केरलम में विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को वोटिंग हुई और अभी नतीजे भी नहीं आए थे कि कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए होड़ शुरू हो गई. एग्जिट पोल में UDF यानी कांग्रेस गठबंधन को बड़त मिलती दिख रही है. बस इतना काफी था कि सोशल मीडिया पर तीन नेताओं के समर्थक अपने-अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाने की मांग करने लगे. पोस्टर लगे, वीडियो वायरल हुए और एक जगह तो पोस्टर वॉर इतनी बुरी हो गई कि पार्टी दफ्तर के बाहर ही एक नेता के खिलाफ पोस्टर लग गए.
केरलम में अभी LDF यानी वामपंथी गठबंधन की सरकार है जिसके मुखिया CPIM हैं. विपक्ष में UDF है जिसकी अगुवाई कांग्रेस करती है. इस बार के चुनाव में एग्जिट पोल UDF को बढ़त दे रहे हैं. अगर UDF जीतती है तो कांग्रेस का मुख्यमंत्री बनेगा. और यहीं से शुरू हो गया है CM की कुर्सी के लिए अंदरखाने का खेल.
तीन बड़े दावेदार कौन हैं?
पहले नाम हैं वीडी सतीशन के. वो अभी केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं. एग्जिट पोल में उन्हें सबसे पसंदीदा CM चेहरा बताया गया है. चुनाव के दौरान वामपंथी पार्टियों ने उन पर सबसे ज्यादा निशाना साधा जिससे कांग्रेस समर्थकों में उनकी छवि एक तरह के रक्षक जैसी बन गई. उनके एक फैन पेज पर राज्य सरकार की गाड़ी नंबर 1 की तस्वीर "लोडिंग" के कैप्शन के साथ वायरल हुई. लेकिन उनकी राह आसान नहीं है. उन्होंने कभी कोई मंत्री पद नहीं संभाला. तीनों में सबसे कम उम्र के हैं. पार्टी के कुछ बड़े नेताओं के साथ उनके रिश्ते बहुत अच्छे नहीं हैं. अगर UDF 100 से ज्यादा सीटें जीतती है तो वो आगे हो सकते हैं लेकिन अगर करीब 80 सीटें आईं तो उनकी राह मुश्किल होगी.
दूसरे दावेदार हैं केसी वेणुगोपाल. वो कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी संगठन में बहुत ताकतवर माने जाते हैं. उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर उनकी भूमिका गिनाते हुए पोस्टर लगाए. उनके समर्थकों के मुताबिक उन्होंने बागियों को मनाया, सही उम्मीदवार चुने और जोरदार प्रचार किया. इस बार सबसे ज्यादा कांग्रेस उम्मीदवार उनकी पसंद के हैं जो उनके पक्ष में जा सकता है. लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि क्या पार्टी का हाई कमान अपने संगठन महासचिव को किसी राज्य का मुख्यमंत्री बनाने देगा?
यह भी पढ़ें: Exit Poll: केरलम में कांग्रेस को सलाम, वाम का काम तमाम, जानें किसे मिल रही कितनी सीटें
तीसरे दावेदार हैं रमेश चेन्निथला. वो सबसे अनुभवी नेता हैं. उनके समर्थकों ने उनके जीवन और अनुभव पर एआई वीडियो बनाकर वायरल किया. उनके गठबंधन के साझेदारों के साथ, धार्मिक संगठनों के साथ और सभी पार्टियों के नेताओं के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं. अनुभव के मामले में वो सबसे आगे हैं.
पोस्टर वॉर कहां तक पहुंची?
इस हफ्ते यह मुख्यमंत्री पद की रेस की होड़ बहुत बुरी हो गई. एर्नाकुलम में कांग्रेस के जिला दफ्तर डीसीसी के बाहर वीडी सतीशन के खिलाफ पोस्टर लगा दिए गए. इन पोस्टरों में उन्हें मुख्यमंत्री कुर्सी का सपना देखना बंद करने और अपनी पीआर यानी अपनी छवि बनाने का काम रोकने को कहा गया. यह पार्टी के लिए बहुत शर्मनाक स्थिति थी.
पार्टी के बड़े नेताओं ने क्या कहा?
वरिष्ठ नेता के मुरलीधरन ने कहा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा यह फैसला हाई कमान विधायकों से बात करके करेगा. जो लोग पोस्टर वॉर में लगे हैं वो असली पार्टी कार्यकर्ता नहीं हैं. यानी पार्टी ने यह सब रोकने की कोशिश की लेकिन सोशल मीडिया पर बहस जारी रही.
IUML और CPIM की क्या भूमिका है?
कांग्रेस की मुख्य सहयोगी पार्टी IUML यानी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की भूमिका बहुत अहम होगी अगर मामला आखिरी वक्त तक खिंचा. IUML के समर्थन से ही किसी एक नेता का पलड़ा भारी हो सकता है.
दूसरी तरफ CPIM जो पहले कांग्रेस के इस मुख्यमंत्री वाले विवाद का मजाक उड़ा रही थी, एग्जिट पोल आने के बाद चुप हो गई. वामपंथी अभी भी यह मानते हैं कि असली नतीजे उनके पक्ष में होंगे.
यह भी पढ़ें: वामपंथ का अंतिम किला भी ढहा? केरलम में लेफ्ट की हार क्या कह रही है
आगे क्या होगा?
अगर एग्जिट पोल सही साबित हुए तो कांग्रेस हाई कमान के सामने बहुत मुश्किल काम होगा. तीन मजबूत दावेदार, एक-दूसरे के खिलाफ पोस्टर, और गठबंधन के साझेदारों की भूमिका. जानकारों का कहना है कि यह कर्नाटक से भी ज्यादा उलझा हुआ मामला साबित हो सकता है.