scorecardresearch
 

करूर भगदड़ केस: सीबीआई ने TVK प्रमुख विजय को फिर भेजा समन, 15 मार्च को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया 

करूर भगदड़ मामले में सीबीआई ने टीवीके चीफ विजय को 15 मार्च को दिल्ली स्थित मुख्यालय में पूछताछ के लिए तलब किया है. इससे पहले एजेंसी जनवरी में उनसे दो बार पूछताछ कर चुकी है.

Advertisement
X
सीबीआई ने करूर भगदड़ मामले की जांच के सिलसिले में टीवीके प्रमुख विजय को फिर से समन भेजा. (Photo: X/@TVK)
सीबीआई ने करूर भगदड़ मामले की जांच के सिलसिले में टीवीके प्रमुख विजय को फिर से समन भेजा. (Photo: X/@TVK)

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने करूर भगदड़ मामले में अभिनेता से नेता बने और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) पार्टी के प्रमुख विजय को 15 मार्च को दिल्ली स्थित मुख्यालय में पूछताछ के लिए पेश होने को कहा है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. सीबीआई ने विजय से जनवरी में दो बार पूछताछ की थी.

एजेंसी ने उन्हें 9 मार्च को भी बुलाया था, लेकिन अभिनेता ने आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़े राजनीतिक कार्यक्रमों का हवाला देते हुए पूछताछ को 15 दिन के लिए टालने का अनुरोध किया था. साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया था कि पूछताछ चेन्नई या तमिलनाडु के किसी कार्यालय में की जाए.

हालांकि एजेंसी ने उन्हें अब 15 मार्च को दिल्ली में पेश होने को कहा है. सीबीआई ने करूर से द्रमुक विधायक सेंथिल बालाजी को भी 17 मार्च को पूछताछ के लिए तलब किया है. बालाजी ने ‘X’ पर तमिल में लिखे संदेश में कहा कि वह 17 मार्च को सीबीआई के सामने पेश होकर करूर भगदड़ मामले में स्पष्टीकरण देंगे.

यह भी पढ़ें: तमिलनाडु: 'पुलिस ने पत्थर में फंसा तोड़ा पैर...', पिता ने शव लेने से किया इनकार, पुलिस हिरासत में दलित युवक की मौत पर बवाल  

Advertisement

यह मामला 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में विजय की रैली के दौरान हुई भगदड़ से जुड़ा है, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोग घायल हुए थे. इस मामले की जांच पहले विशेष जांच दल (SIT) कर रहा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई. शीर्ष अदालत ने जांच की निगरानी के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति भी गठित की थी.

न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजरिया की पीठ ने कहा था कि यह भगदड़ पूरे देश के नागरिकों के मन पर गहरा असर छोड़ गई है. अदालत ने कहा था कि मृतकों के परिजनों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है और निष्पक्ष, स्वतंत्र तथा पक्षपात रहित जांच से ही आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा बहाल किया जा सकता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement