Uttar Pradesh News: प्रदेश में SIR की प्रक्रिया में 2.89 करोड़ वोटर्स के नाम मतदाता सूची से कट गए हैं. ऐसे में अब ऐसी 53 से अधिक सीटें जहां पर हार-जीत का अंतर 5000 से कम है, वहां सियासी समीकरण बदलना तय माना जा रहा है. अपने पाले में सीटें खींचने को अब राजनीतिक दलों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी.
SIR प्रक्रिया के बाद बदले सियासी समीकरण
यूपी के वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 53 ऐसी सीटें थीं, जहां पर हार-जीत का अंतर 5000 से कम था. कांटे की टक्कर वाली इन सीटों में से 32 भाजपा व 21 सपा के खाते में आईं थीं. उदाहरण के तौर पर बाराबंकी की रामनगर विधानसभा सीट पर सपा के फरीद महफूज किदवई ने भाजपा के शरद कुमार अवस्थी को 261 वोटों से हराया था. अब एसआईआर की प्रक्रिया के बाद इस विधानसभा सीट पर 54435 वोट कट गए हैं. अगर आगे अब इस सीट पर फॉर्म-6 भरकर नए मतदाता इससे ज्यादा न बढ़े या फिर दावे और आपत्तियों के बाद अंतिम मतदाता सूची में अगर इतने वोट कटेंगे तो फिर यहां पर पूरा सियासी समीकरण बदल सकता है. देखने की बात यह होगी कि आखिर किस पार्टी के समर्थक वोट इसमें घटें हैं.
ऐसे ही इस जिले की कुर्सी विधानसभा सीट पर भाजपा के साकेन्द्र वर्मा ने सपा के राजेश वर्मा को 217 वोट से हरा दिया था. अब एसआईआर की प्रक्रिया में यहां पर भी 52766 वोट कट गए हैं. नए मतदाता बनाने व दावे और निस्तारण की आपत्ति के बाद भी अगर इतने वोट कटेंगे तो यहां भी हार और जीत का समीकरण बदल सकता है.
बिजनौर की धामपुर विधानसभा सीट बीजेपी के अशोक राणा ने सपा के नईमुल हसन से 203 मतों के अंतर से जीती थी. अब इस विधानसभा सीट पर भी 47513 मतदाताओं के नाम एसआईआर की प्रक्रिया में कट गए हैं. अगर यहां नए मतदाता जोड़ने और दावे व आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची में ही इतने वोट कटे तो यहां पर भी जीत-हार का सियासी गुणा-भाग बदल जाएगा.
भाजपा ने 1121 आवेदन दाखिल किए, विपक्ष पीछे
चुनाव आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करने के बाद राजनीतिक दलों ने दावे और आपत्तियों की एक महीने की अवधि के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज कराने के लिए बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) सक्रिय कर दिए हैं. यह अवधि 6 फरवरी को समाप्त होगी.
फोकस नए युवा मतदाताओं (जिन्होंने 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी की), दस्तावेजों के अभाव में नाम हटे पात्र मतदाताओं, मैप न होने वाले मतदाताओं और गणना चरण में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) द्वारा अनुपस्थित या न मिले मतदाताओं पर है.
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मतदाता नामांकन के लिए आवेदन जमा करने में भाजपा ने प्रतिद्वंद्वी दलों पर बढ़त ले ली है. भाजपा ने 1121 आवेदन जमा किए हैं, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) के 26 और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मात्र 19 फॉर्म हैं, आंकड़े बता रहे हैं.
मंगलवार को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने वाले यूपी सीईओ नवदीप रिणवा ने कहा कि ड्राफ्ट सूची में नाम शामिल न होने वाले पात्र मतदाता घोषणा और आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 भरकर जमा कर सकते हैं. 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष पूरे करने वालों को भी फॉर्म-6 भरना चाहिए ताकि उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में आ सके. दावे और आपत्तियां SIR के दूसरे चरण में 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दर्ज की जा सकती हैं.
राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट इस दौरान प्रतिदिन 10 फॉर्म जमा कर सकते हैं. नोटिस चरण में 6 जनवरी से 27 फरवरी तक दावों और आपत्तियों की सुनवाई और सत्यापन होगा. दावों-आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को जारी होगी.
सभी मोर्चों और प्रकोष्ठों की टीमों को ईसीआई द्वारा नियुक्त बूथ लेवल अधिकारियों के साथ मतदाता सूची की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्हें गायब पात्र मतदाताओं से संपर्क करना चाहिए और उनके नाम मतदाता सूची में जोड़ने की आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पिछले महीने भाजपा बैठक में गायब मतदाताओं की ओर पार्टी कार्यकर्ताओं का ध्यान आकृष्ट किया था. उन्होंने कहा था- "ये आपके विरोधियों के मतदाता नहीं हैं, इन गायब मतदाताओं में 85 से 90 प्रतिशत हमारे हैं." भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी गुरुवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से SIR के दूसरे चरण में मतदाता नामांकन पर फोकस करने का आह्वान किया.
सपा और बीजेपी में जुबानी जंग
वहीं, इस मामले पर बात करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील सिंह साजन ने कहा कि भाजपा के यह जो बढे हुए नंबर दिख रहे हैं यह बताता है कि किस तरीके से हर जिले के डीएम और एसडीएम को बोल दिया गया है कि जब भाजपाई उनके पास फार्म से लेकर आए तो बिना किसी रूकावट के उन्हें मान्य किया जाए. जबकि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता जब इन्हीं अधिकारियों के पास जाते हैं तो तरह-तरह की बातें बताकर उन्हें कैंसल कर दिया जा रहा है. इसी वजह से भाजपा का नंबर सपा से कहीं ज्यादा दिखाई पड़ रहा है. साजन ने कहा भाजपा की पूरी कोशिश है कि इस 1 महीने में अपने ज्यादा से ज्यादा वोट बढ़ाया जाए और इसे लेकर अधिकारियों को निर्देशन की कर दिया गया है. PDA समाज के वोट को देखकर काटा जा रहा है.
सपा के आरोप पर भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने पलटवार करते हुए कहा कि अखिलेश यादव का काम केवल लोगों को गुमराह करना है. यह अधिकार आयोग ने हर पार्टी को दिया है कि वह फार्म भरवाए और अपना वोट ठीक करवाए लेकिन सपा केवल अफवाह फैलाती है.