतरने से डिंपल की छवि एक जुझारू नेता की बनकर उभरी है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी बीजेपी ने उम्मीदवार चयन के लिए 5 चरणों का विशेष सर्वे अभियान शुरू किया है. इस रिपोर्ट के आधार पर एंटी-इनकंबेंसी कम करने के लिए नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जिससे कई मौजूदा विधायकों के टिकट पर खतरा मंडरा रहा है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी अपना सियासी समीकरण दुरुस्त करने में जुट गए हैं. बीजेपी के साथ दोस्ती का असर भी जयंत चौधरी पर दिखने लगा है. इसी का नतीजा है कि जाट-मुस्लिम के बजाय जयंत चौधरी अब जाट-ब्राह्मण केमिस्ट्री बनाने में जुट गए हैं.
उत्तर प्रदेश की चुनावी बिसात इस बार हिंदुत्व के मुद्दे पर सेट होती दिख रही है. जिन अखिलेश यादव पर मुस्लिमों के तुष्टिकरण का बीजेपी हर चुनाव में आरोप लगाती रही, वही अखिलेश बिना लाग-लपेट चढ़ावा चोरी का मुद्दा जोर-शोर से उठाकर बीजेपी को असहज करने में लगे हैं. इसके जवाब में योगी भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर अखिलेश को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं. देखें ये स्पेशल शो.
AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सहारनपुर में जनसभा के दौरान यूपी सरकार पर पेपर लीक, बेरोजगारी और धार्मिक विवादों को लेकर तीखा हमला किया. इस दौरान उन्होंने दावा किया कि यूपी में दोबारा बीजेपी की सरकार नहीं बनेगी. ओवैसी ने ऐलान किया कि बीजेपी को हराने के लिए वो गठबंधन के लिए भी तैयार हैं.
लखनऊ में आजतक के कार्यक्रम 'पंचायत आजतक' में अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, हनुमान गढ़ी के महंत महंत राजू दास, धर्मगुरु स्वामी करपात्री जी और निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख महंत धर्मदास की विशेष उपस्थिति रही. 'जो राम को लाए हैं' सत्र में साधु-संतों ने राममंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर अपनी राय रखी. देखें वीडियो.
उत्तर प्रदेश की चुनावी बिसात हिंदुत्व के एजेंडे पर सेट किए जाने लगे हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव राम मंदिर के चंदा चोरी का मुद्दा उठाकर बीजेपी को घेरने में जुटे हैं. इसके जवाब में सीएम योगी से लेकर केशव प्रसाद मौर्य सहित बीजेपी भगवान श्रीकृष्ण के मुद्दे को उठाकर सपा को कठघरे में खड़े करने में जुटी है.
ओपी राजभर ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि 2012 में सत्ता में आते ही सपा कार्यकर्ताओं ने भदोही के मकदूमपुर गांव में दलित बस्ती को निशाना बनाया, घरों में आग लगाई और महिलाओं से बदसलूकी की. राजभर के मुताबिक उस वक्त प्रशासनिक दबाव के चलते पीड़ितों की एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई थी.
Uttar Pradesh Bypoll Election Results 2024 Updates: गाजियाबाद सदर सीट बीजेपी के अतुल गर्ग के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. अतुल गर्ग गाजियाबाद से लोकसभा सांसद चुने गए हैं. इस सीट बीजेपी ने संजीव शर्मा और सपा ने सिंहराज जाटव को मैदान में उतारा था.