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दो चरणों में पश्चिम बंगाल चुनाव से बीजेपी खुश! क्या बढ़ेगी TMC की टेंशन?

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव कराने के फैसले से भाजपा उत्साहित नजर आ रही है. भाजपा को यह भी उम्मीद है कि इससे केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और चुनाव प्रबंधन आसान होगा. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को दक्षिण बंगाल में ज्यादा समय तक प्रचार करने का मौका मिल सकेगा.

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव सिर्फ दो चरणों में होने को भाजपा अपने लिए सकारात्मक मान रही है. (Photo: X/@BJP4Bengal)
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव सिर्फ दो चरणों में होने को भाजपा अपने लिए सकारात्मक मान रही है. (Photo: X/@BJP4Bengal)

पश्चिम बंगाल में इस बार विधानसभा चुनाव महज दो चरणों में कराने के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. भारत निर्वाचन आयोग के इस ऐलान का भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने स्वागत किया है और पार्टी के अंदर इसे अपने लिए संभावित रूप से फायदेमंद माना जा रहा है. पिछली बार 2021 के विधानसभा चुनाव आठ चरणों में हुए थे, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव भी राज्य में छह चरणों में कराए गए थे. इस बार हालांकि चर्चा थी कि चुनाव कम चरणों में हो सकते हैं. 

चुनाव आयोग की पूरी टीम जब हाल ही में कोलकाता दौरे पर थी, तब भाजपा और सीपीएम की ओर से एक ही चरण में मतदान कराने की मांग भी रखी गई थी. भाजपा सूत्रों का मानना है कि कम चरणों में चुनाव होने से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कैडर की एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आवाजाही सीमित हो जाएगी. पार्टी का तर्क है कि अधिक चरणों में मतदान होने पर टीएमसी का संगठन अलग-अलग चरणों वाले इलाकों में अपनी ताकत बढ़ाकर चुनावी फायदा उठाता है. दो चरणों में मतदान होने से यह रणनीति सीमित हो सकती है.

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इसके अलावा भाजपा को उम्मीद है कि पड़ोसी राज्य असम में 9 अप्रैल तक चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद वहां के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और पार्टी संगठन को बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए अधिक समय मिल सकेगा. भाजपा नेताओं का यह भी मानना है कि कम चरणों में चुनाव होने से केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रबंधन में भी आसानी होगी. साथ ही पार्टी को उम्मीदवारों के चयन और रणनीति बनाने के लिए अधिक समय मिल रहा है.

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पार्टी के भीतर यह भी उत्साह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बार दक्षिण बंगाल में ज्यादा समय देकर प्रचार कर सकेंगे, जो भाजपा का अपेक्षाकृत कमजोर क्षेत्र माना जाता है. पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा, जिसमें उत्तर बंगाल, जंगलमहल और पूर्वी मिदनापुर जैसे क्षेत्र शामिल हैं. इन इलाकों को भाजपा का मजबूत क्षेत्र माना जाता है और यहां सुवेंदु ​अधिकारी का प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

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वहीं दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, जहां भाजपा अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है. ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेता और संगठन पूरी ताकत के साथ इन क्षेत्रों में प्रचार करेंगे. भाजपा को उम्मीद है कि सीमित चरणों में होने वाले चुनाव उसकी रणनीति को मजबूती दे सकते हैं. पश्चिम बंगाल​, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के नतीजे एक साथ 4 मई को घोषित होंगे.

दूसरी ओर, टीएमसी नेताओं का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा दो चरणों में हो या आठ चरणों में इसका अंतिम नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. चुनाव की तारीखें घोषित होने के बाद राज्य की वित्त मंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने दावा किया कि ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता पूरी तरह से ममता बनर्जी के साथ खड़ी है और इस बार भी तृणमूल कांग्रेस की जीत तय है.
 

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