scorecardresearch
 

बंगाल में नए DGP की नियुक्ति अटकी... UPSC ने लौटाया पैनल, कहा- सुप्रीम कोर्ट करे फैसला

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य के पुलिस मुखिया की नियुक्ति को लेकर बड़ा संवैधानिक पेंच फंस गया है. केंद्र और राज्य के बीच टकराव अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है. UPSC ने राज्य सरकार को झटका दिया है और पैनल नामंजूर कर दिया. UPSC ने कहा कि DGP नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट फैसला करे.

Advertisement
X
UPSC से बंगाल सरकार को झटका लगा. DGP चयन प्रक्रिया से जुड़ा पैनल नामंजूर हो गया. (Photo: PTI)
UPSC से बंगाल सरकार को झटका लगा. DGP चयन प्रक्रिया से जुड़ा पैनल नामंजूर हो गया. (Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल में नए पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति प्रक्रिया पर पेंच फंस गया है. केंद्रीय लोक सेवा आयोग (UPSC) ने राज्य सरकार द्वारा भेजा गया अधिकारियों का पैनल लौटा दिया है और साफ कर दिया है कि मौजूदा प्रक्रिया के तहत किसी की भी नियुक्ति संभव नहीं है. इसके साथ ही UPSC ने प्रक्रियागत खामियों का हवाला दिया और सुप्रीम कोर्ट से निर्देश लेने की सलाह दी है.

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब प्रभारी DGP राजीव कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म होने वाला है और राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने नए DGP के चयन के लिए एम्पैनलमेंट कमेटी मीटिंग (ECM) का प्रस्ताव भेजा था. लेकिन UPSC ने इसे प्रक्रियागत अनियमितताओं और अत्यधिक देरी का हवाला देते हुए लौटा दिया.

UPSC ने 31 दिसंबर को राज्य के मुख्य सचिव को भेजे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के 2018 के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ फैसले का हवाला दिया. इस फैसले में स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी राज्य को मौजूदा DGP के रिटायरमेंट से कम से कम तीन महीने पहले UPSC को पैनल भेजना अनिवार्य है, ताकि पारदर्शी और समयबद्ध नियुक्ति हो सके.

UPSC के मुताबिक पश्चिम बंगाल में स्थायी DGP का पद 28 दिसंबर 2023 को तत्कालीन DGP मनोज मालवीय के रिटायरमेंट के बाद खाली हुआ था. इसके बावजूद राज्य सरकार ने जुलाई 2025 में जाकर 10 IPS अधिकारियों का पैनल भेजा, यानी डेढ़ साल से ज्यादा की देरी से.

Advertisement

मनोज मालवीय के बाद राजीव कुमार को DGP (इंचार्ज) नियुक्त किया गया था, लेकिन UPSC ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा DGP की नियुक्ति ही नियमों के अनुरूप नहीं मानी जा सकती.

एक वरिष्ठ नौकरशाह ने कहा, तकनीकी रूप से मनोज मालवीय ही राज्य के आखिरी स्थायी DGP माने जाएंगे. UPSC ने यह भी बताया कि 30 अक्टूबर 2025 को एम्पैनलमेंट कमेटी की बैठक हुई थी. बैठक में देरी को लेकर राज्य सरकार के स्पष्टीकरण पर चर्चा हुई, लेकिन समिति के सदस्यों के बीच पद रिक्त होने की तारीख को लेकर मतभेद सामने आए.

इस मामले में UPSC ने भारत के अटॉर्नी जनरल से कानूनी राय ली. अटॉर्नी जनरल ने नाम भेजने में हुई देरी को 'अत्यधिक' करार दिया और कहा कि UPSC के पास इतनी बड़ी देरी को माफ करने का कोई अधिकार नहीं है.

UPSC ने अटॉर्नी जनरल के हवाले से कहा कि अगर राज्य सरकार की दलील मानी जाती है तो इससे गंभीर विसंगतियां पैदा होंगी और योग्य अधिकारियों को अवसर से वंचित किया जा सकता है.

कानूनी राय के आधार पर UPSC ने साफ कहा कि वह DGP एम्पैनलमेंट प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा सकता और राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से उचित निर्देश लेने चाहिए.

इस बीच दिसंबर में 1990 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी राजेश कुमार ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर पैनल से बाहर रखा गया. उन्होंने प्रक्रिया को भेदभावपूर्ण और अनुचित बताया.

Advertisement

CAT ने मामले का संज्ञान लेते हुए UPSC को DGP एम्पैनलमेंट पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया था, लेकिन अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में जाती दिख रही है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement