पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव हैं और इससे पहले सभी राजनीतिक दल चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं. इसी कड़ी में बीजेपी ने भी राज्य में जनसंपर्क अभियान शुरू किया है, जिसका मकसद 'जनता का घोषणापत्र' तैयार करना है. इसे बीजेपी और पश्चिम बंगाल की जनता के बीच एक 'सामाजिक अनुबंध' कहा जा रहा है.
बीजेपी 'बिकोसितो पश्चिम बंगाल संकल्प पत्र, परामर्श संग्रह अभियान' चला रही है. इसके तहत दस्तावेज पार्टी कार्यालयों में तैयार होने के बजाय सीधे नागरिकों की आकांक्षाओं, शिकायतों और अपेक्षाओं से प्रेरित होंगे. इस अभियान का लक्ष्य जनता की प्रतिक्रिया को एक चुनावी रोडमैप में बदलना है.
बीजेपी की इस योजना का मूल विचार राज्य भर के जिलों, कस्बों और गांवों से एकत्रित जन भावनाओं को दिखाने वाला चुनाव घोषणापत्र बनाना बताया जा रहा है. बीजेपी ने अपने कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों को नागरिकों से सीधे जुड़ने, बैठकें आयोजित करने और मोहल्लों का दौरा करने की जिम्मेदारी दी है.
फोन नंबर, ईमेल के जरिए दे सकेंगे सुझाव
पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक स्थानों, नगर सभाओं और संगठनात्मक कार्यक्रमों में आकांक्षा संग्रह बॉक्स स्थापित किए जाएंगे. इनमें जनता अपने लिखित सुझाव और शिकायतें जमा कर सकेंगे. इसके अलावा कुछ फोन नंबर, ईमेल, क्यूआर कोड और हैशटैग भी जारी किए जाएंगे. इनके जरिए लोग अपने विचार साझा कर सकते हैं.
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रणनीति के मुख्य बिंदु
क्षेत्रवार आरोपपत्र: पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय शासन, भ्रष्टाचार और बुनियादी ढांचे की कमियों को उजागर करने वाले आरोपपत्र जारी कर रही है. इन शिकायतों को सीधे घोषणापत्र के मसौदे में शामिल किया जाएगा.
प्रमुख मुद्दे: शुरुआती फीडबैक के मुताबिक, रोजगार, पारदर्शिता और सुशासन घोषणापत्र के मुख्य स्तंभ होंगे. युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार और पारदर्शी भर्ती प्रणाली पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
अति-स्थानीय दृष्टिकोण: बीजेपी वैचारिक बहसों के बजाय मोहल्ले स्तर की चिंताओं, जैसे नागरिक सुरक्षा और सेवा वितरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
दोतरफा हमला: एक तरफ पार्टी जनता की आकांक्षाएं जुटा रही है, वहीं दूसरी तरफ टीएमसी सरकार की कथित विफलताओं पर 'निर्वाचन क्षेत्रवार' आरोपपत्र जारी कर रही है.