पश्चिम यूपी में बीजेपी के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम सियासी चक्रव्यूह में घिरते जे रहा हैं. एक तरफ संगीत सोम की सियासी अदावत सपा विधायक अतुल प्रधान से चल रही है तो दूसरी तरफ अपनी बीजेपी के दिग्गज नेता संजीव बालियान के साथ उनके रिश्ते बिगड़े हुए हैं. ऐसे में संगीत सोम की 2027 में सरधना विधानसभा क्षेत्र में कैसे नैया पार लगेगी?
संगीत सोम मेरठ की सरधना से दो बार विधायक रहे हैं. बीजेपी के दिग्गज नेता संजीव बालियान ने सरधना में जाकर ही जाट समुदाय से हिसाब बराबर करने की बात कह चुके हैं, जिसके चलते ठाकुर बनाम जाट की बिसात बिछ रही है.
वहीं, अतुल प्रधान सपा के गुर्जर चेहरा बनकर अलग ही संगीम सोम के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. सरधना के भगवानपुर गांव में भीमराव आंबेडकर की मूर्ति तोड़े जाने की घटना को लेकर अतुल प्रधान और संगीत सोम आमने-सामने हैं. 2027 के चुनाव से पहले सरधना में जो सियासी हालात बन रहे हैं, उसके चलते संगीत सोम की सियासी मुश्किलें बढ़ती जा रही है.
बालियान कहीं बिगाड़ ने संगीम सोम का खेल
बीजेपी के दिग्गज नेता संगीत सोम मेरठ की सरधना से दो बार विधायक रहे हैं, लेकिन 2022 के चुनाव में अतुल प्रधान से हार गए थे. यही से संजीव बालियान और संगीत के रिश्ते खराब हो गए. संजीव बालियान मुजफ्फरनगर के दो बार सांसद रहे हैं, उनके ही संसदीय क्षेत्र का हिस्सा सरधना विधानसभा है. हिंदुत्व के दम और धार्मिक ध्रुवीकरण के दम पर ही बालियान सांसद और संगीत सोम विधायक बनते रहे हैं, लेकिन जैसे ही यह समीकरण गड़बड़ाया, वैसे ही चुनावी मात खा गए.
संजीव बालियान जाट समुदाय से हैं तो संगीत सोम ठाकुर जाति से हैं. ऐसे दोनों के बीच जुबानी जंग 2022 के चुनाव के बाद शुरू हुई और 2024 के लोकसभा चुनाव में संजीव बालियान की हार के बाद खुलकर सामने आ गई. सरधना सीट से संगीत सोम 2022 में हारे तब यह बात कही गई थी कि इसके पीछे अंतर्कलह थी. लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में संजीव बालियान मुजफ्फरनगर सीट से हारे तो उन्होंनेअपनी हार का प्रमुख कारण संगीत सोम को बताया.
संगीत सोम 2027 के विधानसभा चुनाव में फिर सरधना सीट से अपनी तैयारी कर रहे हैं तो संजीव बालियान ने रविवार को सरधना क्षेत्र में ही जाट पंचायत करके अपने तेवर दिखा दिए हैं. जाट सम्मेलन के दौरान संजीव बालियान ने बिना नाम लिए संगीत सोम पर निशाना साधा. उन्होंने कहा,'मेरा जो अपमान हुआ है, उसे मैं भूलने नहीं दूंगा. अगर तुम भूल गए तो भी मैं याद दिलाता रहूंगा और अगर मैं भूल जाऊं तो तुम मुझे याद दिलाते रहना.' ऐसे में साफ है कि जाट समुदाय के साथ उन्होंने अपनी हार का हिसाब लेने की बात कर कहीं न कहीं संगीत सोम की मुश्किलें बढ़ा दी है.
