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मार्च के पहले हफ्ते ऐलान, अप्रैल में हो सकती है वोटिंग... असम विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज

असम में विधानसभा चुनाव इस बार एक ही चरण में मार्च के पहले सप्ताह में होने की संभावना है. बीजेपी ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में चुनावी रणनीति तय कर ली है और तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य रखा है.

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असम में अप्रैल के पहले हफ्ते में वोटिंग हो सकती है
असम में अप्रैल के पहले हफ्ते में वोटिंग हो सकती है

असम की सियासत में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य में इस बार विधानसभा चुनाव एक ही चरण में कराए जाने की तैयारी है और मार्च के पहले सप्ताह में आदर्श आचार संहिता लागू हो सकती है. मार्च के पहले सप्ताह में चुनाव का ऐलान और अप्रैल के पहले सप्ताह में वोटिंग हो सकती है. बीजेपी ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ अपनी रणनीति लगभग तय कर ली है और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरने का संकेत दिया है.

जानकारी के मुताबिक, असम में विधानसभा चुनाव इस बार एक ही चरण में कराए जा सकते हैं. मार्च के पहले सप्ताह में राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू होने की संभावना है.सूत्रों के अनुसार खबर है कि चुनाव आयोग 4 मार्च से 8 मार्च के बीच चुनाव की तारीखों का औपचारिक ऐलान कर सकता है. सूत्रों के अनुसार चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और मतदान के दिन के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतर रखा जाएगा. ऐसे में मतदान अप्रैल के पहले सप्ताह, यानी 3 से 7 अप्रैल के बीच होने की संभावना जताई जा रही है.

बीजेपी ने राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए अपनी रणनीति लगभग तय कर ली है. पार्टी नेतृत्व ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनाई है. चुनाव मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा. पार्टी ने नेतृत्व को लेकर किसी भी तरह की असमंजस की स्थिति से बचने का फैसला किया है. बीजेपी ने चुनावी मुद्दों को दो श्रेणियों में विभाजित किया है- अवैध घुसपैठ, राज्य सरकार और केंद्र की विकास योजनाएं, कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व—खासतौर पर गौरव गोगोई—पर लगाए जा रहे आरोप, हिंदुत्व और महिला सशक्तिकरण जैसे विषय प्रमुख रहेंगे.

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गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर करीब 100 स्थानीय मुद्दों की पहचान कर उनके समाधान पर काम किया गया है. आंगनबाड़ी, चाय बागान श्रमिक, सरकारी कर्मचारियों जैसे वर्गों के लिए किए गए कार्यों को प्रमुखता से उठाया जाएगा. पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि जिन विधायकों के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी का माहौल होगा, उनका टिकट काटा जा सकता है. इस बार 25 से 30 नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी है.

चुनाव तारीखों के ऐलान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 8 से 10 चुनावी रैलियों के लिए समय मांगा गया है. पार्टी नेतृत्व का दावा है कि इस बार एनडीए गठबंधन को राज्य की 90 से 100 सीटों पर जीत मिल सकती है.

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