उत्तर प्रदेश में योगी कैबिनेट विस्तार होए पांच दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक नए मंत्रियों को विभाग नहीं मिल सके. विभाग बंटवारे के सस्पेंस के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से मिले. इस मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि नए मंत्रियों को विभाग आंवटित किए जाने के साथ-साथ मंत्रिमंडल के स्वरूप में भी बड़ा फेरबदल हो सकता है?
योगी मंत्रिमंडल का भले ही विस्तार हो गया हो और कैबिनेट में सभी 60 मंत्रियों के पद भर दिए गए हैं. रविवार को शपथ लेने वाले नए मंत्रियों के को विभाग नहीं मिल सके. ऐसे में सबसे ज्यादा उत्सुकता इसी बात की बनी हुई है कि आखिर किस मंत्री को कौन सा विभाग मिल रहा है. इतना ही नहीं सबसे ज्यादा नजर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) पर टिकी हुई है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अमित शाह और नितिन नवीन से मुलाकात के बाद अब पांच दिनों से पेंडिंग पड़े मंत्रालय के विभाग बंटवारा जल्द हो जाएगा. यूपी संगठन यानि पकंज चौधरी की टीम के नाम को लेकर भी माथापच्ची चल रही है, जिसे लेकर सीएम योगी ने पार्टी नेतृत्व के साथ चर्चा की. ऐसे में बीजेपी अब मिशन-यूपी के लिए सरकार और संगठन को नए कैलेवर देने के फिराक में है ताकि सूबे में सत्ता की हैट्रिक लगाई जा सके?
नए मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कब?
सीएम योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में 10 मई को 6 नए सदस्यों की एंट्री हुई है और दो राज्य मंत्रियों का प्रमोशन कर स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया है. पांच दिन के बाद भी नए मंत्रियों को विभाग नहीं सौंपे गए हैं. मंत्रिमंडल में विभागों को लेकर लॉबिंग भी शुरू हो गई है. योगी मंत्रिमंडल के कई मंत्री दिल्ली में जमे हुए और सभी मंत्रालय में कुछ बेहतर पानी की उम्मीद में है.
योगी सरकार में जिन 6 मंत्रियों ने शपथ ली थी, उनमें से पांच दलित और ओबीसी समुदाय से हैं तो एक ब्राह्मण समुदाय से हैं. कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी ने प्रदेश की राजनीति को एक अलग दिशा देने की कोशिश की गई. इसके बाद अब गुरुवार को सीएम योगी के दिल्ली दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने अमित शाह और नितिन नवीन से मुलाकात की.
अमित शाह और नितिन नवीन से सीएम योगी की मुलाकात के मायने उत्तर प्रदेश की राजनीति में तलाशे जा रहे हैं. इसके पीछे की रणनीति को समझने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसे विभागों के बंटवारे से जोड़कर देखा जा रहा है. कैबिनेट विस्तार के बाद अब विभागों के बंटवारे में भी सियासी समीकरण को साधने की कवायद है. बीजेपी का मानना है मंत्रिमंडल के अच्छे विभाग को बंटवारे से जातीय संतुलन साधने की है.
योगी सरकार के स्वरूप में बड़ा बदलाव?
योगी मंत्रिमंडल विस्तार में भले ही किसी पुराने मंत्री को न हटाया गया हो और चुनाव निकट होने के कारण बच गए हों, लेकिन उनकी जिम्मेदारी जरूर कम की जा सकती है. योगी सरकार के जिन मंत्रियों का परफॉर्मेंस बेहतर रहा है, उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देकर सूबे में एक बड़ा संदेश दिया जा सकता है.
बीजेपी ने जिस तरीके मंत्रिमंडल विस्तार में दलित और ओबीसी को प्राथमिकता दी. 6 नए मंत्रियों में तीन ओबीसी और दो दलित मंत्री बनाए. ऐसे में उन्हें सिर्फ दिखावे के तौर पर मंत्रिमंडल में रखने के बजाय उन्हें अच्छा पोर्टफोलियो देने की चर्चा पार्टी के भीतर है. बीजेपी अब नए मंत्रियों के जरिए क्षेत्रीय, जातीय और सामाजिक संतुलन साधने के बाद नए सिरे से विभागों का बंटवारा करना चाहता है.
माना जा रहा है सीएम योगी की अमित शाह और नितिन नवीन से शिष्टाचार मुलाकात इसी मद्देनजर हुई है. सूबे में जल्द ही संगठनात्मक बदलाव भी होने हैं. इस पर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है. विभाग के बंटवारे में फंसे पेंच को सुलझाने की है. दिल्ली में सीएम योगी आदित्यनाथ की सीनियर लीडरों के साथ मुलाकात के बाद यूपी सरकार के मंत्रिमंडल के स्वरूप में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है.
यूपी में कई मंत्रियों को बदले जा सकते हैं विभाग
यूपी कैबिनेट विस्तार में किसी भी मंत्री की छुट्टी नहीं की है, लेकिन पिछले दिनों कई मंत्रियों के कामकाज की रिपोर्ट मंगाई गई थी. मुख्यमंत्री ने स्वयं कई विभागों की समीक्षा की. इसमें विभागों के कामकाज को लेकर असंतुष्टि की बात भी सामने आई थी. ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नए मंत्रियों को विभाग दिए जाने के साथ-साथ पुराने मंत्रियों के के विभागों में बड़ा फेरबदल किए जाने की संभावना है, लेकिन नजर पीडब्ल्यूडी विभाग को लेकर है.
2022 में सरकार बनने के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग जितिन प्रसाद को दिया गया था, लेकिन 2024 में केंद्र की सरकार में मंत्री बन जाने के बाद से इस विभाग का जिम्मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास है. योगी सरकार में भूपेंद्र चौधरी की एंट्री होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि क्या यह विभाग अब सीएम योगी अब भूपेंद्र चौधरी को सौंप सकते हैं या केशव प्रसाद मोर्य को दोबारा यह विभाग मिलेगा.
लोक निर्माण विभाग की संवेदनशीलता को देखते हए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसे अपने पास रखे हैं. PWD को लेकर लखनऊ से दिल्ली तक जबरदस्त लॉबिंग की जा रही है, लेकिन अभी सस्पेंस बना हुआ है. भूपेंद्र चौधरी के साथ सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है.
अखिलेश यादव की सरकार में मनोज पांडेय मंत्री रहे हैं, जिसके चलते उन्हें भी ठीक-ठाक मंत्रालय सौंपा जा सकता है. इसके अलावा सबकी नज़रें इसी पर टिकी हैं कि स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों को कौन सा विभाग मिल सकता है.