अतुल प्रधान की संगीत सोम से सियासी अदावत
सरधना विधानसभा सीट पर संगीत सोम और संजीव बालियान की सियासी अदावत 15 साल पुरानी है. 2017 में पहली बार दोनों के बीच मुकाबला हुआ था, जिसमें संगीत सोम भारी पड़े थे, लेकिन 2022 में अतुल प्रधान ने हिसाब बराबर कर लिया. सरधना से अब दूसरी बार विधायक बनने के लिए अपने अतुल प्रधान इन दिनों अपने सियासी समीकरण दुरुस्त करने में जुटे हैं और संगीत सोम को दलित-ओबीसी विरोधी कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. इस तरह से सरधना के सियासी चक्रव्यूह में संगीत सोम घिरते जा रहे हैं.
सपा पर संगीत सोम हमला करने से पीछे नहीं रहते हैं और उनके निशाने पर सीधे अखिलेश यादव या फिर आजम खान रहते हैं. अतुल प्रधान को अखिलेश यादव का राइट हैंड माना जाता है. ऐसे में मेरठ स्थित भगवानपुर गांव में भीमराव आंबेडकर की मूर्ति तोड़े जाने की घटना के बाद संगीत सोम ने सपा को घेरा तो अतुल प्रधान ने उन्हें दलित विरोधी कठघरे में खड़ा कर दिया. इतना ही नहीं अतुल प्रधान ने संगीत सोम पर भूमाफिया तक का आरोप लगा दिया है. इस तरह से संगीत सोम का गेम सरधना सीट पर गड़बड़ा न जाए?
जाट और गुर्जर के चक्रव्यूह में घिरे संगीत सोम
संगीत सोम ठाकुर समुदाय से हैं तो अतुल प्रधान गुर्जर जाति से आते हैं और संजीव बालियान जाट हैं. अतुल प्रधान ने गुर्जर और मुस्लिम समीकरण बनाकर विधायक बने हैं तो संगीत सोम गुर्जर व जाट वोट के दम पर दो बार विधायक रहे हैं. अतुल प्रधान के चुनावी मैदान में उतरने से गुर्जर वोट पहले ही संगीत सोम से दूर हो चुका है और अब संजीव बालियान के आक्रामक तेवर के बाद जाट वोट समीकरण बिगड़ने का खतरा साफ नजर आ रहा है.
सरधना विधानसभा सीट पर हार-जीत के रोल में पांच जातियां हैं. मुस्लिम वोटर करीब एक लाख हैं तो ठाकुर समुदाय के 60 हजार वोटर्स है. जाट समाज 50 हजार है तो गुर्जर 40 हजार हैं. इसके अलावा 45 हजार से 50 हजार दलित वोटर्स हैं. ठाकुर और जाट मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ रहा है. संगीत सोम इसी समीकरण के सहारे दो बार विधायक रहे तो सपा मुस्लिम गुर्जर और दलित समीकरण के दम पर 2022 में उन्हें हराने में सफल रही है.
सरधना में ठाकुर बाहुल्य 'ठाकुर चौबीसी' क्षेत्र है, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन जाट वोटों के बिना संगीत सोम के लिए जीतना आसान नहीं है. संजीव बालियान ने जिस तरह से मोर्चा खोल रखा है और जाटों से 2024 की हार का हिसाब बराबर करने की बात कर रहे हैं, उससे अब संगीत सोम की चिंता बढ़ा दी है.
गुर्जर वोट पहले ही सरधना में बीजेपी से दूर हो चुका है और अतुल प्रधान ने जिस तरह दलित समुदाय को भी उनके खिलाफ करने में जुट गए हैं, उससे संगीत सोम के लिए सियासी मुश्किलें काफी बढ़ती जा रही है. इस तरह सरधना का सियासी समीकरण भले ही बीजेपी के पक्ष में हो, लेकिन संगीत सोम के लिए किसी तरह से मुफीद नहीं दिख रहा है. संगीत सोम ने आरएलडी नेता जयंत चौधरी के साथ अपने रिश्ते पहले ही बिगाड़ रखे हैं. ऐसे में संगीत सोम की वापसी काफी मुश्किल भरी लग रही है.