उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में अभी एक साल से भी ज्यादा का वक्त है, लेकिन सियासी बिसात अभी से बिछाई जाने लगी है. बीजेपी सूबे में सत्ता की हैट्रिक लगाने के फिराक में है तो सपा अपने 10 साल के सियासी वनवास को खत्म करने की कवायद में है. ऐसे में सपा प्रमुख अखिलेश यादव मंगलवार को लखनऊ में अपने मौजूदा सभी सांसदों के साथ मिशन-2027 को फतह करने की रणनीति बनाएंगे.
अखिलेश यादव ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए लखनऊ पार्टी कार्यलय में अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसद की बैठक बुलाई है. इस दौरान अखिलेश यादव अपने सांसदों के जमीनी हकीकत को समझेंगे और उन्हें मिशन-2027 के लिए सियासी टास्क भी दे सकते हैं.
उत्तर प्रदेश में सपा के लिए 2027 का साख का सवाल बना हुआ है. 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात देने के बाद से सपा के हौसले बुलंद है और 2024 की तरह 2027 में प्रदर्शन दोहराना चाहती है. इसीलिए अखिलेश यादव अभी से अपने सिपहसलारों के साथ सियासी मंथन शुरू कर रहे हैं. ऐसे में सभी की निगाहें सपा की होने वाली बैठक पर लगी है?
सपा सांसदों के साथ अखिलेश की बैठक
समाजवादी पार्टी अपने सभी 37 लोकसभा सांसदों और 4 मौजूदा राज्यसभा सांसदों की लखनऊ में बैठक बुलाई है. अखिलेश यादव ने अपने सांसदों के साथ दोपहर 12 बजे लखनऊ में पार्टी मुख्यालय पर करेंगे.. इस बैठक में अखिलेश यादव यूपी के 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सांसदों से आगामी रणनीतियों पर चर्चा व मशविरा करेंगे.
अखिलेश यादव सभी सांसदों से उनके संसदीय क्षेत्र की विधानसभा सीटों की रिपोर्ट लेंगे. पिछले दिनों एसआईआर प्रक्रिया पर नजर बनाए रखने के लिए अखिलेश ने अपने सांसदों को जिलेवार जिम्मेदारी सौंपी थी. माना जा रहा है कि इस दौरान एसआईआर रिपोर्ट पर सांसदों से उनके जिले की जानकारी लेंगे.
सांसदों का रिपोर्ट कार्ड और नया टास्क
सपा ने अपने सभी सांसदों का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार किया है. इस बैठक में अखिलेश अपने सांसदों के रिपोर्ट कार्ड पर भी बात रख सकते हैं. इसके साथ ही बजट सत्र की रणनीति को लेकर भी बातचीत होगी. माना जा रहा है कि सपा ने जिस तरह से 2024 की चुनावी जंग जीती है, उसके लिहाज से 2027 की चुनावी लड़ाई भी फतह करने चाहती है. यही वजह है कि अखिलेश यादव अपने मौजूदा सांसदों से उनके-उनके जिम्मेदारी वाले जिले की रिपोर्ट लेंगे और साथ ही समझेंगे कि एसआईआर के साथ-साथ जमीन पर सियासी माहौल क्या है?
सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव सांसदों से सिर्फ उनके रिपोर्ट कार्ड पर ही बात नहीं करेंगे बल्कि 2027 के चुनाव के मद्देनजर सियासी टास्क भी दे सकते हैं. यूपी के एक संसदीय क्षेत्र में औसतन 5 विधानसभा सीटें आती हैं. माना जा रहा है कि अखिलेश यादव ने अपने हर सांसद को उनके क्षेत्र के तहत आने वाली विधानसभा सीट पर सपा को 2027 में जीत दिलाने का टास्क दे सकते हैं. इसके अलावा उन्हें सांसदों को सिर्फ अपने संसदीय क्षेत्र ही नहीं बल्कि आसपास की सीट जिताने का जिम्मा भी दे सकते हैं.
2027 में टिकट देने का क्या होगा फॉर्मूला
अखिलेश यादव की सांसदों के साथ होने वाली बैठक को 2027 में सपा के प्रत्याशी चयन की कड़ी में देखा जा रहा है. सपा इस बार टिकट वितरण में कई फार्मूले को आजमाएगी. सपा सीट के जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन करेगी. इसके अलावा जिसका अपनी सीट पर जातीय समीकरण पर सबसे ज्यादा पकड़ होगी, उसे ही इसपर चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा. यही वजह है कि दावेदारों को इस बार सपा का टिकट पाने के लिए लोहे के चने चबाने होंगे.
सपा मुखिया अखिलेश यादव PDA के नारे के तहत अपनी चुनावी नैया पार लगाने में जुटे हैं. इसके साथ ही इस बार उम्मीदवारों के चयन में भी समाजवादी पार्टी काम कर रही है. समाजवादी पार्टी उम्मीदवारों को टिकट देने से पहले उनकी सीट पर वास्तविक जनाधार का आकलन करेगी. इसके लिए सर्वे भी कराया जा रहा है. सपा हर सीट पर यह देखेगी कि किस सीट पर किस दावेदार का जातीय समीकरण के आधार पर सबसे मजबूत पकड़ है. उसी आधार पर उम्मीदवार तय किया जाएगा.
सपा टिकट के दावेदारों की जमीनी पकड़, क्षेत्र में सक्रियता, संगठन से जुड़ाव और जातीय समीकरण की पकड़ को परखाने के बाद फैसला लेगी. साफ है कि सभी मानकों पर खरा उतरने वाले दावेदारों को ही टिकट मिले. सपा मुखिया अखिलेश यादव लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं और उनके फीडबैक ले रहे हैं. इस तरह समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए डेटा, सर्वे और जमीनी फीडबैक आधारित रणनीति अपनाने जा रही है.