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गले लगाया, 500 रुपए का नोट दिया... PM मोदी को नाव में बैठाकर खुशी से फूले नहीं समाया नाविक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हुगली नदी के किनारे नाव की सवारी की. जिस नाव में वो बैठे, उसके नाविक गौरांग विश्वास को प्रधानमंत्री ने नाव में सवारी करने के लिए 500 रुपए किराया भी दिया.

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पीएम मोदी ने नाविक को गले भी लगाया. (Photo- X/Narendra Modi)
पीएम मोदी ने नाविक को गले भी लगाया. (Photo- X/Narendra Modi)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के लिए चुनावी प्रचार में जुटे हैं. इस बीच शुक्रवार को उन्होंने हुगली नदी पर सुकून भरे पल बिताए. पीएम मोदी ने इस दौरान नाव की सवारी की और फोटोग्राफी भी की. उन्होंने जिस नाविक की नाव में सवारी की, उसने इस पल को सपने जैसा बताया.

पीएम मोदी ने जिस नाव पर बैठकर हुगली नदी के प्रिंसेप घाट पर बोटिंग की, वो नाविक गौरांग विश्वास की थी. गौरांग ने अपनी नाव में प्रधानमंत्री के बैठने पर खुशी जाहिर की और कहा उन्हें अपनी नाव में बैठाने का मौका मिलना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी. 

गौरांग ने बताया कि जब पीएम मोदी उनकी नाव पर आए, तो उन्हें ऐसा लगा जैसे वो कोई सपना देख रहे हों. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने उनसे सिर्फ उनका नाम पूछा. इसके बाद नाव से उतरते समय उन्होंने खुद अपने हाथ से गौरांग तो 500 रुपये दिए.

(Photo- X/Narendra Modi)

इससे पहले पीएम मोदी ने झाड़ग्राम में एक दुकान पर रुककर झालमुड़ी खाई थी. तब भी वो दुकानदार को 10 रुपए का नोट देकर झालमुड़ी खरीदते नजर आए थे.

हुगली नदी से पीएम मोदी की खूबसूरत तस्वीरें

प्रधानमंत्री ने आज सुबह-सुबह हुगली नदी से अपनी मनमोहक तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थीं. इनमें वो नाव पर बैठकर आसपास के मंजर को कैमरे में कैद करते नजर आए. इस दौरान उन्होंने नाविक के साथ भी एक तस्वीर पोस्ट की थी जिसमें वो उसे गले लगाए दिखे. उन्होंने हुगली नदी से कुछ वीडियो भी पोस्ट किए और इन पलों को 'कभी न भूल पाने' वाला बताया. 

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तस्वीरें शेयर करते हुए पीएम मोदी ने लिखा, 'गंगा नदी हर बंगाली के दिल में एक विशेष स्थान रखती है. ये कहा जा सकता है कि गंगा बंगाल की आत्मा में बहती है. गंगा का पवित्र जल पूरी सभ्यता की शाश्वत चेतना को आगे बढ़ाता है. आज सुबह कोलकाता में, मैंने हुगली नदी के किनारे कुछ समय बिताया. मां गंगा के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का मौका मिला. मैंने सुबह सैर करने वालों और नाव चलाने वालों से भी मुलाकात की. नाव चलाने वालों की अथक मेहनत तारीफ के काबिल है.'

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