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साइडलाइन करने का आरोप, इस्तीफा और फिर यू-टर्न... असम में हलचल लाने वाले भूपेन बोरा कौन

असम विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर एक हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के इस्तीफे और फिर उस पर मचे घमासान ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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 भूपेन बोरा की नाराजगी ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन (Photo-ITG)
भूपेन बोरा की नाराजगी ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन (Photo-ITG)

असम में चुनाव की तारीखों के करीब आते ही कांग्रेस में आंतरिक संकट खुलकर नजर आ रहा है. पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (APCC) भूपेन कुमार बोरा ने सोमवार सुबह 8 बजे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा भेजकर सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया. 

हालांकि, घंटों चले नाटकीय घटनाक्रम और राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझता दिखा और अपने फैसले से यू-टर्न लेते हुए उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया. इस्तीफा वापस भूपेन बोरा ने कहा- 'मैंने अभी इस बारे में अपने परिवार से बात नहीं की है. मुझे फैसला लेने के लिए और समय चाहिए.'

32 वर्षों तक कांग्रेस की सेवा करने वाले भूपेन बोरा ने अपने इस्तीफे में नेतृत्व द्वारा "अनदेखी" किए जाने का गंभीर आरोप लगाया. बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस यूनिट के प्रेसिडेंट थे और पिछले साल गौरव गोगोई ने उनकी जगह ली थी. वह असम में दो बार विधायक रह चुके हैं.

इस्तीफा देते समय उन्होंने साफ किया किया कि वह किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि पार्टी के भविष्य और राज्य इकाई में अपनी भूमिका को लेकर चिंतित हैं. बोरा ने कहा, "मैं राजनीति को अलविदा नहीं कह रहा हूं, लेकिन जिस तरह से मुझे नजरअंदाज किया गया, उसके बाद इस्तीफा देना जरूरी था."

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दिल्ली से गुवाहाटी तक मची खलबली
भूपेन बोरा के इस कदम ने कांग्रेस आलाकमान के हाथ-पांव फुला दिए. आनन-फानन में राहुल गांधी ने बोरा से करीब 15 मिनट फोन पर बात की. इसके अलावा के.सी. वेणुगोपाल और असम प्रभारी जितेंद्र सिंह ने भी उन्हें मनाने की कोशिश की. वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने तो छोटे भाई की तरह माफी मांगते हुए कहा, "भूपेन दा एक सच्चे कांग्रेसी हैं. अगर पार्टी के भीतर उन्हें किसी बात से ठेस पहुंची है, तो मैं छोटा भाई होने के नाते उनसे माफी मांगता हूं."

इस कलह के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा कर दी कि वह 17 फरवरी को भूपेन बोरा के आवास पर उनसे मुलाकात करेंगे. कांग्रेस के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है, क्योंकि अखिल गोगोई की रायजोर दल भी बोरा के संपर्क में है.

 कौन हैं भूपेन कुमार बोरा?

भूपेन कुमार बोरा की गिनती असम कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में होती है.2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के अध्यक्ष रहे बोरा 2006 से 2016 तक बिहपुरिया विधानसभा से विधायक रहे. 2016 और 2021 में उन्हें इस सीट पर बीजेपी से शिकस्त मिली. 2016 में जहां बीजेपी के देबानंद हजारिका ने करीब 26 हजार वोटों से हराया तो वहीं 2021 में बीजेपी के अमय कुमार ने करीब 10 हजार वोटों से हराया.

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 असम के लखीमपुर के रहने वाले भूपेन छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं और नॉर्थ लखीमपुर कॉलेज छात्र संघ के उपाध्यक्ष रहे. इसके बाद बाद में उन्होंने राज्य में युवा कांग्रेस अध्यक्ष की कमारी संभाली. अपने कार्यकाल के दौरान भी वह खूब सुर्खियों में रहे हैं. 2025 में कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें पद से हटाकर गौरव गोगोई को प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा सौंपा.

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